उड़ रहे नोट गुलाबी

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खबर आई थी सरकार ने अभी 2016 में नोटबंदी के बाद जिस दो हजार के गुलाबी नोट को लाया गया था उसे चलन से बाहर किया जा रहा है जिन लोगों के पास भी यह गुलाबी नोट है वह 30 सितंबर तक 10 नोट हर रोज (20 हजार रूपये) किसी भी बैंक में जाकर बिना किसी पहचान पत्र और पर्ची के बदलवा सकते हैं। जैसा कि सभी को पता है कि यह गुलाबी नोट जिस भी पूंजीपति या धन्ना सेठ के हाथ में पहुंचा उसी की तिजोरी में कैद हो गया। सालों से यह नोट गाहे—बगाहे ही दिख रहा था। इस गुलाबी नोट ने अपनी छपाई के बाद ही ऐसी उड़ान भरी कि आम आदमी को इसके अब दर्शन भी दुर्लभ हो चुके थे। नोट को चलन से बाहर होने की खबर आई तो एक बार फिर इस गुलाबी नोट ने उड़ान भरनी शुरू कर दी। भले ही इस को बैंकों में बदलने की प्रक्रिया आज से शुरू हुई हो लेकिन जिनकी तिजोरियंा इस गुलाबी नोट से भरी पड़ी थी उन्होंने नोटों के बंडल लेकर सर्राफा बाजार की दौड़ शुरू कर दी। जो नोट देखने को नहीं मिल रहा था उसे लेकर हर कोई वह आदमी जिसके पास दो चार भी नोट थे उन्हें लेकर खरीदारी करने निकल पड़ा। जिसे किसी का छोटा या बड़ा भुगतान करना हो अब डील सिर्फ गुलाबी नोट से ही हो रही है। आरबीआई के इस फैसले को लेकर तमाम तरह की शंकाएं आशंकाएं स्वाभाविक है क्योंकि आज के इस डिजिटल युग में कोई भी बैंक में लेनदेन बिना किसी पहचान (आईडी) या लिखा पढ़ी के संभव नहीं है यही कारण है की इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने से लेकर कल इस पर साफ सफाई देने मीडिया के सामने आये आरबीआई के गवर्नर ने भी यह नहीं बताया कि 30 सितंबर के बाद यह गुलाबी नोट लीगल टेंडर होगा या नहीं। उनका भी यही कहना था कि अभी यह गुलाबी नोट लीगल टेंडर है लेकिन सरकार ने इसे 2019 में ही छापना बंद कर दिया था। जब सरकार ने इस गुलाबी नोट को छापना बंद कर दिया है तो यह साफ है कि 30 सितंबर को न सही लेकिन इसके बाद इसे कभी भी इनलीगल टेंडर घोषित किया जा सकता है। उनसे जब यह नोट छापने व बंद करने पर सवाल पूछा गया तो उनका कहना था कि इस गुलाबी नोट को किसी खास उद्देश्य के लिए लाया गया था। अब यह समझ पाना किसी के लिए भी बहुत मुश्किल है कि वह खास उद्देश्य क्या था? इसे सिर्फ आरबीआई के गर्वनर या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही जान सकते हैं। 2019 के चुनाव से पूर्व जिस तरह अचानक प्रधानमंत्री ने देश की करेंसी को इनलीगल घोषित कर दिया था और इसे काला धन को समाप्त करना उद्देश्य बताया गया ऐसा ही कोई उद्देश्य इस गुलाबी नोट को छापने और अब वापस लेने के पीछे भी हो सकता है। 2016 की नोटबंदी को काले धन को सफेद करने के लिए जाना जाता है क्योंकि चलन में जितनी करेंसी थी उससे भी अधिक बैंकों में वापस जमा हो गई थी लोग पूछते रहे कि काला धन कहां गया लेकिन इसका जवाब आज तक किसी को नहीं मिल सका है। इस दो हजार के नोट के रूप में किसी के भी पास अगर 10—20 करोड़ का काला धन जमा है तो वह 30 सितंबर तक बड़ी आसानी से इसे व्हाइट मनी में तब्दील कर आ सकता है और अगर किसी बैंक में सांठगांठ है जैसा कि 2016 में देखा गया था तो फिर यह काम और भी आसानी से हो जाना तय है। 2024 के चुनाव से पहले इस गुलाबी नोट की उड़ान राजनीति में क्या गुल खिलाएगी और अर्थव्यवस्था को किधर ले जाएगी यह आने वाला समय ही बताएगा। फिलहाल तो आप इस गुलाबी नोट की अंतिम उड़ान को सिर्फ देखिए।

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