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पर्यटन राज्य बनने की तैयारी

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उत्तराखंड राज्य बनने से लेकर अब तक इस पर्वतीय राज्य के स्वरूप और आर्थिकी आधार को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं होती रही है कोई इसे पर्यटन राज्य तो कोई इसे ऊर्जा प्रदेश बनाने की परिकल्पना करता रहा है। अब तक तमाम सरकारों ने इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की है जो सरकारें राज्य की एक राजधानी जैसे मुद्दे पर फैसला नहीं कर पाई वह इस अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दे पर फैसला लेती उनसे इसकी उम्मीद भी क्या करनी थी लेकिन समय के साथ स्थितियां बदली और अब यह राज्य धीरे—धीरे एक पर्यटन राज्य के रूप में विकसित होना शुरू हो गया है। देहरादून दिल्ली के बीच बने एक्सप्रेसवे के लोकार्पण के समय केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने अपने संबोधन में साफ—साफ कहा है कि यह केवल एक आर्थिक गलियारा नहीं है। इस एक्सप्रेसवे से राज्य के पर्यटन और रोजगार के सारे विकास के नए रास्ते खुलेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य में प्रस्तावित दो रोपवे जिस दिन पूरे हो जाएंगे तथा दून से मसूरी के लिए एक और नया सड़क मार्ग बन जाएगा विकास की गति और अधिक हो जाएगी। इसमें कोई दो राय नहीं है कि देश—विदेश से देहरादून आने वाले पर्यटकों को इस एक्सप्रेसवे से दून तक पहुंचना अति सरल और सुखद हो जाएगा वहीं उत्तर प्रदेश तथा हरियाणा और हिमाचल जाने आने का रास्ता भी सुलभ हो जाएगा क्योंकि यह एक्सप्रेसवे कई अन्य नेशनल तथा प्रमुख मार्गाे से जुड़ा हुआ है। इस एक्सप्रेसवे के बारे में भले ही इस समय कई तरह की बातें की जा रही हों लेकिन इस एक्सप्रेसवे का लोकार्पण ऐसे समय में हुआ है जब चार धाम यात्रा का आगाज होने जा रहा है तथा हरिद्वार में महाकुंभ मेले की तैयारी शुरू हो चुकी है। बड़ौत, बागपत, सहारनपुर और शामली के रास्ते दिल्ली अक्षरधाम तक जाने वाले इस कॉरिडोर के शुरू होने से दिल्ली—दून की दूरी भले ही 22 किलोमीटर कम हुई हो लेकिन समय की बचत अधिक फायदेमंद होगी क्योंकि अभी तक दिल्ली का यह सफर चार से पांच घंटे में पूरा होता था जो अब मात्र ढाई घंटे में पूरा होगा। हालांकि इस पर बने छह टोल टैक्स आने—जाने वाले लोगों की जेबें ढीली कर सकते हैं इस रोड पर बने टोल टैक्स कार सवार लोगों से एक तरफ के 600 रूपये तथा एक ही दिन में वापसी करने वालों से 1000 रूपये टोल वसूलेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानना है कि हर आदमी के हाथों की रेखाओं में उसका भविष्य छिपा होता है ठीक वैसे ही सड़कों में किसी भी राज्य के विकास का राज्य निहित होता है, उन्होंने प्रधानमंत्री बनने से पूर्व ही ऑल वेदर रोड के निर्माण की जो घोषणा की थी उसे धरातल पर उतारने के बाद चार धाम यात्रियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है। हेमकुंड साहिब में भी अब पहले से डेढ़—दो गुने श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। देखना होगा कि रोपवे बने के बाद पर्यटकों की संख्या में कितना इजाफा होता है लेकिन यह तय है कि कर्णप्रयाग—ऋषिकेश रेलवे लाइन और केदारनाथ व हेमकुंड साहिब रोपवे बनने के बाद उत्तराखंड राज्य एक टूरिस्ट स्टेट के रूप में ही स्थापित होने की तैयारी कर चुका है जिसमें दून—दिल्ली एक्सप्रेसवे की अहम भूमिका रहेगी।

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