अराजक तत्वों पर सख्ती जरूरी

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हमारे संविधान की मूल भावना भले ही सर्व धर्म समभाव की रही हो और उसकी प्रस्तावना में धर्मनिरपेक्ष जैसे भारी—भरकम शब्दों का उल्लेख हो लेकिन इसके बावजूद भी धर्म और जातिगत मुद्दों पर जिस तरह तकरार और टकराव की घटनाएं पेश आती रही हैं उन्हें सांप्रदायिक सद्भाव के लिए बड़ा खतरा माना जाता है। परसों भी हनुमान जयंती के अवसर पर देश भर में निकाली गई शोभा यात्राओं के दौरान अराजक तत्वों द्वारा पथराव, गोलीबारी और हिंसा फैलाने के जो प्रयास किए गए उन्हें उचित नहीं ठहराया जा सकता है। देश की राजधानी दिल्ली से लेकर दून और हरिद्वार तक ऐसी कई घटनाएं सामने आई है जो सामाजिक सुरक्षा के लिहाज से तो चिंतनीय है ही इसके साथ—साथ देश की एकता और अखंडता के लिए भी एक बड़ा खतरा है। हरिद्वार जनपद के जलालपुर में पथराव करने वाले लोगों द्वारा पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे भी लगाए गए। सवाल यह है कि दिल्ली के जेएनयू से लेकर अलीगढ़ के एएमयू और हरिद्वार के जलालपुर तक ये पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने वाले कौन लोग हैं? जो खाते भारत का है और रहते भारत में हैं और नारे पाकिस्तान जिंदाबाद के लगाते हैं। तथा हिंदुओं के देवी—देवताओं पर भी अश्लील टिप्पणी करते हैं। ऐसे देशद्रोहियों और अराजक तत्वों की न सिर्फ पहचान किया जाना जरूरी है बल्कि इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई किया जाना भी जरूरी है। हैरान करने वाली बात यह है कि एक तरफ सरकार द्वारा इन्हें देश में फलने फूलने के समान अवसर दिए जा रहे हैं और पीएम मोदी द्वारा सबका साथ सबका विकास की भावना से काम किया जा रहा है लेकिन इसके बाद भी सबका विश्वास कहां से लाया जाए? सच यह है कि यह संभव है ही नहीं चाहे सरकार और पीएम इसके लिए कुछ भी कर ले। पथराव करने वाले इन अराजक तत्वों की अब पहचान तो की ही जा रही है। साथ ही उनकी गिरफ्तारियां भी की जा रही है। दरअसल इन अराजक तत्वों को शांतिपूर्ण जीवन रास नहीं आता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सख्त रूख इसका एक प्रमाण है। उनके पूर्ववर्ती 5 साल के कार्यकाल में एक सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ यही नहीं बीते कल हनुमान जयंती की शोभा यात्राओं के दौरान भी उत्तर प्रदेश से हिंसा की कोई खबर नहीं आई। अगर उत्तराखंड सरकार का रुख भी यूपी जैसा सख्त होता तो यहां भी वह सब देखने को नहीं मिलता जो देखा गया। परसों उत्तराखंड में जो कुछ हुआ वह पुलिस और प्रशासन की एक बड़ी असफलता है।

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