मेजर जनरल भुवन चंद खंडूरी अब हमारे बीच नहीं रहे। कल दोपहर जैसे ही यह समाचार आया तो हर एक मन को एक धक्का जैसा लगा। प्रतीत हुआ जैसे कोई बहुमूल्य वस्तु हमसे छीन ली गई हो जिसकी रिक्तता को भरना मुश्किल ही नहीं असंभव है। मृत्यु जीवन का अंतिम सत्य है। नौ दशक लंबा जीवन कम नहीं होता है। बीसी खंडूरी ने निसंदेह एक भरा—पूरा और सफल ऐसा जीवन जिया जो कुछ ही भाग्यशाली लोगों को या यूं कहें कर्मवीरों को नसीब होता है। बचपन से लेकर शिक्षा दीक्षा और देश सेवा के लिए समर्पित जीवन के 39 साल जो उन्होंने सेना को दिए तथा लगभग 30 साल जो राजनीति को दिए हर जगह उन्होंने अपनी अनुशासनिक कठोर कार्य श्ौली का परिचय दिया। जिसके कारण उन्हें सेना का अति विशिष्ट सेवा पदक दिया गया। राजनीति जिसको काजल की कोठरी कहा जाता है, जैसे क्षेत्र में अपनी ईमानदार छवि और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख रखने वाले बीसी खंडूरी को अगर पूरा देश मिस्टर क्लीन के नाम से जानता है तो यह वर्तमान दौर के राजनीतिक परिवेश में उनकी बड़ी उपलब्धियों में से एक है। स्वर्गीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के सानिध्य में अपनी राजनीतिक पाली शुरू करने वाले बीसी खंडूरी पांच बार पौड़ी संसदीय सीट से चुनाव जीतकर लोकसभा सदस्य रहे तथा उनकी सरकार में 2003—2004 में भूतल परिवहन मंत्रालय का कार्य भी संभाला। इस दौरान उनके द्वारा पूरे देश के चारों कोनों को जोड़ने के लिए शुरू की गई स्वर्ण चतुर्भुज जैसी परियोजना को लाकर किया, जो अत्यंत ही चर्चित रही। कई लोग उस समय उन्हें मजाकिया अंदाज में रोड मिनिस्टर की जगह रोड मास्टर भी कहते थे। अपनी बेदाग छवि निष्पक्ष और ईमानदार कार्यश्ौली और कठोर अनुशासित शासन के लिए पक्ष ही नहीं विपक्ष के नेता भी उनकी हमेशा सराहना करते रहे हैं। 2007 में जब भाजपा उत्तराखंड में सत्ता में आई तो केंद्रीय नेतृत्व द्वारा उत्तराखंड का मुख्यमंत्री उन्हें नियुक्त किया गया। लेकिन राज्य की भाजपा ने सहजता से उन्हें स्वीकार नहीं किया गया क्योंकि उन्हें वैसी अनुशासन कार्यश्ौली की आदत ही नहीं थी जैसी की बीसी खंडूरी को पसंद थी देश में उत्तराखंड पहला राज्य था जहां बीसी खंडूरी द्वारा लोकायुक्त का गठन किया गया। अन्ना हजारे के आंदोलन से भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे मारक माने जाने वाले लोकायुक्त का आज तक भी विधिवत गठन राज्य के नेताओं ने नहीं होने दिया क्योंकि वह वित्तीय अनुशासन चाहते ही नहीं है। इसी एक कारण ने उन्हें सीएम की कुर्सी पर नहीं टिकने दिया वह भले ही 2012 के चुनाव से पूर्व दोबारा सीएम बना दिए गए थे लेकिन पार्टी के षड्यंत्रकारी नेताओं ने उन्हें चुनाव हरा दिया। भले ही आज वर्तमान की राजनीति में सीएम पुष्कर सिंह धामी को कोई धाकड़ धामी और कोई धुरंधर धामी जैसी शब्दावली से नवाजता हो लेकिन उत्तराखंड की राजनीति में बीसी खंडूरी जैसा न धाकड़ सीएम कोई रहा है न कोई धुरंधर रहा है अपनी ईमानदार बेदाग छवि और कठोर अनुशासन प्रियता के कारण सूबे की राजनीति में उन्हें जो सम्मान हासिल है उसका कोई दूसरा उदाहरण नहीं हो सकता। उनके कृतित्व और सेवाओं के लिए समाज उनका सदैव ऋणी रहेगा। ईश्वर उनकी दिव्य आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें। उनका जाना समाज व राजनीति के लिए अपूरक क्षति है जिसे कोई पूरा नहीं कर सकता।




