सूबे की बदहाल सड़कें

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उत्तराखंड की सड़कों की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। सूबे की राजधानी देहरादून से लेकर पूरे राज्य की इन बदहाल सड़कों से सूबे में आने वाले पर्यटकों से लेकर आम आदमी तक को अपनी जान जोखिम में डालकर इन सड़कों से आना—जाना पड़ रहा है। अभी बीते दिनों मुख्यमंत्री धामी ने एक ऐप लांच की थी और दावा किया था कि अगर आपके क्षेत्र की कोई सड़क खराब है तो इस ऐप पर शिकायत दर्ज कराइए एक सप्ताह के भीतर आपकी सड़क बन जाएगी। ऐसा लगता है कि जैसे मुख्यमंत्री धामी देहरादून में रहते ही नहीं जिसके कारण उन्हें दून की सड़कों की स्थिति की कोई जानकारी नहीं है और न राज्य के अन्य जिलों की सड़कों की कोई जानकारी है। यह हैरान करने वाली बात है कि राजधानी की जिन खस्ताहाल सड़कों के बारे में लगातार मीडिया में खबरें आती रहती है और आए दिन फोटो छपते रहते हैं उनकी तरफ क्यों कभी किसी का ध्यान नहीं जाता है। सूबे की सरकार के मंत्री और विधायकों से लेकर सचिवालय और विधानसभा में बैठने वाले तमाम आला अफसर कोई हवा में उड़कर तो आते—जाते नहीं है इन्हीं सड़कों से होकर उनका भी आना जाना होता है लेकिन उनके द्वारा कभी इस पर गौर क्यों नहीं किया जाता है। अभी मानसून की शुरुआत हुई है लेकिन राजधानी दून कि इन सड़कों की जो दुर्दशा हो चुकी है वह हैरान करने वाली है। दून की 80 फीसदी सड़कें खुदी पड़ी है या उनमें गहरे गहरे गड्ढे हैं जिन पर चलना कम से कम बारिश के मौसम में जब इनमें पानी और कीचड़ भरा हो अत्यंत ही जोखिम पूर्ण काम है। बीते कई सालों से सरकार को यह बहाना मिला हुआ है कि राजधानी दून में स्मार्ट सिटी के कामों के कारण इन सड़कों को ठीक नहीं किया जा रहा है। दूसरे राज्यों से आने वाले लोग देहरादून की ऐसी स्थिति को देखकर यही कहते हैं कि यही है वह देहरादून जिसके बारे में वह तमाम तारीफें सुनते आए हैं। यही नहीं राज्य के अन्य तमाम जिलों का हाल भी कुछ अलग नहीं है। राष्ट्रीय राजमार्गों से लेकर राज्य राजमार्ग और संपर्क मार्गों से लेकर ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों की स्थिति कहीं भी ठीक नहीं है राज्य में डेढ़—दो माह से चल रही चार धाम यात्रा पर आने वाले लोग इन खराब सड़कों के कारण किस तरह की दिक्कतें झेल रहे हैं यह सिर्फ चार धाम यात्री ही जान सकते हैं। बीते कल चमोली में बदरीनाथ हाईवे पर हुए भूस्खलन के कारण हजारों की संख्या में यात्रियों के फंसने की घटना इसका उदाहरण है। चार धाम यात्रा के दौरान यह कोई पहली बार नहीं हुआ है अब तक दर्जनों बार ऐसी समस्या सामने आ चुकी है जब मार्ग बाधित होने के कारण इन यात्रियों को भूखे प्यासे ही रास्ते में दिन व रात गुजारने पर विवश होना पड़ा है बीते कल बद्रीनाथ धाम व हेमकुंड साहिब जाने वाले हजारों लोग रास्ते में फंसे रहे और 20 घंटे में भी रास्ता नहीं खोला जा सका। बारिश के कारण राज्य की तमाम सड़कें पानी की तेज धार में बह गई हैं या फिर मलवा और पत्थर आने से बंद हो गई हैं, इनकी संख्या सैकड़ों में है। आवागमन ठप होने के कारण सप्लाई आपूर्ति ठप होना स्वाभाविक है। जिसके कारण पहाड़ के लोगों की मुश्किलें बढ़ रही है। बारिश के सीजन में इन सड़कों की मरम्मत व सुधारीकरण का काम भी संभव नहीं है। इसलिए आने वाले दो—तीन महीनों में इस समस्या से निजात मिल पाना भी संभव नहीं है। उत्तराखंड राज्य गठन से लेकर अब तक सिर्फ एनडी तिवारी के कार्यकाल में सड़कों की जो बेहतर स्थिति रही उसे लोग आज भी मिसाल के तौर पर याद करते हैं लेकिन इसके बाद सड़कों की राज्य में कभी बहुत बेहतर स्थिति नहीं रही। सरकार भले ही विकास के लाख दावे करें लेकिन राज्य की खस्ताहाल सड़कें इसकी कलई खोल रही हैं।

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