खीर भवानी के मेले में कश्मीरी पंडितों के साथ शामिल हुईं महबूबा मुफ़्ती

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श्रीनगर। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में गंदेरबल जिले के प्रसिद्ध रागन्या देवी मंदिर में सैकड़ों कश्मीरी पंडितों ने रविवार (28 मई) को मत्था टेका और वार्षिक खीर भवानी मेला आयोजित किया। मध्य कश्मीर जिले में चिनार के विशाल पेड़ों की छाया में स्थित इस प्रसिद्ध मंदिर में भक्तों का भारी हुजूम देखा गया, जिनमें से ज्यादातर कश्मीरी पंडित थे जो देश के कई हिस्सों से यहां आए थे। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी चीफ और जम्मू कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती भी खीर भवानी के मेले में कश्मीरी पंडितों के साथ शामिल हुईं। दरअसल, ऐसा इसलिए क्योंकि, महबूबा पर भी घाटी में आतंकवाद को बढ़ावा देने और कश्मीरी पंडितों की पीड़ा से मुंह मोड़ने के इल्जाम लगते रहते हैं, साथ ही वो अनुच्छेद 370 का भी समर्थन करती हैं, जिसे आतंकवाद की जड़ मना जाता है। उन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि, यदि 370 हटाई गई, तो कश्मीर में कोई तिरंगा उठाने वाला नहीं मिलेगा। बहरहाल, अब शायद 370 हटने के बाद पहली बार पूर्व सीएम महबूबा मुफ़्ती कश्मीरी पंडितों की कुलदेवी माँ खीर भवानी के मेले में शामिल हुईं हैं।
इस मेले में आए श्रद्धालु नंगे पैर चल रहे थे, गुलाब की पंखुड़ियां ले जा रहे थे और माँ भवानी को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे थे, जबकि पुरुषों ने मंदिर के नजदीक जलधारा में डुबकी लगाई। मुख्य मंदिर परिसर के पास जाने के लिए भक्त एक-दूसरे के साथ धक्का-मुक्की करते हुए दिखाई दिए, इस दौरान मंदिर परिसर में भजनों की गूंज सुनाई दी और भक्तों ने परिसर के अंदर दूध और खीर (चावल की खीर) चढ़ाते हुए देवी को प्रणाम किया। साम्प्रदायिक सौहार्द का प्रतीक यह मेला शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया और प्रशासन ने भी भक्तों के लिए सुरक्षा सहित व्यापक बंदोबस्त किए थे। जम्मू की एक भक्त गुड़ी जुत्शी ने बताया है कि माँ के जन्मदिवस पर आयोजित वार्षिक मेले के अवसर पर मंदिर में आए बगैर उनकी ‘पूजा’ अधूरी है। मुफ्ती ने भी इस मौके पर मंदिर में माँ के दर्शन किए। महबूबा ने कहा कि उन्होंने घाटी में कश्मीरी पंडितों की गरिमापूर्ण वापसी के लिए कामना की। इसके बाद महबूबा ने प्रेस वालों से कहा कि, ‘मैं यहां जम्मू और अन्य स्थानों से आए हमारे कश्मीरी पंडित भाइयों का स्वागत करने के लिए आई हूं। हम यहां इन लोगों की गरिमापूर्ण वापसी के लिए प्रार्थना करने के लिए आए हैं, ताकि एक बार फिर जम्मू-कश्मीर में हिंदू-मुस्लिम भाईचारे के साथ रह सकें।’

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