घोर बिजली संकट की आहट

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नदियों के गिरते जलस्तर और बिजली संयंत्रों के घटते उत्पादन से राज्य का बिजली संकट आने वाले समय में और अधिक बढ़ सकता है वहीं केंद्र सरकार से मिलने वाला अतिरिक्त कोटा समाप्त होने की संभावनाओं के चलते गर्मी के सीजन में राज्य में बड़े बिजली संकट की संभावना है। भले ही अभी केंद्र सरकार द्वारा राज्य को मार्च माह के अंत तक गैर आवंटित कोटे से 12 लाख यूनिट (300 मेगा वाट) बिजली देकर थोड़ी राहत दे दे गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आज दिल्ली दौरे पर है और इस दौरे के दो ही अहम कारण हैं पहला कारण है बिजली संकट का समाधान और दूसरा है जोशीमठ आपदा के लिए आर्थिक पैकेज। मुख्यमंत्री धामी आज केंद्रीय ऊर्जा मंत्री से मिलकर उनसे यह आग्रह कर सकते हैं कि उन्होंने जो गैर आवंटित कोटे की अवधि एक माह बढ़ाकर राहत प्रदान की है उस राहत को कम से कम पूरे गर्मी सीजन में जारी रखा जाए? क्योंकि राज्य को पर्यटन सीजन और यात्रा सीजन में ज्यादा बिजली की जरूरत होगी। केंद्र सरकार इस मांग को मानती है या नहीं यह केंद्र के पास उपलब्ध बिजली और उसकी सोच पर निर्भर करता है क्योंकि उत्तराखंड देश का अकेला ऐसा राज्य नहीं है जिसे गर्मियों में बिजली संकट का सामना करना पड़ता हो अन्य तमाम राज्यों में भी बिजली का संकट बना रहता है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा अभी सभी कोयला और गैस आधारित बिजली संयंत्रों को पूरी क्षमता के साथ उत्पादन करने के निर्देश दिए गए हैं जिससे देश में कहीं भी बिजली का कोई बड़ा संकट पैदा न हो आमतौर पर देश में बिजली संकट के कारण भीषण गर्मी के सीजन में आठ—दस घंटे तक की बिजली कटौती की नौबत आ जाती है जिसके कारण उघोग और व्यापार पर भी गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उत्तराखंड के वर्तमान हालात पर गौर करें तो अभी जब गर्मी शुरू भी नहीं हुई और केंद्र द्वारा 72 लाख यूनिट बिजली अतिरिक्त कोटे से उपलब्ध कराई जा रही तब भी 1.3 करोड़ बिजली मांग के सापेक्ष कम है। राज्य में वर्तमान में बिजली की उपलब्धता 2.3 करोड़ यूनिट है जबकि मांग 3.9 करोड़ यूनिट की है आने वाले समय में जिसमें और भी अधिक बढ़ोतरी होना तय है। उत्तराखंड राज्य के लिए बहुत ही चिंतनीय बात है कि जिस राज्य में नदियों की भरमार हो और प्राकृतिक जल स्रोतों की खान हो वह राज्य अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी की बूंद बूंद को तरसे वहीं जिस राज्य में टीएचडीसी बिजली परियोजनाओं का संचालन होता हो उस राज्य को अंधेरे का सामना करना पड़े। उत्तराखंड की सरकार अब इस समस्या के समाधान को कोयला उत्पादन वाले राज्यों में पावर प्रोजेक्ट लगाने पर विचार कर रही है। खैर यह अभी भविष्य की योजना है बात वर्तमान की है तो राज्य अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भी दिल्ली दरबार के सहारे हैं। केंद्र से कितनी मदद मिलती है संकट का निवारण भी उसी आधार पर हो सकेगा। लेकिन इस सीजन में बिजली का बड़ा संकट संभावी है जो चिंता का विषय है।

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