महंगाई की मार को हो जाए तैयार

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बढ़ती महंगाई अब आम आदमी की जिंदगी पर भारी पड़ने वाली है बीते दो दिनों में इसकी झलक मिल चुकी है। 37 दिनों की स्थिरता के बाद एक बार फिर रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में 50 की बढ़ोतरी और पेट्रोल डीजल की कीमतों में डेढ़ से दो रूपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से साफ हो चुका है कि अब यह क्रम थमने वाला नहीं है। अभी हाल ही में पैक्ड दूध की कीमतों में भी 1 रूपये से लेकर 2 रूपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। हालांकि इसकी संभावनाएं पहले से ही जताई जा रही थी कि चुनाव निपटते ही पेट्रोल डीजल और रसोई गैस की कीमतें फिर बढ़ने लगेगी। चुनाव से पूर्व रसोई गैस के सिलेंडरों की कीमतों में एक साथ 100 रूपये की बढ़ोतरी की गई थी। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें जब 100 के पार जा रही थी तब सरकार ने चुनाव के मद्देनजर अपने टैक्स में कमी के जरिए 5 से 10 रूपये प्रति लीटर कम किए गए थे लेकिन अब तेल कंपनियों के बढ़ते घाटे के कारण वह हर रोज पेट्रोल डीजल के दामों को तय करने जा रही है। उस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 87 डॉलर प्रति बैरल था जो अब बढ़कर 117 डालर प्रति बैरल हो चुका है। सीधेे तौर पर कहा जाए तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 40 फीसदी बढ़ चुकी है। ऐसी स्थिति में अब पेट्रोल डीजल की कीमतें 15 से 25 रूपये प्रति लीटर तक बढ़ चुकी है आने वाले दिनों में पेट्रोल 125 और डीजल 115 रूपये प्रति लीटर तक जा सकता है। वहीं रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध का प्रभाव भी तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। गनीमत यह है कि भारत को अभी भी रूस व अन्य देशों से मुनासिब दराें पर तेल मिल रहा है लेकिन कब तक मिलता रहेगा इस बारे में कुछ भी कह पाना मुश्किल है। इसलिए यह तय है कि आने वाले समय में महंगाई के कारण आम आदमी के जीवन में संकट और अधिक पड़ने वाला है। उधर सरकार अपना राजकोषीय घाटा कम करने और ऋण के बोझ को कम करने के लिए अब आगे अपने टैक्स में कमी नहीं करेगी दूसरी तरफ तेल कंपनियों द्वारा कीमतों की हर रोज समीक्षा करने व कीमतें तय करने की बात कही जा रही है। जिसके कारण पेट्रोल डीजल और रसोई गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी जारी रहने की संभावना है। पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत वृद्धि का सीधा असर दूसरी आम उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ता है। क्योंकि इससे ट्रांसपोर्टेशन का खर्चा बढ़ जाता है। कुल मिलाकर देश के लोगों को अब आने वाले दिनों में महंगाई की भीषण मार झेलने के लिए तैयार हो जाना चाहिए। अगर युद्ध रुक भी जाता है तब भी महंगाई को कम होने में दो—चार माह का समय लग जाएगा। अब इसमें सरकार भी कुछ करने वाली नहीं है। देश की आम जनता ने भले ही चुनाव के दौरान विपक्ष के महंगाई के मुद्दे को नजरअंदाज कर दिया हो लेकिन अब यही महंगाई आम आदमी को खून के आंसू रुलाने वाली है।

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