बड़े खतरे से लापरवाह लोग

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कोरोना महामारी ने देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था को बुरी तरह से तहस—नहस करके रख दिया है। बीते डेढ़ साल में कोरोना की दो लहरों के दौरान तमाम तरह के संकट झेलने के बावजूद हम आज भी जिस तरह से लापरवाह बने हुए हैं वह न सिर्फ हैरान करने वाला है अपितु अत्यंत ही चिंताजनक है। दूसरी लहर के प्रभावहीन होते ही जैसे ही कोविड प्रतिबंधों में जरा सी ढील मिली नहीं कि हमारी लापरवाहियंा फिर से चरम पर पहुंच गई है। सड़कों व बाजारों से लेकर कोविड टीकाकरण सैंटरो तक बस भीड़ ही भीड़ उमड़ रही है। खास बात यह है कि इस भीड़ द्वारा न तो मास्क को जरूरी समझा जा रहा है और न सोशल डिस्टेंसिंग को कोई तवज्जो दी जा रही है। यह सब तब हो रहा है जब तमाम डॉक्टर और विशेषज्ञ गला फाड़ फाड़ कर दिन रात संभावित इसी लहर के खतरे से लोगों को सतर्क कर रहे हैं। बीते 1 सप्ताह से लगातार यह कहा जा रहा है कि कोरोना की तीसरी लहर 4 से 6 सप्ताह के बाद आने वाली है तथा इस बार कोरोना के जिस वेरिएंट डेल्टा प्लस के प्रभावी होने का खतरा है वह अब तक के सभी कोरोना वैरीयंट से कई गुना अधिक घातक है लेकिन इसके बावजूद भी लोग किसी तरह की सतर्कता बरतने को तैयार नहीं है। खास बात यह है कि इसका असर अभी से दिखना शुरू हो गया है। देश में कोरोना संक्रमण के मामले फिर बढ़ना शुरू हो गए हैं बीते 3 दिनों से हर रोज नए केस बढ़ रहे हैं और अब यह संख्या 50000 के पास पहुंच चुकी है। दूसरी लहर के दौरान हमने देखा कि संक्रमण के मामलों में किस तरह गुणात्मक वृद्धि हुई थी। यह संख्या कब एक लाख तक पहुंच जाएगी और कब एक से दो और दो से चार लाख हो जाएगी इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकेगा। तीसरी लहर को रोकने और उसके प्रभाव को कम करने के लिए सरकारी स्तर में टीकाकरण अभियान तेजी से चलाया जा रहा है। लेकिन जिस तरह के हालात बनते दिख रहे हैं देश की एक चौथाई आबादी को टीका लगने से पहले ही तीसरी लहर आने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है। देश के कुछ राज्य जिसमें महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश आदि शामिल है कोरोना के नए केस तेजी से बढ़ रहे हैं। पूर्व में भी इन्हीं राज्यों से दूसरी लहर की शुरुआत हुई थी। अभी दूसरी लहर पूरी तरह से थमी भी नहीं थी कि तीसरी लहर की आहट मिलने लगी है जो चिंता का विषय है। दिल्ली में नियमों में ढील देते ही बाजारों में नियमों के उल्लंघन पर कुछ बाजारों को फिर से 1 सप्ताह के लिए बंद करना पड़ा है। सवाल यह है कि क्या सारी जिम्मेवारी सरकारों की है आम नागरिकों की कोई जिम्मेवारी नहीं है? लोगों की लापरवाही से तो यही लगता है। अगर लोगों ने यह मान लिया है कि सारी जिम्मेवारी सरकारों की है या कोरोना खत्म हो चुका है अब किसी भी एहतियात की जरूरत नहीं है तो उन्हें फिर एक बड़ी मुसीबत झेलने के लिए तैयार हो जाना चाहिए।

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