चौंकाने वाले नतीजों का संकेत

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लोकसभा चुनाव के पहले दौर का मतदान संपन्न हो चुका है। सुबह जब मतदान शुरू हुआ तो मतदान केंद्रो पर लंबी—लंबी लाइनों को देखकर लग रहा था कि इस बार रिकार्ड मतदान होगा लेकिन दोपहर होते—होते इन संभावनाओं ने दम तोड़ दिया। शाम ढलने के बाद जब चुनाव आयोग के आंकड़े आए तो पता चला कि मतदान में ऑल ओवर 8 से 10 फीसदी की गिरावट रही। बात अगर उत्तराखंड की की जाए तो यहां दोपहर तक लगभग 38 फीसदी मतदान हो चुका था लेकिन मतदान समाप्त होने तक यह 56 फीसदी से नीचे ही रह गया। इसका क्या कारण रहा इस पर अब माथा पच्ची की जा रही है। शादी समारोहों के होने से लेकर आम आदमी का राजनीति से मोह भंग तक की बातों पर चर्चा जारी है। ऑल ओवर मतदान प्रतिशत की बात करें तो इसमें आश्चर्यजनक कमी ने सभी को हैरत में डाल दिया है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार 2019 के लोकसभा चुनाव में 91 सीटों के लिए हुए पहले चरण के मतदान में 69.63 फीसदी मतदान हुआ था लेकिन 2024 के चुनाव में 102 सीटों के लिए कल हुए मतदान का प्रतिशत 60 फीसदी के आसपास रहा है जो 9 फीसदी कम रहा है। मतदान प्रतिशत में इतनी भारी कमी या गिरावट को सामान्य बात नहीं माना जा सकता है। अब तक देश में हुए किसी भी चुनाव में मतदान प्रतिशत में गिरावट ज्यादा से ज्यादा दो ढाई फीसदी से अधिक नहीं रही है। इससे पूर्व 1999 में जो लोकसभा चुनाव हुआ उसमें 60 फीसदी के आसपास मतदान हुआ था लेकिन 2004 के लोकसभा चुनाव में 58 फीसदी मतदान हुआ जो दो फीसदी कम रहा था। यह वही इंडिया साइनिंग का दौर था जब अटल बिहारी वाजपेई की सरकार के कार्यकाल में भाजपा बुरी तरह हारी थी। जहां तक मतदान प्रतिशत के बढ़ने की बात है तो वह चुनाव दर चुनाव बढ़ता तो रहा है और यह बढ़त 5 प्रतिशत तक देखी गई है लेकिन किसी चुनाव में 9 फीसदी कम मतदान हो यह देश की राजनीति के इतिहास में पहली बार हुआ है। आमतौर पर कम या ज्यादा मतदान को लेकर यही माना जाता है कि ऐसे मतदान के चुनाव परिणाम चौंकाने वाले होते हैं। इस कम मतदान प्रतिशत के क्या मायने निकाले जाते हैं और क्या मायने रहेंगे इसका ठीक—ठाक पता तो चुनाव परिणाम आने के बाद ही चल सकेगा लेकिन यह देखना अब और भी दिलचस्प होगा कि क्या यह चुनाव भाजपा के 400 पार के दावे पर मोहर लगाएगा या फिर विपक्ष के भाजपा को तड़ीपार के दावे को सच साबित करेगा। लेकिन इस कम प्रतिशत मतदान से एक बात तो साफ है कि चुनाव परिणाम बेहद ही चौंकाने वाले आने वाले हैं। हालांकि अभी 6 चरण का मतदान बाकी है यह भी हो सकता है कि अगले कुछ चरणों में इस गिरावट में कुछ कमी आए लेकिन 9—10 फीसदी की इस गिरावट की भरपाई होना संभव नहीं दिख रहा है क्योंकि यह कोई मामूली गिरावट नहीं है कम मतदान प्रतिशत के कारण इस बार इन 102 सीटों पर हार जीत का अंतर भी बहुत कम रहने का संभावना है। खास बात यह है कि इस बार मतदाताओं की खामोशी भी एक बड़ा रहस्य बनी हुई है। इसका लाभ और हानि किसे होगी यह सब भी अब 4 जून के नतीजे ही बताएंगे इस कम मतदान प्रतिशत ने नेताओं में अभी से बेचैनी पैदा कर दी है।

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