देहरादून। बसंत विहार क्षेत्र के कांवली माड़ी इलाके में घर—घर जाकर ईसाई धर्म का प्रचार करने और कथित तौर पर प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने का मामला सामने आया है। स्थानीय निवासियों और वीर सावरकर संगठन के पदाधिकारियों ने इस गतिविधि के खिलाफ बसंत विहार पुलिस को तहरीर सौंपी गयी है।
पुलिस को दी गयी तहरीर के अनुसार सीतापुरी (निवासी बनियावाला) और सुमित्रा (निवासी कांवली गांव) नाम की दो महिलाएं कांवली माड़ी क्षेत्र में सक्रिय थीं। आरोप है कि वे स्थानीय हिंदू महिलाओं को ईसाई धर्म अपनाने के फायदे बताते हुए प्रलोभन दे रही थीं। स्थानीय निवासी दीपक कुमार ने इसकी सूचना वीर सावरकर संगठन के कार्यकर्ता इंद्रजीत को दी। इसके बाद संगठन के सदस्य मौके पर पहुंचे, जहां दोनों महिलाएं लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के लाभ बता रही थीं। स्थानीय लोगों ने तुरंत 112 पर कॉल करके पुलिस को सूचित किया। पुलिस की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक दोनों महिलाएं वहां से चली गई थीं। बाद में पुलिस ने विकास मॉल क्षेत्र से दोनों महिलाओं को हिरासत में लेकर बसंत विहार थाने पहुंचाया। वीर सावरकर संगठन के संस्थापक अध्यक्ष कुलदीप स्वेडिया ने अपनी तहरीर में मांग की है कि दोनों महिलाओं के खिलाफ उत्तराखंड फ्रीडम ऑफ रिलिजन एक्ट (धर्म स्वतंत्रता कानून) के तहत सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रचार से समाज में अशांति फैल सकती है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कड़ी कानूनी कार्रवाई जरूरी है। उत्तराखंड सरकार ने जबरन या प्रलोभन वाले धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए सख्त कानून लागू किया हुआ है। वर्तमान प्रावधानों के अनुसार, प्रलोभन, धोखाधड़ी या जबरदस्ती से धर्मांतरण कराने पर 3 से 10 वर्ष तक की सजा और न्यूनतम 50,000 रुपये का जुर्माना हो सकता है। यदि मामले में महिला, नाबालिग, अनुसूचित जाति/जनजाति या दिव्यांग व्यक्ति शामिल हो तो सजा 5 से 14 वर्ष तक बढ़ सकती है। बड़े पैमाने पर या विदेशी फंडिंग से जुड़े मामलों में सजा और भी कड़ी है। पुलिस ने दोनों महिलाओं को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। बसंत विहार थाना प्रभारी शेंकी कुमार ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। सभी पक्षों से बयान दर्ज करने और सबूतों की जांच के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।




