Home उत्तराखंड देहरादून मृत समाज और सिस्टम की नाकामी

मृत समाज और सिस्टम की नाकामी

0
89


तमाम सख्त कानून, सामाजिक जागरूकता और प्रशासनिक सर्तकता के बावजूद भी देश में महिलाओ के साथ घटित होने वाले अपराधों में कमी नहीं आ रही है। बीते दिनों उत्तराखण्ड की राजधानी देहरादून में लगातार एक के बाद एक तीन महिलाओं की हत्या हो गयी। जो दिल दहलाने के लिए काफी थी। इनमें से एक युवती को तो हत्यारें द्वारा दिन दहाड़े भरे बाजार में मारा गया। खून से लतपत इस लड़की की मदद के लिए कोई भी एक व्यक्ति सामने नही आया। जो उसे बचा पाने का साहस दिखा पाता। क्या हम इस समाज को जिसमे हम रहे रहे है। एक जिंदा व संजीदा समाज कह सकते है? वास्तव मेे यह एक मृत समाज नहीं है तो क्या है? इस युवती को इस हाल में जिसने भी देखा वह कन्नी काटकर निकल गया। ऐसा नहीं है कि इस तरह की हैवानियत की यह पहली घटना है। हर साल देश में किसी न किसी राज्य में इस तरह की अनेक घटनाएं घटित होती है। अभी बीते दिनो मणिपुर में हुई साम्प्रदायिक हिंसा के दौरान देशवासियों ने महिलाओं पर किये गये अत्याचार की कुछ ऐसी तस्वीरे देखी थी जिन्हे लेकर देश ही नहीं दुनिया भर में चर्चा हुई। लेकिन न तो देश की सरकार को और न देश के समाज को इससे शर्मशार होते देखा गया। अभी कुछ वर्ष पूर्व ऋषिकेश में अंकिता के साथ जो कुछ भी हुआ उसे लेकर अब तक आंदोलनों का दौर जारी है। बीते रोज भी इस मामले में तमाम संगठनो द्वारा अपनी मांगो को लेकर महापंचायत की गयी थी। लेकिन निष्ठुर शासन—प्रशासन पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है। महिलाओ और बच्चियों की सुरक्षा के लिए तमाम कानून बनाने वाले और उन्हे पूरी सुरक्षा मुहैया कराने का दावा करने वाले उन्हे कितनी सुरक्षा मुहैया करा पा रहे है। यह राजधानी देहरादून के दुल्हा बाजार में दिन दहाड़े सामने आ चुका है, और इसके लिए हमारा समाज व सिस्टम जिम्मेदार है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here