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विसंगतियों के बीच चुनावी घोषणा

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कल रविवार यानी छुटृी वाले दिन चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा दक्षिण भारत के पांच राज्यों का चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया गया। ज्ञानेश कुमार ने ऐसे समय में इस चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की है जब संसद में विपक्षी सांसदों द्वारा महाभियोग का प्रस्ताव पेश किया जा चुका है तथा निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सैकड़ो सवाल खड़े किए जा रहे हैं और ईरान—इजरायल के बीच जारी जंग विश्व युद्ध के मुहाने पर दस्तक दे रहा है। ज्ञानेश कुमार का अपने पद पर बना रहना और आयोग के चुनावी कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने का मामला देश में चल रही एसआईआर की प्रक्रिया जिसमें करोड़ों मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं और उन्हें मताधिकार से बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है, के कारण भी चर्चाओं के केंद्र में है। खैर इन तमाम विसंगतियों के बीच भी अगर चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हो चुकी है तो चुनाव होने तो तय है ही। लेकिन तमाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विसंगतियों के बीच होने जा रहे यह चुनाव केंद्र की सरकार और भाजपा की राजनीति इसके खिलाफ पूरे देश में एक माहौल देखा जा रहा है भविष्य तय करेंगे इसलिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। चुनाव आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार पश्चिम बंगाल में यह चुनाव दो फेज में होंगे तथा अन्य चार राज्यों में एक ही फेज में होंगे। पश्चिम बंगाल में मतदान के लिए 23 व 29 अप्रैल को तथा तमिलनाडु में 23 अप्रैल व शेष तीन राज्य असम, केरल और पांडुचेरी में 9 अप्रैल को मतदान होना है। इन सभी पांच राज्यों के चुनाव परिणाम 4 मई को आएंगे। कुल मिलाकर इन सभी पांच राज्यों में लगभग 824 विधानसभा सीटे हैं जिन पर 17.5 करोड़ मतदाताओं को यह फैसला करना है कि कहां किसकी सरकार बनेगी। सबसे अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि इस चुनावी प्रक्रिया के खिलाफ अपनी चुनावी जंग को सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाने वाली पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जहां एसआईआर के तहत 58 लाख वोटरों के वोट काटे गए हैं एक बार फिर अपनी जीत का परचम फहरा कर इतिहास रचेगी या सत्ता से उन्हें बाहर धकेल कर भाजपा नया इतिहास बनायेगी? पश्चिम बंगाल में कुल विधानसभा सीटें 294 हैं तथा बहुमत के लिए 148 सीटें चाहिए। पश्चिम बंगाल के चुनाव के बारे में इस बार अहम बात यह है कि यहां पिछले विधानसभा चुनाव आठ फेज में कराए गए थे तथा एक रणनीति के तहत भाजपा तथा मोदी और शाह के लिए एक लंबा समय चुनाव प्रचार और उनके यहां मौजूदगी के लिए दिया गया था लेकिन इस बार सिर्फ दो पेज में ही यह चुनाव निपट जाएगा। राजनीती की समझ रखने वालों का कहना है कि ऐसा इस बार प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी कम करने के लिए किया गया है क्योंकि भाजपा को अब यह दिखने लगा है कि मोदी मैजिक का दौर अब खत्म हो चुका है। इसलिए इस बार उन्हें प्रचार में कम से कम रहने की नीति पर काम किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल के बाद जहां का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है वह तमिलनाडु है जहां 234 विधानसभा सीटें हैं यहां लगभग एक करोड़ मतदाताओं के नाम काटे गए हैं जो सबसे अधिक है देखना होगा कि क्या भाजपा यहां इस बार 118 सीटों के जादुई आंकड़े को छू सकेगी। केरल की 140 सीटों व असम की 126 सीटों पर कड़ा मुकाबला होगा अब 4 मई को आने वाले चुनावी नतीजे ही बताएंगे कि देश की राजनीति किस दिशा में जा रही है।

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