मुफ्त का चंदन, घिस मेरे नंदन

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ट्टमुफ्त का चंदन घिस मेरे नंदन, यह कहावत भले ही और किसी पर लागू होती हो या न होती हो लेकिन वर्तमान दौर की भारतीय राजनीति में अपने पूरे रंग पर आ चुकी है। एक जमाना था जब राजनीतिक दलों और नेताओं द्वारा मतदाताओं को लुभाने के लिए उपहार और शराब बांटी जाती थी वह भी सिर्फ चुनावी दौर में। लेकिन समय के साथ सब कुछ बदल चुका है। कोई बिजली मुफ्त दे रहा है, कोई पेयजल मुफ्त उपलब्ध करा रहा है और तो और अब कई महिलाओं को भी उनके जेब खर्च के लिए नगद मुद्रा दी जा रही है। कोई गैस कनेक्शन मुफ्त दे रहा है तो कोई गैस सिलेंडर मुफ्त दे रहा है। कोई सम्मान राशि दे रहा है तो कोई स्वाभिमान राशि। अभी जब गुजरात और हिमाचल के चुनाव का प्रचार चल रहा था तो प्रधानमंत्री मोदी ने मुफ्त की रेवड़िया बांटने वालों से सतर्क रहने की बात कही थी उन्होंने अपने सभी चुनावी भाषणों में आम आदमी पार्टी की मुफ्त की घोषणाओं पर निशाना साधते हुए कुछ न कुछ जरूर कहा था। यहां तक कि दूसरे दलों के नेता गुजरात के लोगों को भिखारी न समझें उन्हें मुफ्त में किसी से कुछ नहीं चाहिए मुफ्त की राजनीति करने वालों की दाल यहां गलने वाली नहीं है। खैर आज तमाम अखबारों की हैडलाइन बना यह समाचार गरीबों को एक साल तक और मिलता रहेगा मुफ्त का राशन, केंद्र सरकार ने दी गरीबों और पूर्व सैनिकों को नए साल पर बड़ी सौगात। जी हां कल कैबिनेट बैठक में इस आशय का प्रस्ताव लाया गया जिस पर कैबिनेट ने अपनी मोहर लगा दी है। उल्लेखनीय है कि खाघ सुरक्षा एक्ट के तहत लाभार्थियों के लिए चावल 3 रूपये और गेहूं 2 रूपये किलो तथा मोटा अनाज 1 रूपये प्रति किलो दिया जाता था लेकिन अब इस राशन के लिए उनसे कोई पैसा नहीं लिया जाए उन्हें भी गरीब और अंतोदय योजना के तहत 5 और 35 किलो राशन फ्री मिलेगा। उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा बीते 28 माह से यानी कि जब से कोरोना आया है प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 80 करोड़ लोगों को 5 किलो राशन मुफ्त दिया जा रहा है। अप्रैल 2020 में शुरू की गई इस योजना को अब सरकार द्वारा एक साल के लिए और बढ़ा दिया गया है। यानी कि 2023 तक अब देश के 81.35 करोड़ लोग इस मुफ्त राशन का लाभ लेते रहेंगे। इस नई घोषणा के अमल पर सरकार को दो लाख करोड़ रुपए अतिरिक्त भार वहन करना पड़ेगा। गरीबों को मुफ्त राशन पर सरकार लगभग 4 लाख करोड खर्च कर चुकी है। सवाल यह है कि क्या यह मुफ्त का राशन चुनावी रेवड़िया नहीं है। 2024 में आम चुनाव होना है और अब देश में अभी तक कोरोना लॉकडाउन जैसे हालात भी नहीं है तो फिर इस मुफ्त के राशन को एक साल और क्यों बांटा जा रहा है। 2019 के चुनाव के समय भाजपा ने बड़े जोर शोर से वन रैंक वन पेंशन योजना को लागू करने का दावा किया था लेकिन इस योजना को अब लागू करने की शुरुआत की जा रही है तो सरकार ने पहले कौन सी वन रैंक वन पेंशन योजना लागू की थी। प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप में बांटे जाने वाली इन मुफ्त की रेवड़ियो की राजनीति देश को कहां लेकर जाएगी समझ पाना मुश्किल है।

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