भ्रष्टाचार—महंगाई व बेरोजगारी बड़े मुद्दे

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अभी हाल ही में हुए एक ताजा सर्वे में यह बात सामने आई है कि आज भी महंगाई बेरोजगारी और भ्रष्टाचार सबसे बड़े मुद्दे हैं तथा बीते 10 सालों में महंगाई, बेरोजगारी तथा भ्रष्टाचार में बढ़ोतरी के कारण आम आदमी का जीवन सर्वाधिक प्रभावित हुआ है इसके साथ ही इस सर्वे रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि केंद्र की मोदी सरकार द्वारा इन तीनों ही मुद्दों को नजरअंदाज किया गया है और इनके समाधान की कोई ठोस पहल नहीं की गई है। 2024 के आम चुनाव का रुख समझने के उद्देश्य से कराए गए इस सर्वे के नतीजे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लोकप्रियता में पहले और राहुल गांधी को दूसरे स्थान पर रखा गया है तथा तीसरी बार फिर भाजपा के सत्ता में आने की संभावना जताई गई है और इस जीत के पीछे मोदी और भाजपा का राष्ट्रवाद का मुद्दा तथा हिंदुत्व और उसके प्रचार के तरीके को मुख्य एजेंडा बताया गया है। देश में बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी ने आम आदमी की मुश्किलों को और अधिक बढ़ा दिया है इस सच को भले ही मोदी और सत्ता में बैठे उनके सहयोगी स्वीकार करें या न करें लेकिन जानते जरूर है। बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी ने करोड़ों लोगों को गरीबी की भटृी में झोंक दिया है। बीते 10 साल में हुई अप्रत्याशित मूल्य वृद्धि का प्रभाव ग्रामीणों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। वर्तमान सरकार चुनाव से पूर्व अब रोजगार मेलों का आयोजन कर इस बात का प्रचार कर रही है कि बेरोजगारी को लेकर सरकार कितनी चिंतित है तथा बेरोजगारों के लिए कितना काम कर रही है। बेरोजगार मेला भी सरकार का एक ऐसा फंडा है जो महज प्रचार पाने के लिए अपनाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगर अपने कार्यकाल में बेरोजगारों के लिए अगर कुछ किया होता तो शायद उन्हें आज युवाओं को यह समझाने की जरूरत नहीं पड़ती की स्वरोजगार भी रोजगार है और न इन रोजगार मेलों की जरूरत पड़ती। बात अगर भ्रष्टाचार पर रोकथाम की करें तो इन मामलों में भी मोदी सरकार की फिसड्डी साबित हुई है। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की तरह भले ही खुद मोदी भी मिस्टर क्लीन कहलाते हो लेकिन उनके मंत्री, सांसद और विधायक खूब भ्रष्टाचार की गंगा में गोते लगा रहे हैं। अभी नरेंद्र नगर में जी—20 की बैठक में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर तमाम देशों के प्रतिनिधियों ने खूब माथापच्ची की। केंद्रीय राज्य मंत्री अजय भटृ जब मीडिया को बता रहे थे कि हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रष्टाचार से मिलकर लड़ेंगे तो उनसे पूछ लिया गया कि राष्ट्रीय स्तर पर भ्रष्टाचार से लड़ने के लिए वह क्या कुछ कर रहे हैं? तो वह बगले झांकने लगे। दरअसल भाजपा के नेता जिस विजय रथ पर सवार है उन्हें अब महंगाई व बेरोजगारी तथा गरीबी और भ्रष्टाचार के मुद्दे नजर ही नहीं आते हैं। उन्हें राष्ट्रवाद, हिंदुत्व तथा मंदिर मस्जिद और बजरंगबली ही सबसे बड़े राजनीतिक मुद्दे रास आ रहे हैं। जिन का प्रचार करने की उनके पास ऐसी अकूत क्षमता है कि उनके सामने विपक्ष के असली मुद्दे महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार कहीं टिक ही नहीं पा पा रहे हैं। 2024 का चुनाव कटृर हिंदुत्व और धार्मिक आधार पर वोटों के ध्रुवीकरण पर ही लड़ा जाएगा जिसमें राष्ट्रवाद का तड़का लगाने में कोई कोर कसर नहीं रखी जाएगी। यह चुनाव परिणाम ही बताएंगे की असली मुद्दों पर चुनाव लड़ने वाले राजनीतिक दल सत्ता की घोड़े पर सवार भाजपा का कितना मुकाबला कर पाते हैं और कितना नहीं

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