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एक परिवार से एक टिकट का फार्मूला

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कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी श्ौलजा अपना पांच दिवसीय दौरा पूरा होने के बाद वापस दिल्ली लौट गई है लेकिन उनके इस दौरे के बाद भी कांग्रेसी नेताओं के बीच आपसी मत भेदों और मन भेदों की स्थिति जस की तस ही बनी हुई है। उन्होंने जाते—जाते एक अन्य अहम बात और ऐसी कह दी है जो अब कांग्रेस नेताओं के बीच सबसे अधिक बेचैनी का सबब बन गई है। श्ौलजा ने अभी से यह स्पष्ट कर दिया है कि 2027 के चुनाव में एक परिवार के सिर्फ एक ही व्यक्ति को टिकट दिया जाएगा? अगर पार्टी ने इस फैसले को जमीन पर उतारा तो हरीश रावत तथा प्रीतम सिंह ही नहीं वह तमाम नेता जो अपने पुत्रों व पुत्री को या पुत्र वधुओं को टिकट दिलाने की उम्मीद लगाए बैठे थे उनका क्या होगा? पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत जो अपनी बेटी को हरिद्वार ग्रामीण क्षेत्र से विधायक बनवा चुके हैं तथा उनके बेटे आनंद रावत जिसे चुनाव मैदान में उतारने की कोशिश वह लंबे समय से ही कर रहे हैं तथा उनकी वर्तमान नाराजगी के पीछे भी यही उद्देश्य बताया जा रहा है उनका क्या होगा? यशपाल आर्य के बेटे संजीव आर्य भले ही पिछले चुनाव में हार गए हो लेकिन क्या यशपाल आर्य इस बात की कोशिश नहीं करेंगे कि उन्हें टिकट दिया जाए? रंजीत रावत सहित तमाम नेता है जो अपनों को टिकट दिए जाने की कोशिशों में लगे हुए हैं और तो और अभी हरीश रावत ने भी एक ऐसा बयान दिया जिसमें उन्होंने कहा कि अगर पार्टी कहेगी तो वह भी चुनाव लड़ सकते हैं। जबकि श्ौलजा का साफ कहना है कि बात गढ़वाल की हो या कुमाऊं की एक परिवार से सिर्फ एक ही व्यक्ति को टिकट दिया जाएगा। कांग्रेस में अभी तक तो सिर्फ कांग्रेस में किसकी ज्वॉईनिंग हो और किसकी नहीं हो तथा किसने किसकी ज्वॉईनिंग कराई और किसने किसकी ज्वाईनिंग रुकवाई जैसे ही मुद्दे चर्चाओं के केंद्र में थे जिनके नाम सुर्खियों में रहे हैं उनमें सिर्फ हरीश रावत और संजय नेगी के नाम ही शामिल नहीं है अपितु प्रकाश जोशी और डा. हरक सिंह के बयान भी चर्चाओं के केंद्र में हैं दरअसल कांग्रेस के अंदर की इस अंर्तकलह को समझ पाना बहुत मुश्किल ही नहीं कई बार तो नामुमकिन जैसा लगता है। कांग्रेस की नीतिगत बैठकों की बातों के सार्वजनिक होने के मुद्दे को लेकर तो प्रकाश का नाम चर्चाओं में था ही उनके द्वारा हल्द्वानी में अपने संबोधन में पार्टी को तांत्रिकों से सावधान रहने की जो नसीहत दी गई वह भी चर्चाओं का विषय बन गई। कांग्रेस नेताओं को एक दूसरे से यह पूछते देखा गया कि कांग्रेस में तांत्रिक नेता कौन है। प्रकाश जोशी से मीडिया के लोगों ने भी जब तांत्रिक नेता का नाम पूछा गया तो उनका जवाब भी ऐसा था कि लोग उनके मायने ढूंढते रह जाएं। वह कहते हैं कि उनका यह बयान किसी नेता विशेष के लिए नहीं था। वह कहते हैं कि ज्योतिषी और तांत्रिक होने के बीच जितना बारीक साफ पर्क है उतना ही एक पॉलीटिशियन और नेता के बीच है। साथ ही वह यह भी कहते हैं कि लोगों ने उनकी बात का मतलब गलत निकाल लिया है लेकिन इसके इतर एक सच्चाई यह भी है कि नेता कोई भी हो और पार्टी भले ही कोई हो या फिर नेता कोई भी हो। ज्योतिष और तंत्र—मंत्र का आश्रय लेने वाले नेताओं की देश में कोई कमी नहीं है।

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