बन गई नई सरकार

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नरेंद्र मोदी ने कल प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के साथ ही अपना नाम तीन बार प्रधानमंत्री बनने वालों की सूची में दर्ज करा लिया है। कल संपन्न हुए शपथ ग्रहण समारोह में मोदी के साथ 72 मंत्रियों ने शपथ ग्रहण की है। जो उनके बीते दो कार्यकाल में सबसे बड़ा मंत्रिमंडल है। 2014 में उन्होंने 46 मंत्रियों के साथ तथा 2019 में 58 मंत्रियों के साथ सत्ता संभाली थी लेकिन इस बार उनके मंत्रिमंडल में 71 मंत्रियों ने शपथ ली है जो अब तक का सबसे जंबो मंत्रिमंडल है। दरअसल 2024 के इस चुनाव में बहुत कुछ अलग हुआ है जिसके कारण जंबो कैबिनेट सरकार की मजबूरी थी। राजग के सहयोगी दलों का अस्तित्व और भूमिका बढ़ने के कारण इस बार अपने सहयोगियों को कैबिनेट में प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व देकर उन्हें संतुष्ट नहीं किया जा सकता है इसलिए सरकार जिसकी जितनी भागीदारी के अनुरूप कैबिनेट में स्थान दिया जाना तथा स्टेट काम और कास्ट के हिसाब से संतुलन बनाना भी जरूरी था। वहीं दक्षिण भारत के राज्यों में अपने खुलते प्रवेश द्वार की संभावनाओं को मजबूत बनाने के लिए उन्हें भी तवज्जो देने की मजबूरी ने कैबिनेट के आकार को थोड़ा अधिक बड़ा बना दिया है। लेकिन इस कैबिनेट के चयन में कौशल दिखाने में कोई कमी उठाकर नहीं रखी गई है। 72 सदस्यीय इस कैबिनेट में 30 कैबिनेट मंत्री 35 राज्य मंत्री तथा पांच स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्री है। अगर कास्ट के दृष्टिकोण से देखा जाए तो ओबीसी संवर्ग के 27 मंत्रियों को सरकार में शामिल कर यह संदेश दिया गया है कि सरकार उनके हितों को लेकर पूरी तरह से सजग है वही 10 दलित और पांच आदिवासियों को इस सरकार का हिस्सा बनाया गया है। दरअसल यह भागीदारी जो ओबीसी एससी एसटी को मिल सकी है उसकी वजह भी भाजपा का जो वोट प्रतिशत कम हुआ है जिसके कारण वह मात्र 240 सीटों के आसपास तक ही पहुंच सकी उसी के मद्देनजर किया गया है। 2019 के चुनाव में 303 और अब के चुनाव में 370 का लक्ष्य जिससे वह इतनी ज्यादा पिछड़ गई उसके पीछे दलित और पिछड़ों का वोट बैंक खिसकना ही अहम कारण था। यूपी जहंा इसका सबसे बड़ा नुकसान भाजपा को हुआ यह उसी का परिणाम है। मोदी की इस नई सरकार में पुराने मंत्रियों को उनके काम और अनुभव के आधार पर तथा कास्ट के आधार के साथ क्षेत्र का आधार पर स्थान दिया गया है। उत्तराखंड राज्य से अल्मोड़ा से तीसरी बार सांसद चुनकर लोकसभा पहुंचने वाले अजय टम्टा को इसी वजह से मंत्रिमंडल में स्थान मिलना इसका उदाहरण है। अजय टम्टा लगातार दूसरी बार मंत्री बन सके और उन्होंने राजलक्ष्मी शाह तथा अजय भटृ को भी पीछे छोड़ दिया। इस सरकार में 43 मंत्री ऐसे हैं जिन्हें तीन—तीन बार मंत्री रहने और काम करने का अनुभव है। वही 6 मंत्री ऐसे हैं जो राज्यों के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। भले ही उत्तर प्रदेश में इस चुनाव में भाजपा को तगड़ा झटका लगा हो लेकिन यूपी के सबसे अधिक मंत्री बनाए गए जिस कुर्मी वोट बैंक व एससी, एसटी के खिसकने से ज्यादा नुकसान हुआ उन्हें पूरी तवज्जो दी गई है मोदी ने अपनी इस टीम में राजनाथ सिंह, अमित शाह, नितिन गडकरी, निर्मला सीतारमण को शामिल कर यह साफ कर दिया है की सरकार गृह, रक्षा, वित्त और विदेश जैसे अहम मंत्रालयों को अपने पास ही रखेगी सहयोगी दलों को क्या—क्या मंत्रालय दिए जाएंगे जल्द स्पष्ट हो जाएगा। हां एक अहम बात अभी भी यथावत बनी हुई है कि इस सरकार का भविष्य क्या हो सकता है। एनसीपी अजीत पवार गुट जो मंत्री पद ठुकरा चुके हैं तथा नीतीश और नायडू कब तक सरकार के साथ रहेंगे? जिस पर सरकार का भविष्य टिका है। दूसरा क्या यह एनडीए सरकार अपने पूरे 5 साल तक अस्तित्व बनाये रख सकेगी इस सवाल का जवाब आने वाला समय ही देगा।

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