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शैलजा की सिपाहियों को नसीहत

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अपने पांच दिवसीय उत्तराखंड दौरे पर आई कांग्रेस प्रभारी श्ौलजा ने हल्द्वानी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए तमाम उन नेताओं को जो स्वयं को कांग्रेस का सेनानी बताते हैं तथा उन नेताओं को जो अपने आप को किसी सेनानी का सिपाही बताते हैं एक कठोर संदेश दिया है। उनका कहना है कि जो नेतागण मंच पर बैठे हैं उन्हें मंच पर बैठे रहने का अधिकार किसने दिया है? उन्होंने कहा कि हम सभी कांग्रेसी नेताओं को अपने—अपने गिरेबान में झांक कर देखना चाहिए। उन्होंने अपनी बात का आशय थोड़ा और साफ करते हुए कहा कि इस बार ऐसा नहीं होना चाहिए कि किसी नेता का सिपाही होने पर उसे टिकट मिल जाएगा और ऐसा भी नहीं होगा कि जिसे टिकट नहीं मिलेगा तो वह पार्टी के लिए काम छोड़कर बैठ जाएगा। कुमारी श्ौलजा ने यह बात भले ही सभी नेताओं के लिए समान रूप से कही हो लेकिन इस दौर में संजय नेगी को पार्टी में शामिल न किए जाने को लेकर चल रही हरीश रावत की नाराजगी से ही जोड़कर देखा जा रहा है। कुमारी श्ौलजा ने अभी से साफ कर दिया है कि कोई भी नेता इस गलतफहमी में न रहे कि उसका टिकट तो पक्का है क्योंकि वह किसी नेता विशेष का सिपाही है। उन्होंने कांग्रेस के नेताओं व कार्यकर्ताओं से कहा कि जनता आपसे यह उम्मीद करती है कि हमारी सरकार होगी तो हम जनता के लिए काम करेंगे हमें किसी नेता का सिपाही नहीं बनना है हम सबको कांग्रेस का सिपाही बनना है हमें चाहे टिकट मिले न मिले हमें कांग्रेस के लिए काम करना है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सिर्फ एक होता है। मंत्री कई होते हैं और विधायक भी कई होते हैं टिकट पाने की इच्छा भी तमाम लोगों की होती है। उनका साफ कहना है कि हमारी मंशा सिर्फ कांग्रेस का सिपाही होने की ही होनी चाहिए कौन कब क्या बन जाता है यह अलग बात है कांग्रेस में शामिल होने वाले नेताओं को भी श्ौलजा के इस बयान का मतलब समझने की जरूरत है खास तौर पर उन नेताओं को जो सिर्फ अपनी कांग्रेस में ज्वॉइनिंग को ही टिकट की गारंटी माने बैठे हैं। श्ौलजा ने अपने बयान में उन नेताओं को चेतावनी दी है जो स्वयं को हरीश रावत का सिपाही बताते हुए संजय नेगी के ज्वाइनिंग के मुद्दे पर कांग्रेस को हराने की और सामूहिक इस्तीफे की बातें कर चुके हैं। संजय नेगी और हरीश रावत का प्रकरण अभी समाप्त नहीं हुआ है भले ही उनका राजनीतिक अवकाश समाप्त हो गया हो। हरीश रावत अपनी मीडिया पोस्ट में साफ लिख रहे हैं कि कुछ लोगों द्वारा उन्हें नीचा गिराने के निरंतर असफल प्रयास किये जा रहे हैं लेकिन वह अभी भी एक जीत के तलबगार हैं। अवकाश समाप्त होने के बाद वह कुमारी श्ौलजा से मुलाकात और बात करेंगे इस बारे में अभी पुख्ता तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है भले ही वह खुद उन्हें गुलदस्ता भेंट करने की बात कह चुके हैं। प्रीतम सिंह से उनकी बंद कमरे में 3 घंटे लंबी बातचीत के बाद संजय नेगी भी प्रीतम सिंह से मिल चुके हैं। उधर गणेश गोदियाल भी संजय नेगी की ज्वाइनिंग पर स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं आने वाले दो दिनों में श्ौलजा की मौजूदगी में इस प्रकरण का कोई यथोचित हल भले ही कांग्रेस निकाल ले लेकिन प्रारंभिक दौर में ही कांग्रेस नेताओं के बीच अदावत की जो लकीरें हरीश रावत की नाराजगी से ंिखच चुकी है उसने कांग्रेस की उस बढ़त और उस उत्साह पर पानी जरूर फेर दिया जो 6 लोगों की ज्वाइनिंग के बाद देखी जा रही थी। आगे क्या होने वाला है? इसके बारे में कोई भविष्यवाणी तो नहीं की जा सकती है लेकिन चुनाव से ऐन पूर्व कांग्रेस नेताओं के बीच जो कुछ भी चल रहा है वह कांग्रेस के लिए शुभ संकेत नहीं है। इस प्रकरण से कांग्रेस को एक डेंट तो लग ही गया है। भले ही आगे कुछ भी हो।

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