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हर तरफ नफरत की आग

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इन दिनों देश की राजनीति से लेकर सामाजिक स्थितियों तक हर तरफ एक अकुलाहट और बेचैनी सी दिखाई पड़ रही है। जो कुछ भी आम आदमी महसूस कर रहा है वह बेसबब नहीं है। बीते एक दशक में बहुत कुछ ऐसा हुआ है जिसके कारण इस तरह के हालात पैदा हुए हैं। अभी अगर उत्तराखंड की बात करें तो हमने चमोली के कर्णप्रयाग में हेमकुंड साहिब से लौट रहे कुछ श्रद्धालुओं व स्थानीय लोगों के बीच एक मामूली सी बात को लेकर विवाद हुआ और सड़क पर देखते ही देखते तलवारे, लाठी—डंडे और पत्थर चलने लगे। पुलिस प्रशासन को हालात काबू में करने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी पांच लोगों के घायल होने और विवाद को लेकर स्थानीय लोगों का गुस्सा अभी भी थमता नहीं दिख रहा है। लोग सड़कों पर ट्टबोल पहाड़ी हल्ला बोल’ के नारे लगा रहे हैं उधर सिख समुदाय के लोगों में भी भारी आक्रोश है वह भी ट्टवाहेगुरु का खालसा वाहेगुरु की फतेह’ के साथ श्रद्धालुओं के साथ किसी भी तरह की बदसलूकी को बर्दाश्त न करने की बात कह रहे हैं चार दिन पूर्व की इस घटना को लेकर तलवारबाजी करने के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई से वह नाराज हैं। कहने का आशय यह है कि एक बार फिर इसे लेकर विवाद बढ़ता दिख रहा है। इससे पूर्व भी अभी हमने हरिद्वार में कुछ हरियाणा के पर्यटकों द्वारा रास्ते चलते मां—बेटी पर कुछ कमेंट किए जाने पर विवाद होता देखा गया। इसके बाद स्थानीय लोगों ने हरियाणा के युवकों को सड़क पर बुरी तरह से पीट डाला था। जब कि वह महिला भी जिसके कारण विवाद हुआ था वह भी आरोपियों के साथ मारपीट न करने की गुहार लगाते दिखी। मगर भीड़ तो भीड़ है उसे कोई रोक पाता तब तक वह हो चुका था जो नहीं होना चाहिए था। इस मामले को लेकर विवाद इस कदर बड़ा कि मामला दो राज्यों के बीच का बन गया। हरियाणा की खाफ पंचायत से लेकर तमाम संगठनों ने एकजुट होकर उत्तराखंड के लोगों को हरियाणा में न घुसने देने जैसी बातें कही जाने लगी। सवाल यह है कि इस तरह के विवादों का यदि असर इतना व्यापक हो सकता है कि दो राज्यों के लोगों की अस्मिता का सवाल ऐसे विवाद बन जाएं तो क्या इस तरह के हालात किसी भी राज्य के लिए अच्छे कहे जा सकते हैं? दरअसल बीते एक दशक से देश भर में जो हिंदू मुस्लिम की राजनीति हो रही है उसने हालत इतने खराब कर दिए हैं कि इस कारण कोई भी किसी अन्य जाति धर्म और क्षेत्र के लोगों को बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है। चार धाम यात्रा को देख सकते हैं जिसमें किसी भी गैर हिंदू के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की बात हो रही है। मुद्दा चाहे कुछ भी हो लेकिन उससे तुरंत ही धर्म और जाति तथा संप्रदाय के चश्मे से देखा जाने लगता है। उत्तराखंड और पंजाब तथा उत्तराखंड और हरियाणा के बीच का विवाद जो सिर्फ कुछ श्रद्धालुओं के बीच का विवाद था तथा जिसे आसानी से खत्म किया जा सकता था उसे बड़ा विवाद बना दिया गया। दोषी कौन है तथा उसने क्या अपराध किया है यह बात गौण हो चुकी है। दरअसल बीते एक दशक में सर तन से जुदा, और बटोगे तो कटोगे जैसे उन्मादी नारों को देश के नेताओं द्वारा ही ईजाद किया गया है ऐसी स्थिति में हम वही फसल काटेंगे जो हमने बोई है। देश और समाज को इससे क्या हासिल हो रहा है या होगा? यह एक चिंतनीय सवाल है।

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