लव जिहाद पर लगाम जरूरी

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देवभूमि उत्तराखंड में बीते कुछ महीनों से जिस तरह लव जिहाद के एक के बाद एक मामले सामने आ रहे हैं वह हैरान और परेशान करने वाले हैं। पुरोला का मामला अभी शांत नहीं हुआ था कि चकराता क्षेत्र में इस तरह की घटना सामने आ गई अभी इन दोनों मामलों को लेकर जनाक्रोश शांत नहीं हुआ था कि चमोली की घटना को लेकर हंगामा मचा हुआ है। सवाल यह है कि क्या यह लव जिहाद का षड्यंत्र देवभूमि में बहुत पहले से चल रहा है जिस पर स्थानीय लोगों या पुलिस प्रशासन अथवा सामाजिक संगठनों व राजनीतिक दलो की नजर नहीं गई या फिर आज वर्तमान में यह लव जिहाद के मामले उफान पर आए हुए हैं? पहाड़ के लोग जो अब लव जिहाद की घटनाओं को लेकर इतने आगबबूला है कि गैर हिंदुओं और बाहरी लोगों को राज्य से बाहर खदेड़ने की मांग को लेकर निरंतर धरने प्रदर्शन कर रहे हैं और बंद कर रहे हैं उनका कहना है कि वह लंबे समय से इस तरह की घटनाओं का सामना कर रहे हैं यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी अनेक ऐसी घटनाएं होती रही हैं। अगर यह सच है तो पीड़ित हिंदुओं ने इतने लंबे समय से ऐसे मामलों पर चुप्पी क्यों साध रखी थी? यह हो सकता है कि सामाजिक शर्म और बदनामी इसका एक कारण रहा हो लेकिन अगर इस गलत काम का प्रारंभिक तौर से विरोध किया गया होता तो शायद यह समस्या इतनी विकराल रूप नहीं लेती। यह हैरान करने वाली बात है कि कुछ राजनीतिक दलों के नेता इसे अभी भी सत्तारूढ़ दल का प्रोपेगेंडा कहकर इसे चुनावी लाभ से जोड़कर देख रहे हैं। जब चकराता क्षेत्र में हिमाचल की एक नाबालिग लड़की को दो मुस्लिम युवकों के साथ पकड़ा गया था तो क्षेत्रीय विधायक मुन्ना सिंह चौहान खुद मौके पर पहुंच गए थे और उन्होंने इस लव जिहाद की घटनाओं पर कहा था कि यह एक अंडरकवर षड्यंत्र है जो सुनियोजित तरीके से राज्य में चलाया जा रहा है इसलिए यह पता लगाया जाना चाहिए कि इसके पीछे कौन है तथा इन लोगों को फंडिंग कहां से हो रही है। मुख्यमंत्री धामी ने सूबे में जनसांख्यिकीय असंतुलन की बात कहकर सूबे में बाहरी राज्य के गैर हिंदू समुदाय के लोगों की घुसपैठ करने और धार्मिक संरचनाओं की आड़ में अवैध कब्जे करने तथा प्रदेश की देव संस्कृति को दूषित करने की जो आशंकाएं समय—समय पर जताई जाती रही उनका सच अब सामने आ रहा है हजारों हेक्टेयर भूमि पर अवैध कब्जों को हटाने का जो काम हो रहा है उसका विरोध करने के लिए किसी का भी सामने न आना तथा हिंदुओं की बहन—बेटियोंं को बहला—फुसलाकर भगा कर ले जाना उनका शारीरिक शोषण करना और फिर डरा धमका कर उनका धर्म बदला जाना अगर इतना बड़ा सच है तो यह हैरान परेशान करने वाला ही नहीं है अपितु इसके खिलाफ शासन—प्रशासन को सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है। प्रदेश की जनता को इसके खिलाफ और अधिक जागरूक बनाए जाने की जरूरत है। अगर कोई महिला या लड़की अपनी सहमति से ऐसा कर रही है तो यह भले ही लव जिहाद के दायरे में न आता हों लेकिन हिंदुओं के लिए अत्यंत ही चिंतनीय है। इस समस्या के लिए सिर्फ एक पक्ष को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। अगर कोई किसी को भगा कर ले जाता है तो भागने वाला भी कम दोषी नहीं है। क्या पहाड़ की बहू बेटियों में इतनी जागरुकता नहीं होनी चाहिए वह सोच पाए कि वह जो कर रही है गलत है? अगर उनमें यह जागरूकता नहीं है तो उन्हें जागरूक बनाने की जरूरत है तभी इस समस्या से निजात संभव है।

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