जन सरोकारों पर लौटती राजनीति

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वर्तमान लोकसभा चुनाव के लिए दो दिन बाद होने वाले प्रथम चरण के मतदान से पूर्व ही यह साफ हो चुका है कि 2024 का चुनाव विगत सभी चुनावों से अलग हटकर होने जा रहा है। इस चुनाव में किसी तरह की मंडल—कमंडल जैसी कोई लहर काम नहीं करेगी और न जाति धर्म के मुद्दे हावी रहेंगे। सीएसडीएस द्वारा किए गए तमाम सर्वे इस बात की तस्दीक करते हैं कि वर्तमान लोकसभा चुनाव आम जनता के हितों से जुड़े मुद्दों पर ही होने वाला है जिसमें बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई और भ्रष्टाचार तथा गरीबी उन्मूलन के साथ किसानों का मुद्दा ही सबसे अधिक प्रभावशाली रहने वाला है। देश के 50 फीसदी से अधिक लोगों को यह मानना है कि युवा बेरोजगारी और महंगाई के कारण उनको जीवन यापन में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। देश के गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों का साफ कहना है कि भले ही उन्हें सरकार द्वारा मुफ्त राशन दिया जा रहा हो लेकिन इससे उनके जीवन में कोई सुधार नहीं आ सकता है? जब तक उनकी आय के जरिए सुलभ नहीं होंगे और रोजगार के अवसर नहीं मिलेंगे वह हमेशा गरीब ही बने रहेंगे। उन्हें मुफ्त का अनाज और पेंशन नहीं चाहिए काम चाहिए। लोगों का कहना है कि वह एक तरफ इसलिए परेशान है कि रोजगार नहीं है ऊपर से महंगाई इतनी ज्यादा है कि उनके लिए घर की जरूरतों को भी पूरा करने मुश्किलें हो रही है। देश के 62 फीसदी गरीबों व आर्थिक रूप से कमजोर तथा मध्यम वर्ग के लोगों का कहना है कि उनकी आय में कमी होने के कारण वह कोई बचत नहीं कर पाते हैं जिससे मन में हमेशा ही असुरक्षा का भाव बना रहता है। इनका साफ कहना है कि बीते सालों में अमीर और अधिक अमीर हुए तथा गरीब और अधिक गरीब हुए हैं। समाज में बढ़ती इस आर्थिक असमानता पर और भी तमाम वित्तीय संस्थाओं द्वारा चिंता जताई गई है। इसके अलावा किसानों की बदहाली और उन्हें उनकी फसलों तथा उत्पादों की कीमतें उचित न मिल पाने का मुद्दा भी इस बार हावी रहने वाला है। बीते कुछ सालों से सड़कों पर एमएसपी के कानून की मांग को लेकर किसान आंदोलित है और सरकार उनकी बात नहीं सुन रही है। इसके अलावा अगर कोई और मुद्दा सबसे अधिक प्रभावी है तो वह भ्रष्टाचार का मुद्दा है जिसके बारे में आम आदमी का कहना है कि देश में लगातार बढ़ते भ्रष्टाचार के कारण भी उनका जीवन प्रभावित हो रहा है। देश में व्याप्त इस भ्रष्टाचार को लेकर भले ही केंद्र सरकार अभियान चला रही हो लेकिन वह सिर्फ नेताओं तक ही सीमित है आम जन जीवन में भ्रष्टाचार रोकने के लिए सरकार ने किसी भी स्तर पर कोई प्रयास नहीं किया है। यह निश्चित रूप से एक सुखद एहसास का विषय है कि वर्तमान चुनाव उन मुद्दों पर होने जा रहा है जो जनहित से जुड़े हुए हैं। इस बार के चुनाव में न कोई हवा हवाई मुद्दे हैं और न ही कोई जातीय व धार्मिक लहर। बीते कई दशकों से अटकी भटकी राजनीति अगर जनसरोकारों पर लौट रही है तो वह देश व समाज सभी के हित में है। जीत—हार किसी दल की नहीं इस बार जनता की जीत होगी।

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