उत्तराखंड सरकार का अजब—गजब कारनामा: शराब तस्करी, दलाली व वेश्यावृत्ति भी व्यवसाय

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ई—सर्विस पोर्टल `अपुणी सरकार’ पर दी गई जानकारी
किरायेदारों के सत्यापन में दी व्यवसाय की कैटेगरी
अब की जा रही है जांच कराने और सुधार की बात

देहरादून। राज्य के लोगों को घर बैठे तमाम सुविधाएं ई—सर्विस पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध कराने का दावा करने वाली सरकार की `अपुणी सरकार’ वेबसाइट पर किरायेदारों का सत्यापन कराने से लेकर 200 से अधिक सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। लेकिन इन सेवाओं को कैसे प्रदान किया जा रहा है इसका उदाहरण इस पर मांगे जाने वाली जानकारियों से होता है। जिसे पढ़कर कोई भी व्यक्ति हैरान परेशान हो सकता है।


किरायेदारों के सत्यापन के लिए बनाई गई इस ऐप पर जाने पर मकान मालिक और किराएदार के बारे में कई तरह की जानकारियां मांगी गई है। जिसमें उनके व्यवसाय और उसकी कैटेगरी के बारे में पूछा गया है। इस पर व्यवसाय की जो कैटेगिरियंा (श्रेणी) दी गई है उसमें अनेक ऐसी श्रेणी दी गई है जो न सिर्फ अति आपत्तिजनक है अपितु शासन—प्रशासन में बैठे लोगों की सोच और कार्यश्ौली पर सवाल खड़े करती है। इसमें व्यवसाय की श्रेणियों में शराब तस्करी, दलाली, कांटे्रक्ट किलिंग, वेश्यावृत्ति, खानाबदोश, अवैध दवा विक्रेता सहित तमाम ऐसे शब्द है जो अत्यंत ही आपत्तिजनक हैं।


मकान मालिकों द्वारा जब इस ऐप को खोल कर यह देखा गया तो उनके द्वारा इस पर आपत्ति की गई है। सवाल यह है कि क्या उत्तराखंड का शासन प्रशासन शराब तस्करी और वेश्यावृत्ति, दलाली और कॉन्ट्रैक्ट किलिंग को व्यवसाय मानता है या यह बातें देवभूमि में लीगल मानी जाती है और व्यवसाय की श्रेणी में आती हैं। किरायेदारों के सत्यापन के ई—सर्विस पोर्टल पर जो पुलिस की वेबसाइट है और दी गई इन व्यवसायिक श्रेणियों पर हर कोई हैरान और परेशान है। इस तरह का कारनामा किसके द्वारा किया गया तथा वह ज्ञानी जो डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को इतने अच्छे ढंग से आगे बढ़ा और चला रहा है वह कौन है? उसका पता लगाया जाना चाहिए यही नहीं पोर्टल पर इस तरह की जानकारियां दिए जाने से पहले किसी भी संबंधित अधिकारी ने इस पर गौर क्यों नहीं किया? यह दूसरा बड़ा सवाल है। अब इस मामले के खुलासे के बाद हंगामा मचा हुआ है क्योंकि यह कोई मामूली चूक नहीं है। विभागीय अधिकारियों द्वारा अब इसकी जांच कराने और इसे ठीक करने की बात कही जा रही है।

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