हिन्द मजदूर किसान समिति ने क्रांतिकारियों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए

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देहरादून। हिन्द मजदूर किसान समिति के सहयोगियों ने जिला देहरादून के सिद्धे शवर महादेव मंदिर, तरला नागल में शहीद शिरोमणि भवानी सिंह रावत के बलिदान दिवस और शहीद शिरोमणि अल्लूरी सीताराम राजू जी के बलिदान दिवस की पूर्व संध्या पर उनका नमन किया।
इस अवसर पर मख्य अतिथि के रुप में हिन्द मजदुर किसान समिति की महिला मोर्चा अध्यक्ष श्रीमती सोनिया, श्रीमती कोमल , श्रीमती साक्षी एवं शहीद मेजर सूर्य प्रताप सिंह के पिता कृष्णा स्वरूप उपस्थित रहे और क्रांतिकारियों की महाआरती कर उन्हें अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष चन्द्रमोहन के सन्देश में क्षेत्रीय प्रभारी उज्जवल सेरागाँव ने कहा कि शहीद शिरोमणि भवानी सिंह रावत शहीद शिरोमणि चन्द्रशेखर आजाद जी के साथी थे, जिनका जन्म पौड़ी गढ़वाल जिले के पंचर गांव में 8 अक्टूबर 1910 क दिन हुआ। पिता फौज के कप्तान थे इसलिए विभिन्न फौजी छावनियों में बचपन बीता, उन्हांन स्वय॑ अंग्रेजों का व्यवहार भारतीयों के प्रति देखा जिस स उनका मन आहत हुआ। 1927 म॑ व क्रांतिकारियों के संपर्क में आए और हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजात॑त्र संघ क सक्रिय सद॒स्य बन गुप्त गतिविधियों में भाग लने लगे।
एक बार शहीद शिरोमणि चंद्रशखर आज़ाद जी को दल के प्रशिक्षण के लिए सुरक्षित स्थान की जरूरत महसूस हुई और इन दिनां दिल्‍ली म॑ निगरानी बढ़ गयी थी इसी बीच भवानी सिंह रावत जी चन्द्रशखर आजाद जी व नए क्रांतिकारियों को अपने साथ दुगड्डा ले गए | वहाँ के घन जैगलां म॑ सभी क्रांतिकारियों न प्रशिक्षण प्राप्त किया। भवानी सिंह, चन्द्रशेकर आजाद और भगत सिंह जी के घनिष्ठ साथियां मं से थे। जब शहीद शिरामणि चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सखदेव, और राजगुरु जी शहीद हा गए तो क्रांतिकारियों म॑ं निराशा का माहौल बन गया था। पुलिस बाकी क्रांतिकारियो को ढंढ रही थी तब भवानी सिंह जी मुम्बई गए और वहाँ भेस बदलकर रहन लगे। 25 दिसम्बर 1932 का उन्हूं भी गिरफ्तार कर लिया गया लेकिन कोई प्रमाण न मिलने के कारण स्पेशल मजिस्ट्रेट ने उन्हं रिहा कर दिया। वे 1967 स लगातार चन्द्रशेखर आजाद के स्मारक के दुगड़ा में निर्माण कार्य में लगे रहे। जिसे 1973 म॑ पूरा किया। समाजवाद, समानता, शोषणहीन समाज के सपने संजोए संजोए 6 मई 1986 को भवानी सिंह जी अनन्त में समा गए ।
हिन्द मजदूर किसान समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष चन्द्रमाहन जी का मानना कि इन सभी क्रांतिकारियों ने घनचोर यातनाओं को सहकर हमें सम्मानित जीवन दिया। जितना कष्ट यातना पीड़ा इन महान क्रांतिकारियों ने हमें सम्मानित जीवन देने के लिए सही उतना तो हमारे जन्म देने वाले माँ पिता भी नहीं सह सकते।
हिन्द मजदूर किसान समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री चन्द्रमोहन जी का मानना कि इन सभी क्रांतिकारियों ने घनघोर यातनाओ को सहकर हम॑ सम्मानित जीवन दिया। जितना कष्ट यातना पीड़ा इन महान क्रांतिकारियां न हम॑ सम्मानित जीवन देने के लिए सही उतना तो हमारे जन्म दन वाले माँ पिता भी नहीं सह सकत।
हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री चन्द्रमोहन जी मानते हैं कि जिस प्रकार भगवान श्री राम, भगवान श्री कृष्ण और भगवान बद्ध ने हमें उस समय शोषण से मक्ति दिलाई थी ठीक इसी प्रकार ही क्रांतिकारियां ने हम॑ अंग्रेजों के अत्यचारों स मक्ति दिलाई है अतः क्रांतिकारी हमारे लिए भगवान राम, कृष्ण, बुद्ध के समान हैं। अब हमारा यह कर्तव्य है कि जिस प्रकार हमारे क्रांतिकारियों ने अपना बलिदान देकर हमें आज़ादी दिलाईं हम भी दश में क्रातिकारियां के सपने और सम्मान की स्थापना करें।
राष्ट्रीय अध्यक्ष चन्द्रमोहन का मूल उद्देश्य है देश में शिक्षा का राष्ट्रीयकरण हो । जब तक देश में शिक्षा का राष्ट्रीयवरण नहीं होगा तब तक देश को गरीबी और शाषण से मुक्ति नहीं मिल पायेगी। शिक्षा के राष्ट्रीयकरण का अर्थ है देश में विद्यार्थी के लिए एक समान और फ्री पढ़ाई अर्थात देश में सभी प्राइवेट स्कूल बेद हों केवल सरकारी स्कूल ही रहें। गरीबी शोषण तब तक ख़त्म नहीं हो सकते जब तक देश में एक तरह के स्कूल, एक तरह की पढ़ाई की नीति स्थापित नहीं होगी अर्थात शिक्षा का राष्ट्रीयकरण नहीं होगा। इसी से ही गरीबी शोषण का नाश होगा और यही क्रांतिकारियों की इच्छा थी।
हमारे देश को आज़ाद हुए लगभग 75 साल से ज्यादा हो गए हैं लेकिन 1947 में जब देश आज़ाद हुआ था तब भी यही नारा था गरीबी हटाओ, गरीबी भगाओ और आज का भी यही नारा है। चाहे भगवान भी आकर देश की सत्ता संभाल लें अगर देश में शिक्षा भेद है तो गरीबी और शाषण का अंत हो ही नहीं सकता। जब तक देश में एक तरह का सकल, एक तरह की पढ़ाई यह नीति लागू नहीं हागी देश में से गरीबी शोषण खत्म नहीं हांगे। नेता और गरीब के बच्चें एक ही स्कुल पढ़ें और एक जैसी ही शिक्षा प्राप्त करें तब ही सभी देशवासी गरीबी और शोषण से मुक्त होंगे ओर खुशहाल होंगे।
इस अवसर पर रिटायर्ड कैप्टन बैसीलाल जी, कमांडेंट काला जी, रिटायर्ड सीनियर सीबीआई ऑफिसर बी.पी. बागची जी, हिंदी जगत सिनेमा के एक्टर आन॑ैद कृष्णन जी, भृतपुर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रप्ेश चंद्र ममगायन, क्षेत्रीय पार्षद संजीव बैसल जी, भृतपूर्व लांसनायक शांतिप्रसाद जी, भृतपूर्व सैनिक मनोज कुकरेती जी, जगमोहन पुडीर जी, किसान मोर्चा उपाध्यक्ष कृपाल जवाड़ी जी, राकेश जवाड़ी जी, विकास जी, श्रीमती विमला देवी जी, श्रीमती निशा रतोड़ी जी, श्रीमती मालती ममगायन जी, श्रीमती मंजू तोमर जी, श्रीमती राखी राणा जी, श्रीमती छविस्का बाली जी इत्यादि उपस्थित रहे।

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