भर्ती घोटालों पर दोहरा मापदंड

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भर्तियों के पेपर लीक मामलों में जहंा एक तरफ राज्य के युवा बेरोजगारों की आवाज उठाने वाले बेरोजगार संघ के अध्यक्ष सहित 13 लोगोें को सरकार द्वारा जेल भेज दिया गया है वहीं इन भर्ती घोटालों में नामजद आरोपी भाजपा का पूर्व मंडल अध्यक्ष सजंय धारीवाल जिस पर 25 हजार रूपये का ईनाम भी घोषित है वह अब तक पुलिस पकड़ से बाहर है। क्या यह सरकार का दोहरा मापदंड नहीं है? राज्य में हुई भर्तियों में हुए घोटालों में जिस तरह से एक के बाद एक भाजपा नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं उससे भाजपा के शीर्ष नेताओं का असहज होना स्वाभाविक है। बीते कुछ समय पूर्व जब विधानसभा में हुई बैकडोर भर्तियों का मामला सामने आया था तो तब सरकार द्वारा मामले में खुद को बचाते हुए इनमें से कुछ भर्तियों को अवैध करार देते हुए कुछ लोगों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। जबकि आमजन का सवाल यह है कि क्या विधानसभा में बैकडोर से भर्ती हुए इन लोगों की अकेले की ही गलती थी क्या उन लोगों की यह गलती नहीं है जिन्होने उन्हे भर्ती करवाया था। वह तो सरकार के ही लोग थे? सवाल यह है कि जब सत्ताधारी दल के नेताओं द्वारा इस तरह के कामों को अंजाम दिया जाएगा तो राज्य के युवाओं को किस पर भरोसा हो सकता है। भाजपा नेता और मंडल अध्यक्ष संजय धारीवाल का नाम जब एई—जेई भर्ती पेपर लीक मामले में सामने आया तो भाजपा ने खुलासे से पहले ही उसका इस्तीफा ले लिया और उसकी पार्टी सदस्यता भी निरस्त कर दी गई। लेकिन इतने बड़े मामले में उसकी अब तक गिरफ्तारी न होना भी सरकार पर सवालिया निशान लगाता है। इससे पूर्व जब यूकेएसएसएससी पेपर लीक मामले में हाकम सिंह का नाम सामने आया था तब भी युवा बेरोजगारों ने सरकार पर सवाल उठाये थे। अब जब भर्ती घोटालों के यह मामले तूल पकड़ चुके है और बेरोजगार युवा इस मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहे है तो सरकार द्वारा इन्हे कानून व्यवस्था के लिए खतरा बताते हुए जेल भेज दिया गया है। जबकि इन्ही भर्ती घोटालों में लिए पूर्व भाजपा नेता संजय धारीवाल अब भी पुलिस पकड़ से बाहर है क्या यह सरकार का दोहरा मापदंड नही है? आज अगर कांग्रेसी नेता इस मुद्दे पर भाजपा की घेराबंदी करते हुए यह कह रहे हैं कि भाजपा में अभी न जाने कितने और हाकम सिंह और धारीवाल है यह तो महज मोहरे भर हैं इन्हें संरक्षण देने वालों के नाम भी सामने आने चाहिए। इस बात की आज अगर संभावनाएं जताई जा रही है कि इस भर्ती घोटालों के गोरखधंधे में कुछ बड़े सफेदपोशों के नाम भी सामने आ सकते हैं तो वह बेवजह नहीं है।

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