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मोदी के नाम व काम पर भरोसा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विजय संकल्प रैली से एक बार फिर यह साफ हो गया है कि उत्तराखंड विधानसभा का चुनाव भाजपा उन्हीं के चेहरे पर लड़ने जा रही है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ही करिश्मा था जब 2017 में भाजपा ने रिकार्ड 57 सीटों पर जीत दर्ज कर सूबे में अपनी सरकार बनाई थी। चुनावी साल के अंतिम महीनों में तीन मुख्यमंत्री बदले जाने के बावजूद भाजपा इस चुनाव में अब की बार 60 पार के नारे के साथ ही मैदान में नहीं उतर रही है अपितु फिर एक बार भाजपा सरकार को जो स्लोगन प्रदेश भाजपा ने मोदी की रैली में दिया है उससे भी यही संकेत मिलते हैं कि भाजपा नेताओं को इस बार भी मोदी के नाम और काम का ही सहारा है। भाजपा, प्रधानमंत्री के करिश्माई नेतृत्व के दम पर सत्ता तक पहुंचने का सपना देख रही है। यही कारण है कि प्रदेश भाजपा ने इस विजय संकल्प रैली को सफल बनाने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है भले ही वह दावे के अनुरूप इस रैली में सवा लाख की भीड़ न जुटा पाई हो लेकिन भीड़ के लिहाज से वह इस रैली को ऐतिहासिक और सफल बनाने में जरूर कामयाब रही है। मोदी के फोटो के साथ रैली में पहुंचे लोगों को भाजपा ने जो पोस्टर उपलब्ध कराए हैं उसमें यही लिखा है कि फिर एक बार भाजपा सरकार। भले ही प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने अल्प कार्यकाल में युवा जोश और युवा सरकार के नारे को प्रचारित करने में कोई कमी न रखी हो लेकिन वह इस चुनाव में सिर्फ प्रतीकात्मक चेहरा ही होंगे। चुनाव प्रधानमंत्री मोदी के नाम व काम पर ही लड़ा जाएगा। 2017 में प्रधानमंत्री ने राज्य के लोगों के सामने एक विजन रखा था जो लोगों को खूब भाया था ठीक उसी तर्ज पर एक बार फिर 2022 फतह करने के लिए उन्होंने राज्य के लोगों के सामने उत्तराखंड को 2025 तक एक मॉडल राज्य बनाने का विजन रखा है। जिसके लिए उनके द्वारा ऐसी योजनाओं का शिलान्यास भी किया गया है जो उत्तराखंड को पर्यटन के दृष्टिकोण से विश्व मानचित्र पर स्थान दिलाने में मददगार हो सकता है वहीं राज्य को अध्यात्म और योग केंद्र के रूप में नई पहचान दे सकते हैं। राज्य की कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने वाली इन योजनाओं से राज्य के विकास को नए पंख मिल सकते हैं। यह अलग बात है कि प्रधानमंत्री का यह प्रयास भाजपा को साठ के पार ले जा पाता है या नहीं लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है कि भाजपा को इसका फायदा नहीं होगा। धामी सरकार ने अपने कार्यकाल में देवस्थानम बोर्ड को भंग करने जैसे कई ऐसे फैसले लिए जो चुनावी लाभ के नजरिए से महत्वपूर्ण हैं। भाजपा की इस विजय संकल्प रैली से भाजपा अपने राजनीतिक विरोधियों पर मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने में सफल जरूर रही है।

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