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युवा शक्ति का सड़कों पर आना?

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भले ही भाजपा राज्य दर राज्य अपनी चुनावी जीतों के साथ इस भ्रम को बनाए रखने का प्रयास कर रही हो कि वही देश की जनप्रिय राजनीतिक पार्टी है और उसे कोई परास्त नहीं कर सकता है लेकिन यह सच इससे बिल्कुल इतर है। 2024 के चुनावी परिणामों ने भाजपा नेताओं को यह बताने की कोशिश जरूर की थी कि वह हवा के रुख को समझे लेकिन 400 के पार का नारा देने वाली पार्टी के नेताओं ने ढाई सौ से भी नीचे सिमट जाने के बावजूद इस सच को नकार दिया। भाजपा को कोई नहीं हरा सकता है और उसकी लोकप्रियता अभी भी शिखर पर है इस भ्रम को बनाए रखने के लिए एड़ी चोटी के प्रयासों में जुटे भाजपा नेताओं के इस भ्रम को कॉकरोच जनता पार्टी ने एक पल में तोड़ दिया है जबकि वह अभी किसी राजनीतिक दल का आकार भी नहीं ले सकी है। कॉकरोच जनता पार्टी जो अभी सिर्फ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर है उसके फॉलोअर जिस गति से बढ़े हैं तथा देश के तमाम राज्यों में स्वस्फूर्त प्रदर्शन बिना किसी नेतृत्व के दिखाई दे रहे हैं उसने भाजपा के नेताओं और सरकार के अंदर इतनी बेचैनी पैदा कर दी है कि उनकी नींद हराम हो चुकी है। सीजेपी के फाउंडर जिन्होंने देश की सर्वाेच्च अदालत के शिखर पर बैठे मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी मात्र युवा बेरोजगारों के लिए प्रयोग किए गए कॉकरोच शब्द पर की गई एक प्रतिक्रिया ने जो क्रांति का बीज बोया था वह इतना प्रभावी हो सकता है कोई भी इसकी कल्पना तक नहीं कर सकता था लेकिन अब यह चर्चा व्यर्थ हो चुकी है। भले ही देश का विपक्ष खासकर नेता विपक्ष राहुल गांधी उन मुद्दों पर लंबे समय से सत्ता पक्ष के साथ संघर्ष कर रहे थे और वह आंशिक रूप से सफल होते भी दिख रहे थे लेकिन सीजेपी ने जिस तरह से देश की राजनीति में तहलका मचा दिया है वह अद्भुत है। सीजेपी ने अभी तक अपना सिर्फ पांच सूत्रीय एजेंडा ही जारी किया है लेकिन वह नेता विपक्ष राहुल गांधी के एजेंडे से इस कदर मैच करता है कि भावी भविष्य में कांग्रेस और सीजेपी एक मंच पर आ सकते हैं। इसकी संभावनाओं पर भी चर्चाएं शुरू हो चुकी है। राहुल गांधी का कहना है कि एक साल के अंदर मोदी सरकार चली जाएगी। उनकी इस घोषणा के पीछे कोई दबा छिपा एजेंडा नहीं है वह इस युवा शक्ति के सड़कों पर आने को ही इसका कारण बता रहे हैं। अगर इसके पीछे के कारणों पर ईमानदारी से विचार मंथन हो तो इसे कम शब्दों में अति से अंत की ओर जाना ही कहा जा सकता है। देश की जो युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत थी उसके साथ क्या हो रहा है उसे नीट से लेकर सीबीएसई की परीक्षाओं में जो हो रहा है तथा देश के युवाओं को रोजगार के लिए भटकना पड़ रहा है देश में महंगाई और भ्रष्टाचार ने जो लोगों का जीवन तबाह कर रखा है तथा संवैधानिक व्यवस्थाओं की जिस तरह से सत्ता में बैठे लोगों द्वारा धज्जियां उड़ाई जा रही है और देश की न्यायपालिका भी उनकी हितों की रक्षा नहीं कर पा रही है, ही अहम कारण है। खास बात यह है कि अब यह सब कुछ युवाओं की सहनशक्ति से बाहर हो गया है और वह इस चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए कुछ भी कुर्बानी देने को अमादा है। सत्ता में बैठे लोगों को भी इस बात का एहसास हो चुका है कि यह आग अब इतनी भड़क चुकी है कि इसे बुझाना आसान नहीं होगा। अब उनके द्वारा युवाओं को यह भरोसा दिलाया जा रहा है कि उनके साथ नाइंसाफी नहीं होने दी जाएगी। वह हर स्तर पर रिफॉर्म करेंगे लेकिन युवाओं को अब वायदो और बांतो से संतुष्ट किया जाना बहुत मुश्किल है उनका साफ कहना है कि 12 साल से आप क्या कर रहे थे? यही नहीं युवा अब यह भी पूछ रहे हैं कि ऐसे हालात पैदा किसने किए हैं।

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