Home News Posts उत्तराखंड पहाड़ के गांव की सरहद पर ‘अदृष्य प्रहरी’

पहाड़ के गांव की सरहद पर ‘अदृष्य प्रहरी’

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  • देवभूमि उत्तराखंड के कण-कण में माना जाता है देवताओं का वास
    यहाँ की सबसे अनूठी परंपरा है क्षेत्रपाल या भूमिपाल की अवधारणा
  • पहाड़ के हर गांव में क्षेत्र रक्षक के रूप में करते हैं क्षेत्रपाल देवता वास

देहरादून। गांव में स्थित किसी पुराने पेड़ के नीचे, पत्थरों से बना एक छोटा सा मंदिर, जहां लोहे के त्रिशूल, घंटियां और पत्थर की मूर्तियां क्षेत्रपाल देवता के मंदिर में होती हैं। पहाड़ के हर गांव की सरहद पर एक ऐसा रक्षक देवता विराजमान होता है। यह देवता सिर्फ पूजा के प्रतीक नहीं, बल्कि क्षेत्र के रक्षक, मार्गदर्शक और न्याय के प्रतीक माने जाते हैं।
पहाड़ की परंपरा के अनुसार हर गांव की अपनी एक निश्चित सीमा होती है। इस सीमा की रक्षा का उत्तरदायित्व क्षेत्र रक्षक देवता का होता है। मान्यता है कि जब गांव के लोग सो जाते हैं, तब देवता अपने दिव्य घोड़े पर सवार होकर हाथ में मशाल लेकर गांव की सरहदों का चक्कर लगाते हैं और हिंसक पशुओं व बुरी आत्माओं से गांव की रक्षा करते हैं। गांव में कोई भी शुभ कार्य होकृचाहे शादी-ब्याह हो, जनेऊ संस्कार हो या नई फसल की कटाईकृसबसे पहले क्षेत्रपाल को याद किया जाता है।
क्षेत्रपाल देवताओं के मंदिर आलीशान नहीं होते। अक्सर किसी विशाल पीपल या बांज के पेड़ के नीचे, पत्थरों से बना एक छोटा सा थान होता है। वहां लोहे के त्रिशूल, घंटियां और पत्थर की मूर्तियां स्थापित होती हैं। यह सादगी इस बात का प्रतीक है कि देवता प्रकृति के कितने करीब हैं और हर ग्रामीण के लिए सुलभ हैं। पहाड़ के लोग कानून से ज्यादा अपने ग्राम देवता और क्षेत्रपाल से डरते हैं। यह विश्वास गांव में अनुशासन और नैतिकता बनाए रखने का काम करता है। ऐसी मान्यता है कि यदि गांव में कोई चोरी होती है या आपसी विवाद सुलझ नहीं पाता, तो क्षेत्रपाल के थान पर न्याय की गुहार लगाई जाती है।
आधुनिक युग में भी पहाड़ की यह परंपरा अटूट है। यह विज्ञान के लिए कौतूहल हो सकता है, लेकिन एक पहाड़ी के लिए यह उसकी आस्था और पहचान है। यह क्षेत्र रक्षक देवता केवल पत्थर की मूर्तियां नहीं, बल्कि हिमालयी संस्कृति के वह प्रहरी हैं, जिन्होंने सदियों से इन दुर्गम गांवों को जीवंत बनाए रखा है। आज भले ही युवा रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन कर रहे हों, लेकिन अपने गांव और क्षेत्र देवता के प्रति उनकी आस्था आज भी कायम है।

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