मृत समाज, सड़ा गला सिस्टम

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तमाम सख्त कानूनो, सामाजिक जागरुकता और प्रशासनिक सतर्कता के बावजूद भी देश में महिला अपराध दरिंदगी के मामले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। मध्य प्रदेश के उज्जैन जिसे महाकाल की नगरी कहा जाता है, से जो एक 12 साल की मासूम के साथ दरिंदगी की जो घटना सामने आई है वह दिल दहला देने वाली है। हैवानियत का शिकार हुई इस बच्ची को दरिंदों ने जब सड़क पर फेंक दिया तो वह बच्ची घंटो तक शहर की गलियों में घूमती रही है न जाने मदद के लिए उसने कितने घरों के दरवाजे खटखटाए, न जाने कितने लोगों से गुहार लगाई लेकिन निर्वस्त्र और खून से लतपत इस बच्ची की मदद के लिए कोई एक भी व्यक्ति सामने नहीं आया जो अस्पताल तक भी पहुंचाने का साहस दिखा पाता। क्या हम इस समाज को जिसमें हम रह रहे हैं एक जिंदा और संजीदा समाज कह सकते हैं? वास्तव में यह एक मृत समाज नहीं है तो और क्या है? इस बच्ची को जिसने भी इस हाल में देखा वह बस बचकर निकल गया। बाद में इसे एक पुलिस कर्मी ने अस्पताल तक पहुंचाया। ऐसा नहीं है कि देश में इस तरह की हैवानियत या दरिंदगी की यह कोई पहली घटना है हर साल देश के किसी न किसी राज्य में इस तरह की अनेक घटनाएं घटित होती हैं। अभी बीते दिनों मणिपुर में हुई सांप्रदायिक हिंसा के दौरान देशवासियों ने महिलाओं पर किए गए अत्याचार की कुछ ऐसी ही तस्वीर देखी थी जिन्हें लेकर देश ही नहीं दुनिया भर में चर्चा हुई थी लेकिन न तो देश की सरकार को और न देश के समाज को इससे शर्मसार होते देखा गया। हां इन घटनाओं पर राजनीति होती जरूर देखी गई। दिल्ली के निर्भया कांड से लेकर निठारी कांड तक न जाने कितनी अनगिनत घटनाएं हैं जिनके बारे में सोचकर किसी का भी दिल फट जाए। लेकिन इस तरह की घटनाओं का सिलसिला देश भर में अविराम जारी है। उत्तराखंड के नैनीताल हल्द्वानी के गोला नदी क्षेत्र में एक मासूम के साथ दरिंदगी और उसके बाद उसकी निर्मम हत्या की घटना ने देवभूमि को हिला दिया था। एक साल पूर्व ऋषिकेश में अंकिता के साथ जो कुछ भी हुआ उसे लेकर अब तक आंदोलनों का दौर जारी है लेकिन निष्ठुर शासन—प्रशासन पर किसी बात से कोई प्रभाव पड़ता नहीं दिख रहा है। महाकाल की नगरी उज्जैन में जिस बालिका के साथ यह क्रूरतम और घिनौना अपराध हुआ है वह अभी तक अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही है। अभी तक उसके बारे में यह तक पता नहीं चल सका है कि वह कौन है क्योंकि वह बदहवास स्थिति में है अगर उसकी चेतना लौट भी आई तो वह क्या बता पाती है और उन दरिंदों को पहचान भी पाती है या नहीं जिन्होंने उसे इस स्थिति में पहुंचाया है यह सब भविष्य ही बताएगा। लेकिन पुलिस अब अज्ञात लोगों के नाम केस दर्ज कर उनकी तलाश में जुट गई है। देखना होगा कि अपराधी पकड़े भी जाते हैं या नहीं और अगर पकडे जाते हैं तो पुलिस उन्हें क्या सजा दिला पाती है। यह विडंबना ही है कि एमपी के सीएम शिवराज को हम कन्याओं का पूजन करते और उनके पैर पखारते हुए देखते हैं वहीं उनके राज्य में एक मासूम कन्या के साथ इस तरह की दरिंदगी का खेल खेला जाता है। महिला और बच्चियों की सुरक्षा के लिए तमाम कानून बनाने वाले और उन्हें पूरी सुरक्षा मुहैया करने का दावा करने वाले बच्चियों और महिलाओं की कितनी सुरक्षा कर पा रहे हैं उज्जैन की घटना इसका एक साक्षात प्रमाण है और इसके लिए हमारा मृत समाज और सड़ा गला सिस्टम ही जिम्मेदार है।

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