उत्तराखंड में जीत की हैट्रिक लगाकर इतिहास रचने की रणनीति बनाने में जुटी भाजपा ने बहुत पहले से तैयारियंा शुरू कर दी है। गृहमंत्री अमित शाह के हरिद्वार दौरै से शुरू हुई यह कवायद लगातार जारी है। गृहमंत्री के दौरे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा और दून दिल्ली एक्सप्रेसवे का लोकार्पण करना तथा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का तीन दिवसीय उत्तराखंड दौरा किया जाना भाजपा की चुनावी तैयारियों का हिस्सा ही माना जा रहा है। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इस बात को साफ कर चुका है कि इस बार भाजपा चुनाव से पूर्व सीएम बदलने जैसा कोई प्रयोग नहीं करेगी। भाजपा के प्रांतीय नेताओं के बीच जारी गुटबाजी और सीएम धामी के खिलाफ षड्यंत्र करने वाले पार्टी के नेताओं को हाईकमान ने यह कहकर चुप करा दिया है कि आगामी चुनाव पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। प्रदेश के जो भी नेता इस मुहिम में जुटे थे अब वह खामोशी से बैठ चुके हैं। भले ही उनके मन में कुछ भी चल रहा हो लेकिन ऊपरी तौर पर वह कुछ बोलने की स्थिति में नहीं है। भाजपा के मंत्रियों और विधायकों के बीच टिकटों को लेकर भी इस तरह की खबरें आने से की कई मंत्री और विधायकों के टिकट कट सकते हैं तथा इनकी संख्या 2 से 3 दर्जन तक भी हो सकती है इसका डर भी भाजपा के इन नेताओं के मन में थोड़ा बहुत तो है ही। भले ही भाजपा के बारे में यह कहा जाता रहा हो कि वह हर वक्त चुनावी मोड में रहने वाली पार्टी है लेकिन राज्य में जिस तरह से भाजपा के नेताओं की सरगर्मी और केंद्रीय नेताओं के ताबड़तोड़ दौरे जारी है उनसे यह कयास भी लगाये जा रहे हैं कि इस बार राज्य में समय पूर्व भी चुनाव संभव है भले ही इसके पीछे राज्य में 14 जनवरी से शुरू होने वाले अर्ध कुंभ मेले के आयोजन को माना जाना रहा हो लेकिन इसके साथ—साथ इसे भी भाजपा की चुनावी रणनीति का एक हिस्सा ही माना जा रहा है। वर्तमान प्रदेश सरकार का कार्यकाल 23 मार्च को पूरा होगा। तथा इस हिसाब से राज्य में 15 जनवरी से 15 मार्च 2027 तक चुनाव संपन्न होने चाहिए थे लेकिन चार धाम यात्रा के समापन से पूर्व ही अर्धकुम का श्री गणेश होने के कारण इसका असर चुनावी व्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। इसलिए यह संभव है कि राज्य में नवंबर से पूर्व ही चुनाव निपटा लिए जाए। चुनाव अगर अक्टूबर नवंबर में होते हैं तो इसका फायदा भी भाजपा को ही हो सकता है क्योंकि विपक्षी दलों की तैयारियों पर इसका असर पड़ेगा। हालांकि कांग्रेस सहित सभी दल भाजपा की इस मंशा को भांप चुके हैं और वह भी अपनी तैयारियां शुरू कर चुके हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी का भी चार—पांच जून को उत्तराखंड दौरा प्रस्तावित है जिसमें वह दो जनसभाएं करने जा रहे हैं। इस मामले की एक अन्य महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन राज्यों में 2027 में चुनाव प्रस्तावित है उनमें एसआईआर की जो प्रक्रिया जारी है उसे भी जल्द पूरा किया जा रहा है उत्तराखंड में एसआईआर की प्रक्रिया को 15 सितंबर तक कंप्लीट कर लिया जाएगा। इससे भी इस बात की संभावनाओं को बल मिलता है कि राज्य में विधानसभा के जो चुनाव 2027 में प्रस्तावित है वह अक्टूबर नवंबर 2026 में ही संपन्न कराये जा सकते हैं। जहां तक भाजपा के चुनावी जीत की हैट्रिक लगाने की बात है बदली परिस्थितियो में यह आसान नहीं दिखता है लेकिन भाजपा अपनी ओर से कोई कमी छोड़ना नहीं चाहती है।




