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सरकार 8 हफ्ते में करें लोकायुक्त की नियुक्ति : हाईकोर्ट

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2013 से खाली पड़ा है लोकायुक्त का पद
सरकार हर साल कर रही है दो से तीन करोड़ खर्च
हाईकोर्ट ने लगाई लोकायुक्त खर्च पर रोक

नैनीताल। नैनीताल हाईकोर्ट ने आज एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को 8 हफ्ते में लोकायुक्त की नियुक्ति करने के निर्देश दिए हैं वही लोकायुक्त पर किए जा रहे खर्च पर भी तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
हाईकोर्ट में हल्द्वानी के रविशंकर जोशी द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया गया है। याचिकाकर्ता द्वारा राज्य में भ्रष्टाचार के कुछ मामलों का उदाहरण देते हुए राज्य के लोकायुक्त की निष्क्रियता पर सवाल उठाए गए थे। याचिकाकर्ता का कहना था कि राज्य में 2013 से लोकायुक्त पद पर किसी की तैनाती नहीं हुई है और सरकार लोकायुक्त पर हर साल 2 से 3 करोड़ रूपये खर्च कर रही है जिसका कोई औचित्य नहीं है। उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट द्वारा इससे पूर्व हुई सुनवाई में सरकार से पूछा गया था कि उसने अब तक लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए क्या किया है तथा लोकायुक्त के गठन से लेकर अब तक लोकायुक्त पर सरकार द्वारा कितना खर्च किया गया है।
सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार लोकायुक्त को 36 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं जिसमें से 29 करोड़ रूपये खर्च किया जा चुका है लोकायुक्त में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या 24 बताई गई है लेकिन इसके साथ यह भी कहा गया है कि यह कर्मचारी दूसरे अन्य विभागों में भी काम कर रहे हैं हाई कोर्ट द्वारा अब इन कर्मचारियों की सूची और जिन विभागों में वह काम कर रहे हैं उसकी जानकारी भी मांगी गई है। अदालत द्वारा सरकार से साफ—साफ पूछा गया है कि जब लोकायुक्त में कोई काम ही नहीं हो रहा है तो इस लोकायुक्त कार्यालय पर इतना खर्च क्यों किया जा रहा है। कोर्ट द्वारा लोकायुक्त गठन से लेकर 31 मार्च 2023 तक के खर्च का ब्यौरा भी मांगा गया है।
यहां यह उल्लेखनीय है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार द्वारा अन्ना हजारे के आंदोलन से प्रेरित होकर राज्य में लोकायुक्त गठन का पहला प्रयास किया गया तथा राज्यपाल सुरजीत सिंह ने एस एच ए रजा को राज्य का पहला लोकायुक्त नियुक्त किया गया था इसका कार्यकाल 2008 में समाप्त होने पर एमएम घिल्डियाल को राज्य का दूसरा लोकायुक्त नियुक्त किया गया। लेकिन 2013 में उनके पद छोड़ने के बाद से लेकर अभी तक राज्य में लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं होने से लोकायुक्त पद निष्क्रिय पड़ा है। दफ्तर में ताले लटके रहते हैं और कर्मचारी वेतन लेते रहते हैं। जबकि राज्य में इस बीच एनएच—74 और खनन तथा मेडिकल जैसे कई बड़े घोटाले सामने आते रहे हैं।

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