राजधानी देहरादून की कानून व्यवस्था का हाल इन दिनो बेहाल हो चुका है। यह बात हम नहींं आये दिन दून में होने वाली लगातार आपराधिक वारदातों से सामने आ रहा है। बीते कुछ दिनों में जहंा जिले में तीन महिलाओं सहित चार लोगों की हत्या हो चुकी है वहीं कई स्थानों पर धारदार हथियार से हमले सहित अन्य कई वारदातों की खबरे सामने आयी है। इसे देखकर ऐसा लगता है कि दून में आपराधिक तत्वों पर कानून व्यवस्था का कोई खौफ नहीं है जिस कारण वह कहीं भी आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने में हिचक नही रहे है। बात अगर दिन दहाड़े दून में की गयी हत्याओं की करे तो पिछले 10 दिनों में एक युवती सहित दो लोगो की सरेआम हत्या की घटनाआें को अंजाम दिया गया है। जिसमें से आज सुबह ही हत्यारों ने दिन निकलने के साथ ही राजधानी देहरादून में सरेआम गोली मारकर एक व्यक्ति की हत्या कर दी गयी। वहीं बीते रविवार को खुलेआम धारदार हथियारों से रायपुर क्षेत्र की अलग—अलग घटनाओं में दो युवको पर जानलेवा हमला किया गया है। जो इन दिनो अस्पताल में अपना उपचार करा रहे है। यह सब घटनाए यह बताने के लिए काफी है कि राजधानी में कानून व्यवस्था किस तरह से ध्वस्त हो चुकी है। कानून व्यवस्था ध्वस्त होने का इससे बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है कि विकासनगर क्षेत्र में हुई एक युवती की हत्या होने के कई दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस अभी तक उसके कथित हत्यारें चचेरे भाई को नहीं ढूंढ सकी हैै। चचेरे भाई को कथित हत्यारा इसलिए भी कहा जा रहा है कि क्या कहीं किसी अपराधी ने उसकी भी हत्या तो नहीं कर दी है? यह जांच का विषय है। जबकि मित्र पुलिस सिर्फ सर्विलांस के सहारे काम करती है। पुलिस का इस मामले में कहना है कि वह कथित हत्यारा चचेरा भाई मोबाइल इस्तेमाल नहीं करता था। पुलिस प्रशासन को अगर कानून व्यस्था को सही ढर्रे पर लाना है तो उसे सबसे पूर्व अपराधियों में कानून का खौफ बनाने की जरूरत है। नहीं तो इस तरह की घटनाए बढ़ना कोई बड़ी बात नहीं होगी। साथ ही अब राजधानी सहित पूरे राज्य में नशावर्ति पर भी ठीक ढंग से लगाम लगाने की जरूरत है। जिस कारण आपराधिक घटनाओं मे कमी आ सकेगी न कि सिर्फ कागजो में ही नशावर्ति रोके जाने की जरूरत है।




