विकसित भारत का सपना

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आगामी लोकसभा चुनाव से पूर्व भाजपा द्वारा विकसित भारत संकल्प यात्राओं का जो भव्य आयोजन किया जा रहा है वह भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में कितना सहायक सिद्ध होगा यह तो आने वाला समय ही तय करेगा लेकिन फिलहाल यह समझ लेना ही आम आदमी के लिए काफी है कि देश में होने वाले हर एक आम चुनाव से पूर्व भाजपा देश के मतदाताओं के सामने एक ऐसा सपना पेश करती आई है जो उसे भाजपा की ओर आकर्षित करता हो। 2014 के आम चुनाव में भाजपा ने नरेंद्र मोदी को पीएम का चेहरा बनाकर देश से गरीबी मिटाने और काला धन वापस लाने का सपना लोगों को दिखाया था। इस दौरान अच्छे दिन आने वाले हैं हम मोदी जी को लाने वाले हैं, की धूम सभी मीडिया चैनलों पर रही थी। विदेशी बैंकों में जमा काले धन को सत्ता में आने के 100 दिन के भीतर वापस लाने और देश के गरीबों के खातो में 10—10 लाख जमा करने का प्रचार किया गया था। देश की गरीब जनता ने भी मान लिया था कि उसे भाजपा और मोदी ही गरीबों की खाई से बाहर निकाल कर छोड़ेंगे। लेकिन उनका यह सपना आज भी पूरा नहीं हो सका है, रही बात काले धन की जो स्विस बैंक में जमा है अब उसका कोई जिक्र तक करने को तैयार नहीं है वापस लाने की बात तो दूर। 2014 के बाद जब इस बाबत भाजपा के नेताओं से सवाल किया जाता था तो वह इसे एक चुनावी शगुफा बता कर अपना पल्ला झाड़ते देखे गए। 2019 के चुनाव में भाजपा ने दो करोड़ सालाना बेरोजगारों को नौकरी देने का वादा किया तथा किसानों की आय दो गुना करने की घोषणा की गई। बाद में जब भाजपा के नेताओं से इस रोजगार के वायदे पर बात की गई तो उनका जवाब होता था कि पकौड़ियां तलना भी रोजगार ही है। देश के बेरोजगार भाजपा की इस कार्य श्ौली से इतना नाराज दिखे कि वह इन नेताओं का विरोध सड़कों पर पकौड़ियां तल कर करते देखे गए। बेरोजगारी को लेकर विपक्ष भी हमलावर होता दिखा तो इस नाकामी पर पर्दा डालने के लिए देश में कौशल विकास योजना लाई गई लेकिन इस कौशल विकास से कितने युवाओं को रोजी—रोटी मिल सकी यह कोई नहीं जानता। अब सरकार द्वारा चुनावी साल में रोजगार मेला लगाये जा रहे हैं। किसी भी भाजपा शासित राज्य में एक—एक साल में होने वाली भर्तियों को इकट्ठा कर पीएम और सीएम युवाओं को नियुक्तियों के पत्र बांट रहे हैं जिनकी फोटो मीडिया में प्राथमिकता के तौर पर प्रदर्शित की जाती है। क्या आपने इससे पहले कभी पीएम और सीएम को नियुक्ति पत्र बांटने का काम करते देखा है शायद इससे पहले ऐसे किसी ने कभी नहीं देखा होगा। लेकिन यह नए भारत की नई राजनीति है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना है कि 2047 तक देश को विकसित भारत बनाना है। वह लोगों को अब मंत्र दे रहे हैं की सभी के संकल्प से ही मंजिल तक पहुंचा जा सकता है। स्वतंत्रता आंदोलन की तरह अगर सभी देश के 140 करोड़ लोग संकल्प ले कि वह देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए काम करेंगे तो भारत को विकसित राष्ट्र बनने से कोई नहीं रोक सकता है। उनका यह संदेश सिर्फ विकसित भारत के लिए है या फिर 2024 के आम चुनाव में अपनी व भाजपा की जीत सुनिश्चित करने के लिए है यह सवाल सभी के मन में उठना लाजिमी है। विकसित भारत संकल्प यात्रा के दौरान जिस तरह भाजपा की मोदी सरकार की 10 साल की उपलब्धियां को जनता तक पहुंचाने का काम किया जा रहा है। 13.5 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर लाने व चार करोड लोगों को पक्के मकान, 80 करोड़ को मुफ्त अनाज तथा देश को पांचवी बड़ी अर्थव्यवस्था से तीसरे नंबर पर लाने के दावे किए जा रहे हैं वह सिर्फ और सिर्फ 2024 के चुनाव प्रचार से अधिक कुछ नहीं दिख रहा है। उनके विकसित भारत के दावे या संकल्प यात्रा पर अब तीसरी बार जनता कितना भरोसा जताती है तथा यह संकल्प कितना सिद्ध हो पाता है यह तो आने वाला समय ही तय करेगा लेकिन प्रधानमंत्री मोदी का जोश जरूर इतना हाई है कि 2024 में अपनी जीत ही नहीं स्वयं पीएम बनने का खुल्लम—खुला ऐलान वह कर चुके हैं।

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