यमुनोत्री हाईवे पर फंसे तीन हजार यात्री

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सड़क का 15 मीटर हिस्सा धंसा, यातायात ठप
पंजीकरण न होने से निराश यात्री बैरंग लौटे

उत्तरकाशी। चार धाम यात्रा पर हावी अव्यवस्थाओं और मौसम की विसंगतियों के बीच फंसे यात्रियों को हर रोज नई—नई समस्याओं से दो—चार होना पड़ रहा है। यमुनोत्री राजमार्ग पर स्यानाचटृी और रानाचटृी के बीच 15 मीटर सड़क का हिस्सा सुरक्षा दीवार ढहने के कारण धंस गया जिससे इस मार्ग पर यातायात बाधित होने से लगभग तीन हजार यात्री फंस गए हैं। वही यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या सीमित करने के लिए हरिद्वार में रजिस्ट्रेशन बंद किए जाने से बाहर से आने वाले श्रद्धालु निराश होकर वापस लौटने पर मजबूर है।
राज्य में प्री मानसूनी बारिश का असर अब चार धाम यात्रा पर दिखने लगा है। बारिश के कारण यमुनोत्री राजमार्ग पर बीते कल से स्याना चटृी और राना चटृी के बीच सुरक्षा दीवार ढह गई जिसके कारण सड़क का 15 मीटर हिस्सा नीचे धंस गया। कुछ समय छोटे वाहनों की आवाजाही रही लेकिन खतरे के मद्देनजर जिला प्रशासन ने इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से रोक दी गई है। पीडब्ल्यूडी के कर्मचारी अब पहाड़ को काटकर रास्ता बनाने में जुटे हैं लेकिन यमुनोत्री से लौटने और जाने वाले तीन हजार यात्री और सैकड़ों वाहन यहां फंस गए हैं जो सड़क मार्ग खुलने पर ही निकल सकेंगे। सवाल यह है कि जब प्री मानसूनी बारिश में चार धाम मार्गों की यह हालत है तो मानसूनी सीजन में क्या हाल होगा? खास बात यह है कि इन यात्रियों को निकाले जाने का कोई वैकल्पिक मार्ग भी नहीं है।
बिना किसी पाबंदी के यात्रा पर आने का सभी को न्योता देने वाली उत्तराखंड सरकार को अब अधिक संख्या में चार धाम आने वाले यात्रियों के कारण नियमों में संशोधन करना पड़ रहा है। पहले पंजीकरण को अनिवार्य किया गया और अब पंजीकरण को बंद कराकर यात्रियों को वापस लौटाया जा रहा है। हरिद्वार में बनाए गए दोनों पंजीकरण केंद्रों पर अब 25 मई तक रजिस्ट्रेशन फुल होने के बोर्ड लगा दिए गए हैं। देश के दूसरे राज्यों से आने वाले यात्री अब रजिस्ट्रेशन न किए जाने के कारण हरिद्वार से ही निराश होकर लौट रहे हैं। इन यात्रियों का कहना है कि सरकार को यात्रियों के लिए पहले से कोई स्पष्ट दिशानिर्देश न दिए जाने के कारण परेशानियों का सामना करना पढ़ रहा है। उनका कहना है कि सरकार को यात्रियों की समस्याओं के बारे में सोचना चाहिए। लोग हजारों किलोमीटर दूर से यात्रा करके आ रहे हैं और बिना दर्शन किए ही उन्हें वापस जाना पड़ रहा है, यह ठीक नहीं है।

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