May 19, 2026नैनीताल। पर्यटन नगरी नैनीताल में एक महिला पर्यटक की निजता भंग करने के मामले में न्यायालय ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। होटल के बाथरूम में महिला पर्यटक का वीडियो बनाने के आरोपित होटल कर्मचारी को न्यायालय ने दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में आरोपित को दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।सहायक अभियोजन अधिकारी शिवांजना शर्मा के अनुसार महिला पर्यटक ने मल्लीताल कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसने अपने पति के साथ 13 अगस्त से 15 अगस्त 2022 तक होटल अरोमा में कमरा बुक कराया था। उन्हें होटल में कमरा संख्या 310 दिया गया था। शिकायत में कहा गया कि 15 अगस्त की सुबह जब वह स्नान के बाद कपड़े पहन रही थीं, तभी उन्होंने देखा कि कोई व्यक्ति बाथरूम की खिड़की से मोबाइल फोन के माध्यम से उनकी रिकॉर्डिंग कर रहा है। महिला ने तत्काल शोर मचाकर अपने पति को बुलाया और होटल प्रबंधन को सूचना देने के साथ पुलिस को भी जानकारी दी। पुलिस जांच के दौरान होटल के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गये। जांच में होटल कर्मचारी राहुल कॉमन कॉरिडोर से बाहर निकलते हुए दिखाई दिया। फुटेज में यह भी देखा गया कि वह स्टाफ गैलरी के रास्ते बाथरूम की ओर गया और कुछ मिनट बाद तेजी से वापस लौटता दिखाई दिया। पुलिस ने जब आरोपित के मोबाइल फोन की जांच की तो उसमें रिकॉर्डिंग दिखाई नहीं दी। हालांकि अलग से पूछताछ के दौरान आरोपित ने मोबाइल से रिकॉर्डिंग करने की बात स्वीकार कर ली। इसके बाद मल्लीताल पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के अंतर्गत अभियोग दर्ज किया। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने अल्मोड़ा जनपद के लमगड़ा थाना क्षेत्र स्थित रतखान गांव निवासी राहुल कुमार के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। न्यायालय ने मामले का संज्ञान लेकर आरोपित को विचारण के लिए तलब किया। अभियोजन पक्ष की ओर से महिला पर्यटक, उनके पति, विवेचक उप निरीक्षक पूजा मेहरा सहित कुल नौ गवाह और दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किये गये। आरोपित ने स्वयं को निर्दाेष बताते हुए आरोपों से इनकार किया, लेकिन न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर उसे दोषी करार दिया। दोष सिद्ध होने के बाद आरोपित की ओर से न्यायालय में कहा गया कि यह उसका पहला अपराध है, उसका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य है। हालांकि न्यायालय ने महिला की निजता से जुड़े अपराध को गंभीर मानते हुए एक वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
May 19, 2026देहरादून। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान उपद्रव मचाने वाले तीन उपद्रवियों को गिरफ्तार कर उनको न्यायालय में पेश किया जहां से उनको न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।मिली जानकारी के अनुसार डिक्सन फैक्ट्री में श्रमिकों द्वारा अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा था, जिसमें श्रमिकों की आड़ में कुछ उपद्रवी लोगों द्वारा फैक्ट्री परिसर व पुलिस पर पथराव किया गया। जिसके संबंध में थाना सेलाकुई पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था, उक्त घटना में शामिल उपद्रवियों की गिरफ्तारी हेतु वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा थानाध्यक्ष सेलाकुई को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए। पुलिस टीम को सूचना प्राप्त हुई कि कुछ लोग संगठित होकर कम्पनियों व मोहल्लो में जाकर, कम्पनियों में कार्य करने वाले श्रमिकों को भड़काते हुए फैक्ट्री जाने वाले लोगो को काम में जाने से रोकने के लिए उनके साथ जोर जबरदस्ती कर मारपीट पर उतारु हो रहे है। उक्त व्यक्तियों में से कुछ पूर्व में पत्थरबाजी की घटना में भी शामिल थे। उक्त सूचना पर पुलिस बल तत्काल मौके पर पहुँचा, मौके पर कुछ व्यक्तियों द्वारा एकराय व संगठित होकर शान्ति एवं कानून व्यवस्था भंग करने का प्रयास किया जा रहा था, जो किसी प्रकार का संज्ञेय अपराध कारित कर सकते थे तथा पुनः पत्थर बाजी जैसी घटना व किसी अन्य प्रकार से लोक प्रशान्ति एवं कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न कर सकते थे, जिस पर पुलिस द्वारा मौके से 03 व्यक्तियों को ऑपरेशन प्रहार के अन्तर्गत धारा 170 बीएनएसएस में गिरफ्तार किया गया।पूछताछ में उन्होंने अपने नाम मौहम्मद फरमान पुत्र इकराम, निवासी ग्राम मुर्तजापुर, थाना बेहट जिला सहारनपुर (उ.प्र.) हाल —जमनपुर, सेलाकुई, रोहित पुत्र दुर्गा प्रसाद, निवासी कल्याणपुर चकरतीर्थ, थाना जहानाबाद, जिला पीलीभीत, उ.प्र., हाल जमनपुर, सेलाकुई, देहरादून, मनोज यादव पुत्र श्यामा यादव, निवासी नैनीडेनी थाना लारबाजार, जिला देवरिया उप्र, हाल बंजारागली, सेलाकुई, बताया।
May 19, 2026पहाड़ के गांवों, लोकगीतों और स्मृतियों में बसी थी कभी घुघुती चैत की उदासी और काफल पाको का अमर विरह और घुघुती घुघुती एक पक्षी नहीं, पहाड़ की संस्कृति और प्रकृति का प्रतीक मोबाइल टावर व कंक्रीट के बीच वजूद की लड़ रही है लड़ाई देहरादून। पहाड़ की मुंडेरों, बांज के जंगलों और खेतों की मेड़ों पर दिखने वाली यह घुघुती आज भी उत्तराखंड के ग्रामीण जनजीवन की धड़कन बनी हुई है। उत्तराखंड के लोक-जीवन, गीतों और संस्कृति में रचा-बसा घुघुती पक्षी केवल एक जीव नहीं, बल्कि पहाड़ के सीधेपन और एकांत का सबसे बड़ा प्रतीक है।स्थानीय लोग घुघुती को शुभ और अपनत्व का प्रतीक मानते हैं। लोक मान्यताओं में इसकी आवाज को घर-आंगन की रौनक से जोड़कर देखा जाता रहा है। उत्तराखंड के प्रसि( लोकगीत घुघुती ना बासा में भी इस पक्षी को बेटी, ममता और घर लौटने की भावना के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।पहाड़ के बुजुर्ग बताते हैं कि पहले गांवों में घुघुती की आवाज हर मौसम में सुनाई देती थी, लेकिन अब इसकी संख्या कम होती महसूस हो रही है। जंगलों में बदलाव, बढ़ता शहरीकरण, कंक्रीट के मकान और गांवों से पलायन ने इसके प्राकृतिक वातावरण को प्रभावित किया है।घुघुती केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि पहाड़ की स्मृतियों में बसने वाली वह आवाज है, जो लोगों को अपने गांव, बचपन और प्रकृति से जोड़ती है। आधुनिकता के इस दौर में जरूरत केवल विकास की नहीं, बल्कि उस प्राकृतिक विरासत को बचाने की भी है, जिसने सदियों से पहाड़ की पहचान बनाई है।अक्सर लोग घुघुती को एक अलग श्रेणी का पक्षी मानते हैं, लेकिन पक्षी वैज्ञानिकों के अनुसार यह पूरी तरह कबूतर वंश का हिस्सा है। आम कबूतरों की तुलना में घुघुती थोड़ी छोटी, पतली और अधिक सुडौल होती है। इसकी गर्दन पर काले और सफेद मोतियों जैसी चित्तियां होती हैं, जो इसे एक खूबसूरत कंठहार जैसा लुक देती हैं। सामान्य कबूतरों की तरह यह झुंड में हुड़दंग नहीं मचाती। घुघुती बेहद शर्मीली, भोली और शांत स्वभाव की होती है। यह अक्सर अकेले या अपने साथी के साथ ही दाना चुगते हुए दिखाई देती है।उत्तराखंड के सैकड़ों गांव आज पलायन के कारण खाली हो चुके हैं। इन भूतहा गांवों में जहां इंसानों के कदम पड़ने बंद हो गए हैं, वहां आज भी बुजुर्गों के अकेलेपन को पाटने का काम यह घुघुती ही कर रही है। दोपहर में जब यह घुघुती आकर मुंडेर पर बैठती है और अपनी भाषा में गाती है, तो लगता है कोई अपना हालचाल पूछ रहा है। यह हमारे दुखों की गवाह है। आज के कंक्रीट के बढ़ते जंगलों और मोबाइल टावरों के रेडिएशन के दौर में जहां शहरों से गौरैया और कबूतर गायब हो रहे हैं, वहीं पहाड़ की घुघुती अभी भी प्रकृति का संतुलन बनाए हुए है। काफल पाको, मैल न चाखोपहाड़ की लोककथाओं में घुघुती को एक बेटी का रूप माना गया है। चौत-बैशाख के महीने में जब जंगलों में काफल के लाल फल पकते हैं, तो घुघुती की आवाज बदलकर काफल पाको, मैल न चाखो पक गए, पर मैंने नहीं चखे जैसी सुनाई देती है। यह एक मां-बेटी की उस बेबसी की कहानी है, जिसमें एक निर्दाेष बेटी मां के गुस्से का शिकार होकर पक्षी बन गई थी। तब से यह पक्षी पहाड़ की बेटियों के मायके के प्रति प्रेम और विरह का संदेशवाहक बन गया है।
May 19, 2026पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी का 91 वर्ष की आयु में दून में निधन लंबे समय से थे बीमार, देहरादून स्थित मैक्स अस्पताल में ली खंडूड़ी ने अंतिम सांस सैन्य जीवन से लेकर राजनीति तक बेदाग छवि, अनुशासन के लिए जाने गए जनरल सैन्य अनुशासन से चलाई सरकार, भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाया था जीरो टालरेंस मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ीजन्म-1 अक्टूबर 1934 देहरादूनमृत्यु-19 मई 2026 देहरादूनपैतृक गांव- मरगदना गांव पौड़ी गढ़वाल उत्तराखंड देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति का एक स्वर्णिम अध्याय आज शांत हो गया। खंडूड़ी है जरूरी के नारे से जन-जन के हृदय में बसने वाले, पूर्व मुख्यमंत्री और सेना के जांबाज मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी अब हमारे बीच नहीं रहे। लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे खंडूड़ी ने आज सुबह देहरादून के मैक्स अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित देश और राज्य के तमाम दिग्गज नेताओं ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे एक युग का अंत बताया है।पौड़ी गढ़वाल की मिट्टी से निकला वह सख्त सैन्य अधिकारी, जिसने राजनीति में भी अनुशासन को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया, आज पहाड़ की स्मृतियों में अमर हो गया। सेना की वर्दी से लेकर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक, खंडूड़ी का व्यक्तित्व हमेशा बेदाग छवि और कठोर प्रशासनिक फैसलों के लिए जाना गया। लोग उन्हें सिर्फ नेता नहीं, बल्कि ईमानदार पहाड़ी जनरल के रूप में याद करते रहे। पौड़ी गढ़वाल के मरगदना गांव में जन्में जनरल खंडूड़ी का जन्म 1 अक्टूबर 1934 में हुआ था। शिक्षा देहरादून और अन्य स्थानों पर हुई और आज उन्होंने अंतिम सांस ली।बता दें कि जनरल खंडूड़ी ने 1954 से 1991 तक सेना में अपनी सेवाएं देने के बाद जब उन्होंने राजनीति की ऊबड़-खाबड़ जमीन पर कदम रखा तो उनके पास केवल एक ही अस्त्र था अडिग अनुशासन। चाहे केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में सड़क परिवहन मंत्री के रूप में स्वर्णिम चतुर्भुज योजना को रफ्तार देनी हो या उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में भ्रष्टाचार पर लगाम लगानी हो, उन्होंने कभी सि(ांतों से समझौता नहीं किया।उत्तराखंड राज्य बनने के बाद जब राजनीति में भ्रष्टाचार, गुटबाजी और सत्ता संघर्ष की चर्चाएं तेज थीं, तब खंडूड़ी एक ऐसे चेहरे के रूप में उभरे जिन्होंने शासन में पारदर्शिता और सादगी की बात की। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने सड़क, सेना और सीमांत क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता दी। पहाड़ के दूरस्थ गांवों तक सड़क पहुंचाने का उनका सपना आज भी कई लोगों की जुबान पर है।उनकी राजनीतिक शैली भले ही कठोर मानी जाती रही हो, लेकिन पहाड़ का आम आदमी उन्हें भरोसे के प्रतीक के रूप में देखता था। गांवों की चौपालों में अक्सर यह कहा जाता थाकृखंडूड़ी जैसा नेता अब कहां। शायद यही वजह रही कि सत्ता से दूर होने के बाद भी उनके प्रति सम्मान कभी कम नहीं हुआ।मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने प्रदेश को लोकायुक्त बिल जैसा सख्त कानून देने का साहस दिखाया। वह अक्सर कहते थे कि पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी पहाड़ के काम आनी चाहिए। उनकी कार्यशैली में सेना जैसी स्पष्टता थीकृफाइलें रुकती नहीं थीं और भ्रष्टाचार करने वालों के लिए उनके दरबार में कोई जगह नहीं थी। उनकी सादगी का आलम यह था कि मुख्यमंत्री रहते हुए भी वह प्रोटोकाल की तामझाम से दूर रहना पसंद करते थे।उनके निधन के साथ उत्तराखंड की राजनीति का वह दौर भी मानो विदा हो गया, जिसमें सि(ांत और सादगी अब भी जिंदा दिखाई देती थी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत कई नेताओं ने उनके निधन पर गहरा शोक जताया और उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया। राष्ट्र प्रथम, फिर प्रदेश और अंत में स्वयंउनके दौर में लाल बत्ती का मोह त्यागने और नौकरशाही पर नकेल कसने की कई कहानियां आज भी सचिवालय की गलियों में सुनी जाती हैं। उनके लिए राष्ट्र प्रथम, फिर प्रदेश और अंत में स्वयं का मंत्र सिर्फ कहने के लिए नहीं, बल्कि जीने के लिए था। मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी ईमानदारी की विरासत और साफ-सुथरी राजनीति का उनका विजन आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा एक मशाल का काम करेगा। जनरल खंडूड़ी एक नजर1954 में कमीशन प्राप्त किया और 1971 के यु( में महत्वपूर्ण भूमिकाआर्मी में रहते हुए अति विशिष्ट सेवा पदक से उन्हें किया गया सम्मानित1991 में पहली बार सांसद बने और वाजपेयी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे2007-2009 और 2011-2012 के बीच दो बार प्रदेश की कमान संभालीभ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस और सशक्त लोकायुक्त कानून के प्रणेता
May 19, 2026नैनीताल। उत्तराखंड के प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की कालागढ़ रेंज में गश्त के दौरान वनकर्मियों को एक नर बाघ मृत अवस्था में मिला। बाघ का शव धारा बीच क्षेत्र में धारा सोक के किनारे पड़ा मिला, जिसके बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर वन विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।कॉर्बेट पार्क के निदेशक डॉ. साकेत बडोला के निर्देश पर उपनिदेशक राहुल मिश्रा, पार्क वार्डन बिंदर पाल सिंह और वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्साधिकारी डॉ. दुश्यंत शर्मा अपनी टीम के साथ घटनास्थल पहुंचे। अधिकारियों की मौजूदगी में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की गाइडलाइन के अनुसार कार्रवाई की गई।वन विभाग के अनुसार मृत बाघ की उम्र करीब 8 से 10 वर्ष के बीच आंकी गई है। प्रारंभिक जांच में मामला प्राकृतिक मौत का प्रतीत हो रहा है, क्योंकि बाघ के शरीर के सभी अंग सुरक्षित पाए गए हैं और किसी प्रकार के शिकार या संघर्ष के स्पष्ट निशान नहीं मिले हैं। वन विभाग ने वरिष्ठ चिकित्सकों की निगरानी में बाघ का पोस्टमार्टम कराया है। आवश्यक सैंपल लेकर उन्हें भारतीय वन्यजीव संस्थान भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। घटना के बाद क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी गई है और विभाग पूरे मामले की विस्तृत जांच में जुटा हुआ है।
May 19, 2026हरिद्वार। सड़क हादसे में आज सुबह एक तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आकर एक बुर्जुग की मौत हो गयी, बुर्जुग मस्जिद जा रहे थे। हादसे के बाद क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए।घटना ज्वालापुर क्षेत्र की है। जानकारी के अनुसार अंसारी मार्किट स्थित हुसैनिया मस्जिद में खिदमत करने वाले नूर मोहम्मद उर्फ नूरा रोज की तरह सुबह मस्जिद जा रहे थे। इसी दौरान अंदरूनी बाजार में पहुंचे एक तेज रफ्तार ट्रक ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। हादसा इतना भीषण था कि बुजुर्ग ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना की सूचना मिलते ही ज्वालापुर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुरू की। हादसे के बाद मृतक के परिजनों में कोहराम मच गया, वहीं पूरे इलाके में मातम का माहौल है। चौकी प्रभारी रेल समीप पांडेय ने बताया कि ट्रक चालक की पहचान कर ली गई है। चालक पीलीभीत का निवासी है और गूगल मैप के सहारे चलते हुए गलती से अंदर बाजार में पहुंच गया था। पुलिस के मुताबिक परिजनों की तहरीर मिलने के बाद मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।