सत्ता में बैठे नेता जो करें वह सब सही बाकी कोई कुछ भी कहे या करें सब गलत। उत्तराखंड की सियासत को लेकर यह बात एक मुहावरे की तरह प्रचलित रही है न खाता न बही वह जो कहे बस वही सही। यह नेता कब प्रदेश को भ्रष्टाचार मुक्त घोषित कर दें और कब देश को विकसित राष्ट्र घोषित कर दें उन्हें कोई चुनौती नहीं दी जा सकती। तत्कालीन पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत जब लोकायुक्त का गठन करने में असफल हो गए तो उन्होंने राज्य को भ्रष्टाचार मुक्त घोषित कर दिया था। उनका कहना था कि जब राज्य से भ्रष्टाचार समाप्त हो गया तो लोकायुक्त की अब क्या जरूरत है। सीएम पुष्कर सिंह धामी को अभी कुछ सामाजिक संगठनों द्वारा भ्रष्टाचार मुक्त राज्य बनाने के लिए सम्मानित किया गया। एन वक्त पर इस बैनर को बदल दिया गया और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात लिखवाई गई। शायद किसी को भी यह याद आ गया हो कि प्रदेश तो त्रिवेंद्र सिंह के कार्यकाल में ही भ्रष्टाचार मुक्त हो चुका है। अभी बीते दिनों उत्तराखंड में राष्ट्रीय खेलों का आयोजन कराया गया था। जिसमें राज्य के खिलाड़ियों ने पदक सूची में ऐसी लंबी छलांग लगाई थी कि सभी हैरान रह गए थे लेकिन अब इन खेलों के आयोजन में करोड़ों रुपया पानी में बहा दिए जाने की खबरें भी चर्चाओं के केंद्र में है। राज्य में इन खेलों के लिए बनाए गए साइकलिंग ट्रेक पर जगह—जगह बड़ी—बड़ी दरारें इसमें हुए भ्रष्टाचार की कलई खोल रही है। जल जीवन मिशन से लेकर शराब की ओवर रेटिंग और राज्य में लगाये जा रहे बिजली के स्मार्ट मीटरो तक में भ्रष्टाचार की खबरें अखबारों की सुर्खियों में है। ऊर्जा विभाग के इंजीनियर द्वारा अपनी पत्नी के नाम से कंपनी बनाने और उसे मीटर लगाने का ठेका दिलाने के बड़े मामले मेंं अब जांच की बात कही जा रही है। धामी सरकार के कुछ मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं लेकिन उनकी जांच के नाम पर मुख्यमंत्री और सरकार ने खामोशी ओढ़ रखी है। एक खास बात यह है कि इन मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए प्रदेश में कालनेमि जैसे अजब गजब कार्यक्रम लॉन्च किया जा रहे हैं। भगवा वेषधारी साधुओं में कौन कालनेमि है इसकी पहचान करने का कोई मापदंड न पुलिस के पास है जो इन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर रही है और न ही उनके खिलाफ कार्यवाही की कानूनी कोई व्यवस्था जिसके आधार पर उन्हें जेल भेजा जा सके अब हो यह रहा है कि आस्था की आड़ में ठगी और तंत्र—मंत्र का आरोप लगाकर गिरफ्तार किये जा रहे हैं यह कालनेमि तथा कथित बाबाओं को सुबह गिरफ्तार किया जाता है और शाम को उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया जाता है। मठ और मंदिरों में बैठे बड़े—बड़े नामी गिरामी वह बाबा जो भूत—प्रेत भगाने से लेकर लोगों को उनकी समस्या पर्ची पर बिना बताए लिखने वाले और लंबी—लंबी कारों में चलने वाले बाबाओ के पास धन कहां से बरस रहा है इसकी जांच कराने या फिर उनके खिलाफ कार्रवाई करने का साहस न तो सत्ता में बैठे लोगों के पास है और न ही पुलिस के पास। पूरा तंत्र उनके चरणों में नतमस्तक है क्योंकि उनके अनुयायियों की एक फौज वोट बैंक के रूप में उनके पीछे खड़ी है। ऐसे बाबा चाहे किसी भी धर्म से ताल्लुक रखते हो उन पर कोई कार्यवाही नहीं की जा सकती है और जो गरीब गुरबा साधु संत तथा भीख मांग कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं उनको कालनेमि बताया जा रहा है। अब सरकार के इस कालनेमि अभियान की चारों तरफ खूब चर्चा हो रही है तथा यह एक तमाशा बन गया है।




