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चौथी बार ममता सरकार

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पश्चिम बंगाल में किसकी सरकार? इस सवाल का जवाब जहां तमाम एग्जिट पोल एजेंसियां और टीवी चैनलों के पत्रकार मतदान संपन्न होने के बाद से जुटे हुए हैं वहीं इस बीच खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपना 9 मिनट का ऑडियो जारी कर सभी एग्जिट पोल नतीजो को गलत बताते हुए कहा है कि इस बार टीएमसी को 224 सीटों पर जीत मिलने जा रही है। और वह चौथी बार सरकार बनाएंगे। इस घोषणा से पूर्व उन्होंने अपनी पार्टी के तमाम बड़े नेताओं के साथ बैठक की और एक—एक सीट की गहन समीक्षा की। यहां यह उल्लेखनीय बात है कि जिन सात एजेंसियों के एग्जिट पोल के नतीजे सामने आए हैं उनमें से सिर्फ दो को छोड़कर पांच ने भाजपा की सरकार बनने की बात कही गई है। लेकिन खास बात यह है कि सभी ने ममता की टीएमसी को बहुमत से 10 20 सीटे ही पीछे दिखाया है और भाजपा को बहुमत से 10—20 सीटें आगे या बहुमत के बिल्कुल करीब लाकर खड़ा किया है। टीएमसी को 100 से ऊपर तथा 140 सीटों तक हासिल करने का दावा करने वाले इस आकलन को इसलिए भी सही नहीं माना जा सकता है क्योंकि एग्जिट हमेशा गलत तो साबित होते ही रहे हैं उनमें 15—20 प्रतिशत तक ऊपर नीचे होना स्वाभाविक है जिनके बारे में यह कह दिया जाता है कि यह अनुमान ही तो था। जो एक सही बात भी है। असली नतीजे तो 4 मई को ही आएंगे। ममता बनर्जी का आरोप यह भी है कि यह एग्जिट पोल सरकार द्वारा प्रायोजित है। उन्होंने अपनी पार्टी कार्यकर्ताओं को यह भी कहा है कि वह इनसे प्रभावित न हो न उन्हें निराश होने की जरूरत है इसके पीछे भाजपा की नियत चुनाव परिणाम या फिर गिनती में धांधली करने का खेल भी हो सकता है इसलिए सड़कों पर निकले तथा मशीनों की सुरक्षा पर नजर बनाकर रखें। भले ही इस दौर में पांच राज्यों में चुनाव हुए हैं लेकिन पश्चिम बंगाल के चुनाव पर पूरे देश की नजरें लगी हुई हैं। अगर इस चुनाव में ममता हार जाती है तब भी और बीजेपी हारती है तब भी देश की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत होना तय माना जा रहा है। जिस तरह केंद्र की भाजपा सरकार ने ममता की सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की और पूरे राज्य को छावनी में तब्दील कर दिया गया और पूरे राज्य के प्रशासनिक अमले को बदल दिया गया और गृहमंत्री अमित शाह द्वारा टीएमसी कार्यकर्ताओं को गुंडा कहते हुए उन्हें उल्टा लटका कर सीधा करने की धमकी दी गई वह किसी भी चुनाव में किए जाने वाला पहला प्रयोग है। इस चुनाव में अगर भाजपा का यह प्रयोग सफल हो जाता है तो आने वाले समय में सभी राज्यों को इसी तरह संगीनों के साए में मतदान करने के लिए तैयार रहना होगा जहां दूसरे राज्यों के पुलिस अधिकारी सूबे की पुलिस जनता तथा उम्मीदवारों को धमकाते दिखेंगे। बंदूक की नोक पर कैसे चुनाव जीता जाता है भाजपा इसकी शुरुआत बंगाल से कर सकती है लेकिन ममता अगर इसका मुकाबला करने में सफल हो जाती है तो भाजपा की जीत की गारंटी पर भी विराम लगना लाजमी है और यह भाजपा के अजेय समझे जाने वाले विजय रथ को रोकने की शुरुआत ही होगी। इन सभी पांच राज्यों के नतीजे 4 मईं को आ जाएंगे। भले ही एग्जिट पोल के नतीजे कुछ भी दिखा रहे हो असली नतीजे ही बताएंगे कि मोदी का मतलब अभी भी जीत की गारंटी रहा है या नहीं? यह नतीजे देश की राजनीति को कोई नई दिशा देने वाले साबित होंगे भी या नहीं।

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