मोदी मैजिक की झलक

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चार राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के जो नतीजे सामने आए हैं वह इस बात को साबित करते हैं कि केंद्रीय सत्ता में आने के बीते 10 साल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ऐसे नेताओं की कतार में लाकर खड़ा कर दिया है जो सर्वाग्रही और सर्वमान्य होते हैं। जिस लोकतंत्र में हर छोटी से लेकर बड़ी बातों को लेकर अगर—मगर की अनिवार्य परंपरा रही हो उसे देश में किसी भी नेता के लिए यह काम कतई भी आसान नहीं होता है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में जिस तरह की स्थितियां और परिस्थितियों थी उनके मद्देनजर खुद भाजपा के नेताओं को भी यह भरोसा नहीं था कि भाजपा इतनी चमकदार जीत दर्ज कर पाएगी। मध्य प्रदेश की बात करें तो एक अल्प अवधि को छोड़ दें तो यहंा पिछले 15 सालों से भाजपा और शिवराज सिंह चौहान का राज कायम रहा है। जिन्हें अब एक हारा थका या रिटायर्ड नेता के तौर पर देखा जा रहा था। यही कारण था कि इस चुनाव में भाजपा ने उन्हें मुख्यमंत्री का चेहरा भी घोषित नहीं किया और पीएम मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ने का फैसला किया। वहीं तमाम केंद्रीय नेताओं को टिकट देकर शिवराज को हाशिये पर रखा गया लेकिन 15 साल की सत्ता विरोधी लहर को मात देते हुए यहां सबसे बड़ी जीत दर्ज करने में जो कामयाबी मिली वह नरेंद्र मोदी के मैजिक और शिवराज चौहान की हार न मानने की जीत के कारण मिली। उनकी लाडली बहना ने उनकी नैया को फिर पार लगा दिया और गुजरात की तरह मध्य प्रदेश का नाम भी उस सूची में दर्ज कर दिया जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां भाजपा को कोई हरा नहीं सकता है। राजस्थान की तरह मध्य प्रदेश में भी भाजपा में अंतरकलह कम नहीं थी लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के चुनावी कौशल और अमित शाह जिन्हें राजनीति का चाणक्य कहा जाता है की नीतियों और फैसलों ने मध्य प्रदेश ही नहीं राजस्थान में भी दमदार जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान में भाजपा की इस जीत और कांग्रेस की करारी हार के पीछे कांग्रेस के अंर्तकलह ने भी बड़ी भूमिका निभाई है। सचिन पायलट को कदम—कदम पर नीचा दिखाने और पटकनी देने वाले अशोक गहलोत खुद बुरी तरह से चित हो गए। लेकिन कांग्रेस के नेताओं को यह बात कभी भी समझ नहीं आ सकती कि कांग्रेसी ही कांग्रेस को हरा रहे हैं। यह नरेंद्र मोदी के मैजिक का ही कमाल है कि जिस छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की जीत को तमाम राजनीतिक पंडित और सर्वे पुख्ता मान रहे थे वहां 90 में से 54 सीटें जीतकर भाजपा ने उन्हें सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया। पिछले चुनाव में तीन चौथाई सीट जीतने वाली कांग्रेस को इस बार सिर्फ 35 सीटें ही मिल सकी। राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में इस बड़ी जीत ने भाजपा को एक बार फिर फ्रंट फुट पर लाकर खड़ा कर दिया है जो कर्नाटक की हार के बाद बैक फुट पर आती दिख रही थी। भले ही कांग्रेस तेलंगाना के चुनावी नतीजों को लेकर अपने जख्म सहला रही हो लेकिन उसके नेताओं को इस बात का एहसास जरूर हो गया है कि 2024 का सफर उनके लिए आसान नहीं रहने वाला है। इंडिया गठबंधन में उसका जो दबदबा कर्नाटक की जीत से बढ़ा था उस बढ़त को कांग्रेस खो चुकी है। अब उसे टिकट बंटवारे में अनचाहे समझौते करने पड़ सकते हैं। वहीं इसके विपरीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के आत्म बल को चुनावी नतीजे से मजबूती मिली है। उसका यह विश्वास जरूर बढ़ा है कि मोदी के नेतृत्व में वह 2024 के लोकसभा चुनाव में आसानी से जीत का हैट्रिक लगाने में सफल रहेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो इन दिनों देश—विदेश में अपनी लोकप्रियता के दम पर छाए हुए हैं। इन चुनावी नतीजों ने उनकी छवि को और अधिक निखार दिया है कि मोदी है तो मुमकिन है की अब गारंटी बन चुके हैं। भाजपा में कोई भी दूसरा नेता उनके आसपास भी नहीं है।

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