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एनएच-94 बंद, वाहनों की लगी लंबी कतारें

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भारी भूस्खलन से 10 घंटे से यातायात बंद
चारधाम यात्रा की तैयारियों पर बड़ा सवाल

देहरादून। उत्तराखंड राज्य में 3 मई से शुरू होने वाली चारधाम यात्रा की तैयारियों को लेकर भले ही शासन—प्रशासन द्वारा कुछ भी दावे किए जा रहे हो लेकिन जमीनी हकीकत क्या है? इसकी बानगी आज एनएच—94 पर हो रहे भूस्खलन के दौरान देखने को मिली। जब भूस्खलन के कारण भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर गिरने से एनएच—94 बंद हो गया। मार्ग बंद होने के कारण सड़क के दोनों ओर कई—कई किलोमीटर लंबी वाहनों की लाइनें लग गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार भूस्खलन की यह घटना चंबा व उत्तरकाशी के बीच रमोल गांव के पास की है जहां अचानक पहाड़ से मलबा और बड़े—बड़े बोल्डर गिरने शुरू हो गए। गनीमत यह रही कि उस समय यहां कोई वाहन नहीं गुजर रहा था। मलबा व बोल्डर गिरने से मार्ग पूरी तरह से बाधित हो गया और आवागमन थम गया। खास बात यह है कि रुक—रुक कर लगातार मलबा व बोल्डर गिरने जारी रहने के कारण मार्ग खोलने का काम भी नहीं किया जा सका। समाचार लिखे जाने तक 10 घंटे का समय बीत जाने के बाद भी मार्ग को नहीं खोला जा सका था तथा लगातार बोल्डर रूक—रूक के गिरने का क्रम जारी था।
भूस्खलन के कारण मार्ग बंद होने से सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी—लंबी कतारें लगी हुई थी और लोग परेशान थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां चारधाम ऑल वेदर रोड के चौड़ीकरण का जो काम चल रहा है उसके लिए पहाड़ों की बेतरतीब कटिंग का काम किया जा रहा है। जिसके कारण भूस्खलन की यह घटना सामने आई है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि राज्य में 3 मई से चारधाम यात्रा शुरू होने जा रही है तथा शासन—प्रशासन द्वारा यात्रियों की सुरक्षा को लेकर बड़े—बड़े दावे किए जा रहे हैं लेकिन क्या ऐसी घटनाओं के बीच यह यात्रा सुगम और सुरक्षित हो सकती है। ऑल वेदर रोड के लिए की जाने वाली अंधाधुंध कटान के कारण यात्रा मार्गों पर सैकड़ों की तादात में डेंजर जोन बन चुके हैं। लोगों का कहना है कि निर्माणदाई कंपनी द्वारा बेतरतीब ढंग से पहाड़ों को काटा जा रहा है जो भविष्य के लिए बड़ा खतरा है।

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