अव्यवस्थाओं का बोलबाला

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यह ठीक है कि मध्य मार्च से लेकर अब तक उत्तराखंड का मौसम अत्याधिक खराब रहा है जिसका गंभीर प्रभाव खेती—किसानी और आम जनजीवन पर पड़ा है लेकिन वर्तमान समय में चारधाम यात्रियों को जिस तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है उसका कारण सिर्फ मौसम की विसंगतियां ही नहीं सरकार की तैयारियां भी कम जिम्मेदार नहीं है। भले ही सरकार और सीएम ने यात्रा शुरू होने से पूर्व इन तैयारियों के बारे में बड़े दावे करते हुए यहां तक कहा था कि हमारी व्यवस्थाएं ही हमारा ब्रांड एंबेसडर है किंतु अब सरकार को भी इस बात का एहसास हो गया है कि आधी अधूरी तैयारियों के बीच शुरू हुई यह चार धाम यात्रा अव्यवस्थाओं से किस तरह प्रभावित हो रही हैं। इन अव्यवस्थाओं पर जब पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज से कोई सवाल किया जाता है तो वह कहते हैं कि अब अगर मौसम खराब है तो वह क्या कर सकते हैं? यह ठीक है कि पर्यटन मंत्री या अन्य कोई भी व्यक्ति प्राकृतिक मामलों में कुछ नहीं कर सकता है लेकिन उनका इस तरह का जवाब क्या अपनी जिम्मेदारियों से बचने को नहीं दर्शाता है। इन दिनों चारधाम यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी खराब सड़कों और रास्तों से हो रही है। खराब सड़कों के कारण जगह—जगह यात्री जाम में फंस रहे हैं और सरकारी व्यवस्थाओं को कोस रहे हैं। वहीं धामों में उनके रहने खाने और सोने से लेकर शौच और स्नान तक की व्यवस्थाएं नहीं है। यात्रियों को आम जरूरत का सामान ठीक से मिल ही नहीं पा रहा है या फिर मनमाने दामों पर मिल रहा है। इस बारिश और बर्फबारी के बीच धामों में यथोचित सफाई व्यवस्था रखना भी मुश्किल हो रहा है जिसके कारण भारी गंदगी का अंबार धामों में लगता जा रहा है। सरकार ने यात्रा के सुचारू संचालन के लिए जो नियमावली तैयार की थी उस पर या तो अमल की कोई व्यवस्था नहीं है या फिर उस नियमावली में फेरबदल कर सरकार द्वारा ही निष्प्रभावी बना दिया गया है जिसके कारण चार धाम यात्रा अव्यवस्थाओं का शिकार हो चुकी है। शासन द्वारा पहले ही हर एक धाम में एक दिन में निर्धारित संख्या में श्रद्धालुओं को भेजने की बात कही गई थी लेकिन तीर्थ पुरोहितों और पंडा पुजारियों व व्यवसायियों ने सरकार पर दबाव बनाकर इस नियमावली को निष्प्रभावी बना दिया गया नतीजा यह है कि 22—22 घंटे मंदिरों को खुला रखकर भी श्रद्धालुओं को ठीक से दर्शन नहीं करवाये जा रहे हैं क्योंकि धामों में इतनी अधिक भीड़ है कि क्षमता से डेढ़ व दोगुना यात्री हर रोज धामों में पहुंच रहे हैं ऐसे में उनके रहने खाने से लेकर दर्शन कराने तक की व्यवस्थाएं ध्वस्त हो चुकी है सरकार का दावा भले ही यह रहा हो कि टोकन से दर्शन कराएंगे और किसी भी यात्री को घंटो तक कतारों में खड़े होकर इंतजार नहीं करना पड़ेगा लेकिन अब लंबी—लंबी कतारें लगी हुई हैं। बिना रजिस्ट्रेशन किसी को भी दर्शन नहीं कराने का नियम भी हवा हवाई ही साबित हुआ है जो भीड़ धामों में जुट रही है वह बताती है कि रजिस्ट्रेशन के बिना भी यात्री बड़ी संख्या में धामों में पहुंच रहे हैं। केदारनाथ जाने वाले यात्रियों के लिए हेली सेवा की बुकिंग तो मानो किसी जंग जीतने के बराबर हो चुकी है। घोड़ा—खच्चर वाले हो या फिर हट और टेंट वाले, होटल वाले हो या ढाबे वाले हर कोई श्रद्धालुओं को उल्टे उस्तरे से छील रहा है। चारधाम आने वाले यात्री इन अव्यवस्थाओं के कारण देवभूमि व सरकार की कैसी छवि मन में लेकर जा रहे हैं इस पर गौर करने का समय यहां किसी के भी पास नहीं है।

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