आफत की अतिवृष्टि

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इन दिनों उत्तराखंड, हिमाचल और एनसीआर सहित देश के कुछ हिस्सों में आसमान से आफत की बारिश हो रही है। बीते कल इस आफत के चलते हिमाचल में 8 लोगों की जान चली गई वही उत्तराखंड में भी 3 लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा है। दिल्ली में तो बारिश ने बीते 41 साल का रिकॉर्ड तोड़ डाला और यहां अभी बाढ़ की संभावनाएं बनी हुई है। देश के उत्तरी राज्यों में आगामी 2 दिनों के लिए मौसम विभाग द्वारा रेड अलर्ट जारी करते हुए कहा गया है कि यहां भारी से भी भारी बारिश हो सकती है। ऐसे में लोगों की परेशानियां बढ़ना स्वाभाविक है। अतिवृष्टि के कारण जहां मैदानी क्षेत्रों में फसलों को भारी नुकसान पहुंच रहा है वही पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कों के बंद होने से जरूरी सामान की आपूर्ति बाधित हो रही है। उत्तराखंड की बात करें तो यहां भारी बारिश के कारण 170 से भी अधिक सड़कों पर आवाजाही ठप हो गई है। एक तरफ राज्य में चार धाम यात्रा भी चल रही है तथा कावड़ यात्रा भी शुरू हो चुकी है। लाखों की संख्या में कांवड़िए और चारधाम यात्री सड़कों पर है जिनके लिए यह अतिवृष्टि जानलेवा साबित हो रही है। शासन—प्रशासन द्वारा भले ही हर रोज मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार एडवाइजरी जारी की जा रही हो या यात्रियों से यह अपील की जा रही हो कि वह मौसम को देखकर ही यात्रा करें लेकिन आस्था का असर इस कदर उफान पर है कि श्रद्धालुओं को रोक पाना संभव नहीं हो पा रहा है। कावड़िए हर साल की तरह गंगोत्री से गंगा जल भरने पहुंच रहे हैं वहीं हरिद्वार और ऋषिकेश में कांवड़ियों का मेला लगा हुआ है। बीते कल बड़कोट में एक पुलिसकर्मी की पहाड़ से पत्थर गिरने से मौत हो गई। पूरे चारधाम यात्रा मार्ग पर जगह—जगह पहाड़ों से मलबा और बोल्डर आने से सड़कें जगह—जगह बंद हो गई हैं। खास बात यह है कि इसके बीच भी यात्री जान जोखिम में डालकर इन बाधाओं को पार करते हुए यात्रा कर रहे हैं। प्रशासन ने इन सड़कों को खोलने के लिए 200 से अधिक जेसीबी फोकलैंड मशीनें लगा रखी है लेकिन यह काम खास तौर पर उस समय जब लगातार बारिश जारी हो अत्यंत ही जोखिम भरा है। मौसम विभाग का कहना है कि राज्य के 13 में से 8 जिलों में आने वाले 2 दिनों 11—12 जुलाई को भारी बारिश होने की संभावना है। जिसके मद्देनजर स्कूलों में अवकाश घोषित किया जा चुका है। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों के साथ पुलिस प्रशासन और सभी जिलाधिकारियों को अलर्ट पर रखा गया है। कर्मचारियों की छुटिृयों पर रोक लगा दी गई है लेकिन सामान्य जनजीवन को प्रभावित होने से नहीं बचाया जा सकता है। देहरादून और हरिद्वार सहित तमाम जिलों में नगरीय क्षेत्रों में जलभराव की समस्या से लोग परेशान हैं आवासीय क्षेत्रों में पानी भरने से लोगों को भारी दिक्कतें हो रही है व आर्थिक नुकसान हो रहा है। नदियों और नालों के उफान पर होने से भी यातायात प्रभावित हुआ है। राज्य में हर मार्ग पर ऐसे नाले—खाले और रपटे है जिन्हें पार करना जान पर खेलने जैसा ही है। इनमें वाहनों और लोगों के बहने की घटनाएं आम हैं। लोगों से अपील के बाद भी कि वह नदी—नालों से दूर रहें, आए दिन ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं। खास बात यह है कि अभी तो यह मानसून की शुरुआत है अगर अतिवृष्टि का यह क्रम लंबे समय तक जारी रहा तो यह मुश्किलें और भी अधिक बढ़ेगी।

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