Home उत्तराखंड देहरादून बर्बादी के कगार पर पाक

बर्बादी के कगार पर पाक

0
2034


अंग्रेजी हुकूमत से आजादी के बाद अस्तित्व में आए पाकिस्तान को 75 सालों में भी यह समझ नहीं आ सका है कि वह जिन नीतियों पर चल रहा है वह उसे सिर्फ और सिर्फ बर्बादी की ओर ही ले जा सकती है। वर्तमान समय में वह अपनी उन नीतियों के कारण ही एक बार फिर हिंदुस्तान से एक ऐसी जंग में उलझ चुका है जो उसे बर्बादी के उस मुकाम तक पहुंचा सकती है कि पाकिस्तान का अस्तित्व ही समाप्त हो जाए। पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान को भारत द्वारा की गई एयर स्ट्राइक से सबक लेने की जरूरत थी और किसी भी सूरत में वह नहीं होने देना चाहिए था जो 22 अप्रैल को पहलगाम में हुआ। जिसके कारण भारत को आतंकवादियों के संपूर्ण सफाये के लिए ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम देना पड़ा। भारत ने पाकिस्तान नहीं अपितू उसकी जमीन से संचालित होने वाले आतंकवाद पर हमला कर आतंकियों को मिटृी में मिलाने के काम पर पाकिस्तान को खुश होना चाहिए था क्योंकि भारत उसे एक ऐसी बड़ी मुसीबत से छुटकारा दिलाने का काम कर रहा था जिससे विश्व भर में उसे एक आतंकी राष्ट्र का तमगा दिया जाता है और जिसे खुद पाकिस्तान के हुक्मरान भी परेशान है लेकिन इसके उलट उसने आतंकियों के ताबूतों को पाकिस्तानी झंडे में लपेटकर तथा सेना ने उन्हें सलामी देकर पूरे विश्व को यह दिखा दिया है कि किस तरह वह इन आतंकवादियों की गुलामी करने पर विवश हो चुका है और आतंक के आकाओं को किस तरह खुला संरक्षण उसके द्वारा दिया जाता है। भारत की इस कार्यवाही का जवाब देने के लिए उसकी सेना द्वारा बीती रात भारत के 15 प्रमुख ठिकानों पर जिस तरह से मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए उससे वह यह समझता था कि वह भारत को प्रभावित कर सकेगा लेकिन वह एक बाल भर भी नुकसान भारत को नहीं पहुंचा सका है। सीमा पर कुछ रियाइशी इलाकों में आम लोगों को मार कर उसने भारत को और बड़ी कार्यवाही पर मजबूर कर दिया है जो भारत द्वारा की भी जा रही है। पहलगाम में आतंकी हमले से लेकर अब तक पाकिस्तान का शेयर मार्केट 15 000 की रिकॉर्ड गिरावट दर्ज कर चुका है। बीते कल भारी गिरावट के बाद लोअर सर्किट पर पहुंचे शेयर बाजार को बंद करना पड़ा। निवेशक अपना पैसा निकाल कर भाग रहे हैं क्योंकि पाकिस्तान की हुकूमत से उनका विश्वास उठ चुका है बाजार जो विश्वास और भरोसे से चलता है वह अगर समाप्त हो जाए तो फिर सब समाप्त हो जाता है। शेयर मार्केट की बदहाली यह बताती है कि उसकी आर्थिक संकट और अधिक बढ़ने वाला है। शेयर बाजार अर्थव्यवस्था की नब्ज माना जाता है। कंगाली के कगार पर खड़े पाकिस्तान का हाल क्या होने वाला है यह पूरे विश्व को दिख रहा है। तुर्किया और चीन तथा वह मुस्लिम कंट्री जो उसके साथ खड़े थे वह भी अब भाग खड़े हुए हैं। भारत के दो बड़े युद्ध व कारगिल की हार के बाद भी अगर पाकिस्तान यह समझे बैठा हैं कि वह भारत को हरा देंगे या झुका देंगे तो यह एक बड़ा मुगालता ही है। पाकिस्तान के लिए चुनौती भारत के साथ युद्ध नहीं है उसके आंतरिक हालत है जिसने उसे एक और विभाजन के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here