सरकारी सिस्टम की बीमारी

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सीएम पुष्कर सिंह धामी ने राजधानी दून के आरटीओ दफ्तर का औचक निरीक्षण किया और लापरवाह अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। आरटीओ दफ्तर की कार्यप्रणाली किसी से छिपी नहीं है हर आम आदमी इससे वाकिफ है क्योंकि हर एक आदमी का इस दफ्तर से काम पड़ता है। यहंा कोई भी काम सीधे—सीधे नहीं होता है बिना दलालों की सहायता के यहां कोई भी काम आसान नहीं है अगर इस दफ्तर को दलालों का अड्डा कहा जाता है तो वह बेवजह नहीं है। लीगल—इललीगल किसी भी काम को दलालों के माध्यम से आप बिना किसी परेशानी के करा सकते हैं। हर एक दलाल आपको आपके काम के लिए ली जाने वाली धनराशि के साथ यह जरूर बता देगा कि इसमें इतने रुपए तो उसे बाबू को ही देने पड़ेंगे। इन दलालों और आरटीओ कर्मचारियों की ऐसी सांठगांठ है कि जो काम आम आदमी महीनों चक्कर काट कर भी नहीं करा सकता वह काम यह चुटकी बजाते ही करवा देते हैं। मुख्यमंत्री धामी अगर दिनेशचंद्र पठोई को सस्पेंड करके या 25 कर्मचारियों का वेतन रोक कर यह सोचे बैठे हैं कि अब सब कुछ ठीक हो जाएगा तो यह उनकी एक बड़ी भूल या मुगालता ही है। पठोई की तैनाती जब पहाड़ में थी तब उनके खिलाफ ऐसी ही कुछ कार्रवाई हुई थी लेकिन अब वही पठोई लंबे समय से राजधानी दून में आरटीओ की कुर्सी पर जमे बैठे हैं। भले ही सीएम ने उन्हें सस्पेंड किया हो और आज दूसरे दिन वह दफ्तर पहुंच गए। रही बात यहां के कर्मचारियों और दलालों की मुख्यमंत्री की कार के आरटीओ दफ्तर से निकलते ही यहां सारी गतिविधियां सामान्य दिनों जैसी ही देखी गई। आरटीओ दफ्तर में ऐसी कार्रवाई कोई उनके लिए खास बात नहीं है। इससे पूर्व कांग्रेस सरकार में परिवहन मंत्री रहे स्वर्गीय सुरेंद्र राकेश ने भी तत्कालीन आरटीओ को हटा दिया गया था। अभी कुछ समय पूर्व आरटीओ दफ्तर के दलालों पर विजिलेंस ने फर्जी बीमा कराने के मामले में कार्रवाई की थी जिसमें कुछ दलालों को हिरासत में भी लिया गया था लेकिन उनकी दुकानें अभी भी चल रही है। मुख्यमंत्री ने भले ही इस छापेमारी से प्रदेश के अधिकारियों को यह संदेश देने की कोशिश की होगी कि वह ठीक से काम करें और समय से दफ्तर आएं तथा गुड गर्वर्नेंस के मामले में समझौता नहीं किया जाएगा। लेकिन उनकी इस कोशिश से वैसा कुछ संभव है नहीं। उनकी यह कार्रवाई एक—दो दिन दफ्तरों में चर्चा का विषय जरूर रह सकती हैं। दरअसल कामचोरी या नकारा पन और मुफ्त की कमाई सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के खून में कैंसर की तरह अपनी जड़ें जमाए हुए हैं। जिसको किसी एक—दो ऑपरेशन से ठीक नहीं किया जा सकता है। यह एक ऐसी व्यवस्थागत खामियां हैं जिनके लिए लगातार सर्जरी की जरूरत है। सीएम ने एक सर्जरी सहकारी बैंक घपलों में भी की थी। इस बीमारी से हर विभाग ग्रसित है इसलिए यह भी एक सवाल है कि किस—किस की सर्जरी की जाए खैर सीएम जितना कर पा रहे हैं अच्छा है।

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