बेरोजगारों के आंदोलन को हल्के में लेना प्रशासनिक लापरवाही

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राज्य में हुई तमाम भर्तियों के घोटालों की सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर सड़कों में उतरे बेरोजगार युवाओं के आंंंदोलन को हल्के मेंं लेना एक बड़ी प्रशासनिक लापरवाही मानी जा रही है। बेरोजगार युवाओं और छात्रों का यह आंदोलन विगत कुछ समय से पूरे प्रदेश में चल रहा है। बेरोजगार संघ के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन को पुलिस प्रशासन हल्के में लेता रहा और उसने बुधवार रात गांधी पार्क के गेट से इन युवाओं पर हल्का बल प्रयोग कर उन्हे वहंा से हटाने का प्रयास भी किया। लेकिन इस सब मामले का वीडियों वायरल होते ही युवाओं का हुजूम राजधानी की सड़कों पर उतर पड़ा और उसने कानून व्यवस्था की स्थिति को नियंत्रण से बाहर कर दिया। यह सब इसलिए हुआ क्योंकि प्रशासनिक लापरवाहियां इसके लिए जिम्मेदार रही। सवाल यह है कि क्या पुलिस का खुफिया तंत्र सो रहा था। क्या उसे इस सब मामलों की जानकारी नहीं थी। बहरहाल अब आंदोलन कर रहे इन बेरोजगार युवाओं पर प्रशासन की ओर से मुकदमें पंजीकृत किये गये है जो इनके भविष्य के लिए घातक साबित होगें।
उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों की जो लूटपाट अब तक हुई है वह एक ऐसी गलती है जिस पर अब सरकार द्वारा लगाम लगाना जरूरी है। विधानसभा व सचिवालय की बैकडोर भर्तियों की बात करें या फिर यूकेएसएसएससी भर्ती सहित अन्य भर्ती घोटालों की, सभी की कहानी एक जैसी है। बीते समय में यूकेएसएसएससी भर्ती घोटाले की जांच के बाद जब कई लोगों पर मुकदमें दर्ज कर उन्हे जेल भेजा गया तब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के बेरोजगारों को यह आश्वासन दिया था कि अब राज्य में युवाओं के साथ कोई नाइंसाफी नहींं होगी और न अब कोई भर्ती घोटालों के बारे में सोच सकेगा। लेकिन 8 जनवरी 2023 को करायी गयी लेखपाल—पटवारी भर्ती परीक्षा में जब घोटाले की बात सामने आयी तो राज्य के युवाओं का आक्रोशित होना स्वाभाविक था। जिसका असर बीते रोज उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून में देखने को मिला। सच अगर स्वीकार किया जाए तो राज्य गठन से लेकर इन भर्ती घोटालो के खुलासे से पूर्व जितनी भी भर्तियां हुई उन सभी भर्तियों में व्यापक धांधली हुई है। नकल माफिया जिनके घर में खाने के लिए दाने तक नहीं थे लाखों करोड़ों की संपत्तियों के मालिक अगर बन गए तो यूं ही नहीं बन गए। अब आयोग और सरकार चाहे जितने सख्त फैसले और इन आरोपियों को कानूनी तौर पर सलाखों के पीछे भिजवा दें और उनकी थोड़ी बहुत संपत्ति अभी जब्त करा दे लेकिन उन्हें ज्यादा कुछ प्रभाव पड़ने वाला नहीं है। सच यह है कि अब इस भूल का सुधार संभव नहीं है।

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