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एआई के दौर में राजनैतिक दलों को बदलनी पड़ रही है अपनी राति-नीति

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  • ‘पैराशूट’ नेताओं को ‘फरमान’
  • सोशल मीडिया के ‘लाइव’ कांसेप्ट नेताओं के लिए मुसीबत
  • एआई नेता की कुंडली खंगाल कर आमजन के सामने रखेगा
  • राजनैतिक दलों की मजबूरी बनी जमीनी नेताओं पर दाव खेलना

देहरादून। चुनावी साल में राजनैतिक दल अपनी रणनीति तैयार करने में लगे है। आज के एआई दौर में मतदाताओं को रिझाने के लिए दलों को जी-जान लगाने पडे़गी। क्योंकि एआई ने अपनी पकड़ इतनी मजबूत कर ली है कि उसके सामने अब किसी की नहीं चलने वाली है। शायद यही कारण है कि राजनैतिक दल इस बार ‘पैराशूट’ के बजाय जमीनी नेताओं पर ‘दाव’ खेलने के मूड़ में है। इसके लिए पार्टियों ने फरमान तक जारी कर दिए हैं। राजनीति के विशेषज्ञों की माने तो पार्टियों के लिए आने वाला विधानसभा चुनाव किसी पहाड़ से कम नहीं है।
गांव-गांव, घर-घर और शहर-शहर में आमजन अब बहुत जागरूक हो गया है और हर जगह से ‘लाइव’ का कांसेप्ट इस चुनाव में नेताओं को भारी पड़ सकता है। सोशल मीडिया के साथ एआई की मजबूत पकड़ इस बार के चुनाव में साफ देखने को मिलेगी। सोशल मीडिया के ‘लाइव’ कांसेप्ट नेताओं के लिए जहां मुसीबत बन सकती है। वही एआई किस समय किस नेता की कुंडली खंगाल कर आमजन के सामने रख दे पता नहीं है। इसके अभी से संकेत दिखने लगे है। हालांकि अभी चुनाव में लंबा समय है, लेकिन दलों की अभी से जो रणनीति उसमें स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं।
बता दें कि विधानसभा चुनाव में भाजपा सत्ता में आने के लिए विधायकों के टिकट के बंटवारे में अपनी रणनीति बदलने की योजना है। इसके चलते उत्तराखंड विधानसभा चुनावों में पैराशूट की बजाए जमीनी नेताओं पर भाजपा दांव लगाने की रणनीति पर चर्चा हो रही है।
पार्टी में टिकट वितरण में असंतोष को रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर मजबूत नेताओं को तवज्जो देने की रणनीति बनाई जा रही है। पार्टी हाईकमान के आदेश पर उत्तराखंड में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट इसके लिए सभी मंत्री और विधायकों को अपने क्षेत्र में श्रेष्ठता साबित करने को कहा गया है। इसकी शुरूआत भाजपा ने हरिद्वार से कर दी है।
पार्टी सूत्रों ने बताया कि हाल में हुई कोर ग्रुप की बैठक से पहले ही शीर्ष नेतृत्व साफ कर चुका है कि इस बार किसी भी मंत्री, विधायक को सीट बदलने की इजाजत नहीं दी जाएगी। इसके अलावा अलग अलग सीटों के मजबूत चेहरों को भी अपने अपने विधानसभा क्षेत्रों में ही सक्रियता के लिए कहा गया है। भाजपा ने पिछले चुनावों में कुछ नेताओं की सीट बदली थी तो कुछ दूसरे दलों से आए नेताओं को ऐन वक्त पर टिकट दे दिया था। इस वजह से कईई जगह पार्टी को आंतरिक असंतोष का भी सामना करना पड़ा। इसे देखते हुए इस बार केवल स्थानीय स्तर पर मजबूत और सक्रिय चेहरों पर ही दांव लगाने की योजना पर काम किया जा रहा है।
पार्टी के मंत्री, विधायकों को तो इस संदर्भ में साफ तौर पर संकेत दिए जा चुके हैं। भाजपा के करीब आधा दर्जन मंत्री और विधायक अपनी मौजूदा सीट को छोड़कर दूसरे स्थान से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। लेकिन शीर्ष नेतृत्व के फरमान की वजह से उनकी योजना को तगड़ा झटका लगा है। इसके साथ ही अपने क्षेत्र से बाहर तैयारी कर रहे नेताओं को भी इससे निराशा हाथ लग सकती है।
यही हाल कांग्रेस का भी है। कांग्रेस के सूत्रों की मानें तो आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस भी जमीनी नेताओं को तबज्जों देकर अपनी जीत सुनिश्चित करने की योजना बना रही है। हालांकि कांग्रेस की रणनीति अभी सिर्फ आक्रामक दिख रही है, लेकिन सूत्र बताते है कि आने वाले समय में कांग्रेस की बैठकों में स्पष्ट हो जाएगा कि चुनावी रण में उतरने के लिए क्या सही है और क्या गलत है। बता दें कि भाजपा जहां चुनावी रथ को तेजी के साथ आगे बढ़ा रही है वहीं कांग्रेस अभी रणनीति बनाने पर ही लगी है। इसका फायदा आने वाले विधानसभा चुनाव में किसे मिलेगा यह तो आने वाले समय में ही पता चलेगा। लेकिन यह अवश्य है कि भाजपा और कांग्रेस सोशल मीडिया के लाइन कांसेप्ट और एआई की पहुंच को लेकर अपनी-अपनी रणनीति तय करने में लगी है।

उत्तराखंड बीजेपी में ‘भूचाल’

देहरादून। उत्तराखंड में राजनीतिक माहौल गरमाने लगा है। बीजेपी में अंदरखाने चल रही कलह अब खुलकर सामने आ गई है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व बीकेटीसी अध्यक्ष अजेंद्र अजय के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने उत्तराखंड बीजेपी में भूचाल ला दिया है। अजेंद्र अजय ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बीजेपी से मोहभंग होने की बात कही है, जिसके बाद से सियासी गलियारों में हलचल मच गईई है।
सोशल मीडिया पोस्ट में बीजेपी से मोहभंग होने की बात कहते हुए अजेंद्र अजय ने लिखा है कि उत्तराखंड में वर्तमान में जिस प्रकार का राजनीतिक परिदृश्य देखने को मिल रहा है, उससे राजनीति के प्रति मोहभंग सा होता जा रहा है। मोदी जी ने कहा था कि तीसरा दशक उत्तराखंड का होगा। तीसरा दशक ऐसा होगा, हम जैसे कार्यकर्ताओं और देवभूमि की जनता ने कभी कल्पना भी नहीं की थी। उनकी पोस्ट के बाद बीजेपी के भीतर चल रही अंर्तकलह की खबरों पर मुहरर लग गई है।

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