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‘हरदा’ की पालिटिक्स की ‘पाठशाला’

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  • चुनाव से पहले चर्चा में रहना है तो वह ‘हरदा’ से सीखें
  • ‘हरदा’ की पाठशाला में पढ़ा नेता अभी फेल नहीं होता
  • कांग्रेसियों के साथ-साथ अन्य दलों के नेता भी दीवाने

देहरादून। राजनेताओं के लिए ‘हरदा’ राजनीति की पाठशाला के रूप में माना जा सकता है। चुनाव से पहले चर्चा में रहना है तो वह ‘हरदा’ से सीखें। राजनीति के हर रंग में कैसे रंगना है यह हरीश रावत अच्छी तरह से जानते है। चुनावी साल में तो उनकी भूमिका ओर भी महत्वपूर्ण हो जाती है और वह इसका भी फायदा लेना जानते है। इसीलिए ‘हरदा’ की पाठशाला में पढ़ा नेता अभी फेल नहीं होता है। ‘हरदा’ की पालिटिक्स पर कांग्रेसियों के साथ-साथ कई अन्य भी दीवाने है।
बता दें कि उत्तराखंड की राजनीति में सिर्फ और सिर्फ हरीश रावत की चर्चा चल रही थी। दरअसल हरीश रावत जानते हैं कि चर्चा में कैसे रहना है। यह उनका आज का नहीं बल्कि पुराना रिकार्ड है कि वह जब चाहे तब चर्चा में रह सकते है। इस बार भी उन्होंने राजनैतिक अवकाश के बहाने एक नई बहस शुरू करने के साथ ही सभी को अपनी ओर खींच लिया और वह खुद चर्चा के केंद्र में आ गए।
राजनीति विशेषज्ञों की माने तो हरीश रावत ने यह कदम सोच-समझकर उठाया था। इस दौरान कांग्रेस ज्वाइन करने वाले नेताओं की चर्चा तो बैकग्राउंड में चली गई, लेकिन 15 दिन के राजनीतिक अवकाश पर गए हरीश रावत दिन-रात चर्चा में रहे। इस दौरान हरीश रावत ने अपनी राजनीतिक ताकत का उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस के बड़े नेताओं को असहसास करा दिया।
सूत्र बताते है कि हरीश रावत अपने 15 दिन के राजनीतिक अवकाश से लौट आए हैं। कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा पांच दिन के उत्तराखंड दौरे पर हैं। आज से उत्तराखंड का राजनीतिक परिदृश्य बदलेगा।

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