July 7, 2026राम मंदिर करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रतीक है। यह केवल एक भव्य मंदिर नहीं, बल्कि दशकों के सामाजिक, सांस्कृतिक और न्यायिक संघर्ष का परिणाम भी है। ऐसे में यदि इस मंदिर में श्र(ालुओं के चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर सवाल उठते हैं, तो मामला किसी सामान्य प्रशासनिक विवाद तक सीमित नहीं रहता। यह सीधे उस विश्वास से जुड़ जाता है, जिसके सहारे श्र(ालु अपनी मेहनत की कमाई का अंश भगवान के चरणों में अर्पित करते हैं। भारत में यह प्रवृत्ति नई नहीं है कि किसी भी संस्थान में विवाद होते ही सबसे पहले चेहरे बदल दिए जाते हैं। इससे तत्काल राजनीतिक और सामाजिक दबाव कुछ समय के लिए कम जरूर हो जाता है, लेकिन यदि संस्थागत सुधार नहीं किए जाते, तो वही समस्याएं फिर लौट आती हैं। सवाल व्यक्तियों का कम और व्यवस्था का अधिक होता है। आखिर ऐसी परिस्थितियां पैदा ही क्यों होती हैं, जहां आस्था से जुड़े संस्थानों की कार्यप्रणाली पर उंगली उठने लगे? राम मंदिर का महत्व इसलिए भी अलग है क्योंकि यह केवल उत्तर प्रदेश या अयोध्या तक सीमित नहीं है। देश के कोने-कोने से श्र(ालु यहां पहुंचते हैं। विदेशों में बसे भारतीय भी अपनी श्र(ा के अनुसार दान भेजते हैं। ऐसे में चढ़ावे का प्रत्येक रुपया केवल आर्थिक संसाधन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के विश्वास की अभिव्यक्ति है। इस विश्वास की रक्षा करना ट्रस्ट की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इस्तीफा किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में नैतिक उत्तरदायित्व का प्रतीक माना जाता है। लेकिन इस्तीफा स्वयं में समाधान नहीं होता। समाधान तब होता है, जब उस घटना से सबक लेकर पूरी व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाया जाए। यदि निगरानी प्रणाली कमजोर रही, यदि लेखा-जोखा पारदर्शी नहीं रहा, यदि जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण नहीं हुआ, तो नए पदाधिकारी भी उसी व्यवस्था का हिस्सा बन जाएंगे, जिसने पहले विवाद को जन्म दिया था। आज देश डिजिटल युग में प्रवेश कर चुका है। बैंकिंग से लेकर रेलवे टिकट, आयकर से लेकर सरकारी भुगतान तक अधिकांश व्यवस्थाएं तकनीक आधारित हो चुकी हैं। फिर धार्मिक संस्थानों में करोड़ों रुपये के चढ़ावे का प्रबंधन भी उसी स्तर की तकनीकी पारदर्शिता से क्यों न जुड़ा हो? प्रत्येक दान की डिजिटल प्रविष्टि, बहु-स्तरीय निगरानी, उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी, स्वतंत्र वित्तीय आडिट और समय-समय पर सार्वजनिक लेखा-जोखा अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता हैं। इससे न केवल अनियमितताओं की संभावना घटेगी, बल्कि श्र(ालुओं का भरोसा भी मजबूत होगा। देश के अनेक बड़े मंदिरों में अब आधुनिक प्रबंधन प्रणाली अपनाई जा रही है। दान पेटियों की इलेक्ट्रानिक निगरानी, आनलाइन दान का विस्तृत रिकार्ड, स्वतंत्र आडिट और समय-समय पर सार्वजनिक वित्तीय रिपोर्ट जैसी व्यवस्थाएं विश्वास बढ़ाने का काम करती हैं। राम मंदिर जैसा राष्ट्रीय महत्व का संस्थान इन मानकों से पीछे नहीं रह सकता। बल्कि उसे देश के अन्य धार्मिक संस्थानों के लिए आदर्श स्थापित करना चाहिए। इतिहास यह बताता है कि संस्थान व्यक्तियों से नहीं, व्यवस्थाओं से मजबूत होते हैं और यदि व्यवस्था नहीं बदली, तो आज के इस्तीफे कल की नई नियुक्तियों में बदल जाएंगे, लेकिन कुछ समय बाद फिर कोई नया विवाद सामने होगा। तब देश एक बार फिर वही प्रश्न पूछेगाकृक्या सचमुच सुधार हुआ, या केवल चेहरे बदल दिए गए?
July 6, 2026मामूली कहा सुनी के चलते दिया गया था घटना को अंजाम देहरादून। मामूली कहा सुनी के चलते हुए विवाद के दौरान दोस्त पर जानलेवा हमला करने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जिसके पास से घटना में प्रयुक्त धारदार हथियार बरामद हुआ है।जानकारी के अनुसार बीते रोज कोतवाली प्रेमनगर पर रजत मलिक द्वारा तहरीर देकर बताया गया था कि उनका भाई कृष्णा अपने दोस्त शिवानंद बालियान के साथ मुज्जफरनगर से देहरादून घूमने के लिए आया था। देहरादून घूमने के दौरान प्रेम नगर दशहरा ग्राउंड में शिवानंद द्वारा उनके भाई को जान से मारने की नीयत से धारदार हथियार से उसके पेट तथा जाघ पर वार कर गम्भीर रूप से घायल कर दिया। प्राप्त तहरीर के आधार पर पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी गयी। आरोपी की तलाश में जुटी पुलिस टीम द्वारा आज सुबह एक सूचना के बाद घटना को अंजाम देने वाले आरोपी शिवानंद बालियान उर्फ शिवा को पौधा रोड से गिरफ्तार किया गया, जिसकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त धारदार हथियार बरामद किया गया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह मूल रूप से मुजफ्फरनगर का रहने वाला है तथा अपने दोस्त कृष्णा के साथ मुजफ्फरनगर से देहरादून घूमने के लिए आया था, घूमने के दौरान वे दोनों अपने एक अन्य साथी से मिलने उसके सेलाकुई स्थित कमरे में गए, जहां उन्होंने साथ में बैठकर शराब पी। शराब पीने के बाद आरोपी शिवानंद मुजफ्फरनगर वापस जाने की जिद करने लगा, जबकि कृष्णा द्वारा उसे देहरादून में ही रुकने को कहा, इस बात को लेकर उन दोनों के मध्य विवाद हो गया तथा वापसी में दशहरा ग्राउंड के पास उक्त विवाद के चलते हुई आपसी बहस में आरोपी शिवानंद द्वारा आवेश में आकर अपने पास रखे धारदार हथियार से कृष्णा पर वार कर दिया और मौके से फरार हो गया। बहरहाल पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया है।
July 6, 2026देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में आज सचिवालय में नाबार्ड की उच्च स्तरीय समिति की बैठक सम्पन्न हुयी। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने प्राईमरी सेक्टर पर जोर देते हुए, ग्रामीण अवसंरचना विकास कोष (आरआईडीएफ) के तहत् अधिक से अधिक प्रोजेक्ट शामिल किए जाने के निर्देश विभागों को दिए।मुख्य सचिव ने सभी विभागों को अपने प्रोजेक्ट अगले तीन दिन में पोर्टल पर अपलोड किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि गतिमान परियोजनाओं की प्रतिपूर्ति के लिए भी प्रस्ताव शीघ्र अपलोड किए जाएं, ताकि समय से प्रतिपूर्ति जारी की जा सके। उन्होंने धीमी गति से चल रहे प्रोजेक्ट्स पर भी चिंता जाहिर करते हुए पुरानी परियोजनाओं को प्राथमिकता पर पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभागीय सचिव स्लो गोईंग प्रोजेक्ट्स की साप्ताहिक समीक्षा करते हुए कार्यों को पूर्ण कराएं।मुख्य सचिव ने कहा कि सभी विभागों द्वारा एकीकृत दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रोजेक्ट तैयार करने पर ही किसी क्षेत्र में योजनाओं का उचित लाभ मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने की आवश्यकता है। कृषि—बागवानी क्षेत्र में सम्पूर्ण लिंकेज के साथ एक से अधिक क्लस्टर्स को शामिल करते हुए बड़े प्रोजेक्ट बनाए जाएं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रोजेक्ट्स में एक क्षेत्र के आसपास के सभी क्लस्टर्स को कोल्ड चेन, इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रांसपोर्टेशन आदि की सुविधा एक ही प्राजेक्ट के अंतर्गत मिल सके।मुख्य सचिव ने इसके लिए नाबार्ड से तकनीकी एवं विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराए जाने का भी अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि नाबार्ड को गतिशक्ति पोर्टल का एक्सेस उपलब्ध कराया जाए, ताकि वह सभी परियोजनाओं का अध्ययन कर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में 4, 5 क्षेत्र चिन्हित करते हुए इन चिन्हित क्षेत्रों के एक सम्पूर्ण लिंकेज प्लान तैयार करने में तकनीकी एवं विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध करा सकें। इस पर नाबार्ड ने शीघ्र एक टीम लगाए जाने के आश्वासन दिया।मुख्य सचिव ने कहा कि उघान विभाग को पॉलीहाऊस परियोजना को शीघ्र से शीघ्र पूर्ण कराए जाने हेतु सचिव स्तर पर साप्ताहिक समीक्षा करते हुए लगातार निगरानी किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पशुपालन विभाग को भी सभी जनपदों में बड़े स्तर के अस्पतालों को स्थापित कर दूरस्थ क्षेत्रों में पशुओं के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि जो प्रोजेक्ट पूर्ण हो चुके हैं, उन प्रोजेक्ट्स के पूर्ण होने का प्रमाण—पत्र एवं रिपोर्ट, शीघ्र से शीघ्र नाबार्ड को उपलब्ध कराए जाएं। बैठक के दौरान बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026—27 के लिए कुल 1 हजार करोड़ के प्रस्ताव का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 500 करोड़ से अधिक के प्रस्ताव शासन को प्राप्त हो गए हैं। इनमें से कुल 271 करोड़ के प्रस्ताव नाबार्ड को प्राप्त हो गए हैं, इन 271 करोड़ के प्रोजेक्ट्स में से 210 करोड़ की डीपीआर नाबार्ड को प्राप्त हो गई हैं। इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम, सी. रविशंकर, धीराज सिंह गर्ब्याल एवं सीजीएम नाबार्ड पंकज यादव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
July 6, 2026हरिद्वार। उत्तराखण्ड में नकली नोट चलाने वाले एक गिरोह का खुलासा करते हुए पुलिस ने पंजाब के चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। जिनके पास से 500 रूपये के 169 नोट यानि 84, 500 रूपये की जाली नोट बरामद किये गये है। आरोपी कुछ जाली कंरेसी जनपद हरिद्वार व अन्य जगहों पर चला भी चुके है। जिनकी जांच की जा रही है।जानकारी के अनुसार बीती रात सिटी कोतवाली पुलिस चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान मेला अस्पताल की ओर से आते चार युवक पुलिस को संदिग्ध दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो वे वापस मुड़कर तेजी से भागने लगे, लेकिन बिल्केश्वर तिराहे से टिबड़ी तिराहे के बीच उन्हें दबोच लिया गया। तलाशी के दौरान चारों के पास से 500 के 169 जाली नोट बरामद हुए। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्होंने गुरदासपुर (पंजाब) के ही एक व्यक्ति से 20,000 देकर 500 के 200 नकली नोट (कुल 1 लाख) खरीदे थे। इन नकली नोटों को असली बताकर बाजार में चलाने के लिए वे हरिद्वार आए थे। आरोपितों ने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने एक दिन पहले हरिद्वार के बाजारों में कुछ नकली नोटों से खरीदारी भी की थी। पुलिस अब इस पूरे गिरोह के मुख्य सप्लायर तक पहुंचने के लिए विशेष टीम गठित कर चुकी है। साथ ही जिन दुकानों पर नकली नोट चलाए गए, उनकी भी पहचान की जा रही है। बहरहाल पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है। आरोपियों के नाम सरजीत सिंह (58), टिंकू (29), सुमित कुमार (20), संजीव कुमार (47), निवासी गुरदासपुर, पंजाब बताए गए हैं। पुलिस ने सभी के खिलाफ विधिक कार्यवाही करते हुए उनका चालान कर दिया है।
July 6, 2026हेमवती नंदन विश्व विघालय से सम्बन्धित कई फर्जी दस्तावेज बरामद पौड़ी। उत्तराखण्ड में शिक्षा जगत से जुड़े एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा होने से तहलका मच गया है। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविघालय के नाम पर फर्जी मार्कशीट, डिग्रियां और अन्य श्ौक्षणिक दस्तावेज तैयार कर उनका इस्तेमाल करने वाले एक संगठित नेटवर्क का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। मामले में बड़ी कार्यवाही करते हुए पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बिजनौर से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जिसके कब्जे से विश्वविघालय से संबंधित कई फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं।शिक्षा जगत से जुड़े इस बड़े फर्जीवाड़े के मामले का खुलासा तब हुआ जब एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविघालय के परीक्षा नियंत्रक ने मार्च 2026 में श्रीनगर कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि विभिन्न सरकारी और गैर—सरकारी संस्थानों में कार्यरत अभ्यर्थियों की डिग्रियों और अंकतालिकाओं का सत्यापन विश्वविघालय से कराया जा रहा था। जब इन दस्तावेजों का विश्वविघालय के मूल रिकॉर्ड से मिलान किया गया तो कई मार्कशीट और डिग्रियां रिकॉर्ड से मेल नहीं खाईं। जांच में कई ऐसे दस्तावेज भी मिले जिनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड विश्वविघालय के पास मौजूद नहीं था। विश्वविघालय प्रशासन की जांच में सामने आया कि विश्वविघालय के नाम, आधिकारिक मोहर, डिग्री प्रारूप और संबंधित अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर नकली श्ौक्षणिक दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे। इन दस्तावेजों का कथित तौर पर नौकरी और अन्य सरकारी कार्यों में उपयोग किया जा रहा था।मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविघालय प्रशासन ने कुलपति को जानकारी दी, जिसके बाद श्रीनगर कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के आधार पर श्रीनगर कोतवाली में सम्बन्धित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गयी। कोतवाली श्रीनगर की विशेष टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और स्थानीय पुलिस की मदद से उत्तर प्रदेश के बिजनौर में छापेमारी कर नामजद आरोपी कासिफ कलीम को गिरफ्तार कर लिया।पुलिस के अनुसार, आरोपी के कब्जे से गढ़वाल विश्वविघालय के नाम पर तैयार की गई कई फर्जी अंकतालिकाएं, कूटरचित डिग्रियां और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए हैं। आरोपी को न्यायालय में पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह पहले डीएवी पीजी कॉलेज, देहरादून में बीएससी का छात्र था। परीक्षा में असफल होने के बाद उसने खुद को योग्य साबित करने और नौकरी हासिल करने के उद्देश्य से फर्जी मार्कशीट और श्ौक्षणिक दस्तावेज तैयार करना शुरू कर दिया। पुलिस का मानना है कि यह अकेले व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि एक संगठित फर्जी डिग्री नेटवर्क हो सकता है। अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि अब तक कितने लोगों ने इन नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर नौकरी या अन्य लाभ हासिल किए हैं और इस गिरोह में और कौन—कौन लोग शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
July 6, 2026नैनीताल। गौला पुल से छलांग लगाने वाले 17 वर्षीय किशोर प्रियांशु का शव एसडीआरएफ ने आज सुबह गहन सर्च अभियान के बाद बरामद कर लिया। रविवार शाम से ही एसडीआरएफ की टीम गौला नदी में बने चेक डैम के गहरे पानी में किशोर की लगातार तलाश कर रही थी, लेकिन देर रात तक कोई सफलता नहीं मिली।आज सुबह एक बार फिर एसडीआरएफ ने सर्च अभियान शुरू किया। कई घंटों की मशक्कत के बाद टीम ने गहरे पानी से प्रियांशु का शव बाहर निकाल लिया। सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंच गई। तहसीलदार कुलदीप पांडे ने बताया कि मृतक की पहचान 17 वर्षीय प्रियांशु के रूप में हुई है, जो हल्द्वानी के मोतीनगर क्षेत्र का निवासी था और 12वीं कक्षा का छात्र था।पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है। यह पता लगाया जा रहा है कि प्रियांशु ने किन परिस्थितियों में गौला पुल से छलांग लगाई। पुलिस परिजनों और अन्य लोगों से पूछताछ कर घटना के कारणों का पता लगाने का प्रयास कर रही है।