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जनमन की अकुलाहटः केजेपी

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भले ही केजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के गठन को अभी जुम्मा जुम्मा 8 दिन भी नहीं हुए सही, लेकिन डिजिटल इंडिया के वर्तमान युग में महज 5—6 दिन में ही काकरोज जनता पार्टी ने ऐसा गर्दा उड़ाया है कि यह नाम अब किसी परिचय का मोहताज नहीं रहा है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपक और उनके सहयोगियों ने अब अपनी पार्टी का पांच सूत्रीय एजेंडा भी जारी कर दिया है जिसमें लिखे गए सभी बिंदुओं पर गौर किया जाए तो स्पष्ट तौर पर यह कहा जा सकता है कि यह जन मन में वर्तमान सरकार और सिस्टम जो सरकार द्वारा ही तैयार किया गया है को लेकर अकुलाहट या फिर यूं कहे की आक्रोश का ही नतीजा है इस आइडिये का सुपरहिट होना और इतनी तेजी से इसके फॉलोअर्स का बढ़ना कि उसने 5 दिन में सोशल मीडिया पर अपनी बुलंदी के झंडे गाढ़ते हुए विश्व की सबसे बड़ी कहीं जाने वाली भाजपा और सबसे पुरानी कहे जाने वाली कांग्रेस को भी कोसों पीछे छोड़ दिया है। कॉकरोच का आतंक तो इससे भी समझ सकते हैं कि सरकार द्वारा भारत में उसके इंस्टाग्राम अकाउंट को सील कर दिया गया है। लेकिन जिस युवा और आईटी की तकनीक से लैस नई पीढ़ी ने अपने इस आईडिये को लांच किया गया है उसने तुरंत ही दूसरा अकाउंट भी बना दिया है और सत्ता में बैठे लोगों को यह बता दिया है कि वह उन्हें अपनी बात कहने से रोक नहीं सकते हैं। सही मायने में यह वही जनमत की ताकत है जिससे लोकतंत्र चलता है। अभिजीत का अपने डेढ़ करोड़ से अधिक फॉलोअर्स से कहना है कि वह भाजपा को तुरंत अनलॉक करें। सच यह है कि कॉकरोच ने सरकार और देश के सिस्टम को हिला कर रख दिया है। हमारे जैसे पत्रकार तो सही मायने में युवा पीढ़ी और नई तकनीकी युग में इतने आउटडेटेड हो गए हैं कि जो इन युवाओं ने मजाक मजाक में कर दिखाया है हम तो वैसा होने के बारे में सही मायने में सोच भी नहीं सकते थे। देश की सरकार ने पूरे ही सिस्टम को इस कदर पैरालाइज्ड कर दिया है कि हमारी सोच का दायरा सिर्फ मोदी मीडिया और पूंजीपतियों के हाथों मे देश चले जाने पर सिर्फ चर्चा तक या बोलने पर जेल जाने की डर से सिर्फ तमाशबीन बन कर रह गए हैं। केजेपी को लेकर तमाम तरह की संभावनाएं और आशंकाएं दोनों ही एक साथ चल रही हैं। कहीं यह भी अन्ना हजारे के आंदोलन की तरह कोई राजनीतिक स्टंट तो नहीं है या फिर सरकार का मुद्दों से ध्यान भटकाने का कोई षड्यंत्र या फिर जेन जे जिसकी चर्चाएं बीते लंबे समय से हो रही है जैसा कोई आंदोलन तो नहीं? कुछ लोग इसे समय की मांग बताते हुए किसी बड़े परिवर्तन का संकेत भी मान रहे हैं। लेकिन यह कॉकरोच जनता पार्टी कुछ नहीं ऐसा हम कतई भी मानने को तैयार नहीं है। इसके एजेंडे में सुप्रीम कोर्ट के जजों की राज्यसभा जाने पर रोक लगाने तथा दल बदल करने वालों पर आजीवन प्रतिबंध लगाने और किसी एक भी व्यक्ति का वैध वोट काटे जाने पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त को जेल में डालने एवं महिलाओं को 33 फीसदी की जगह 50 फीसदी आरक्षण बिना लोकसभा सीटें बढ़ाये ही देने की जो बातें कही गई है वह हमारे सडे़ गले सिस्टम की फुल बॉडी सर्जरी से कम नहीं है। इसके अलावा उघोगपतियों के मीडिया संस्थानों को बंद कराने तथा मोदी मीडिया के सभी एकाउंट्स की जांच कराने की बात भी कही गई है। सपाट भाषा में यह संदेश घर का सामान नहीं पूरा घर ही बदलने की बात इसमें समाहित है। कॉकरोच जनता पार्टी जिसके धड़ाधड़ प्रांतीय ऑफिस तक खुलना शुरू हो गए हैं, का भविष्य क्या होगा समय ही बताएगा? लेकिन युवाओं को आवाज देने वाले सीजीए को साधुवाद जिन्होंने इस विमर्श को जन्म दिया।

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