कहा जाता है कि जो दिखता है वही बिकता है। लेकिन सवाल यह है कि आखिर दिखावे की यह राजनीति कब तक? पीएम मोदी के दून आगमन की जो भव्य तैयारियंा शासन—प्रशासन द्वारा की गई है जिस तरह से पीएम के रोड शो और उन तमाम सड़कों तथा स्थानों को सजाया संवारा गया है जहां से उन्हें गुजरना है या जाना है काश भाजपा की ट्रिपल इंजन वाली सरकार और प्रशासन ने हमेशा के लिए इस खूबसूरत शहर को सजाने का प्रयास किया गया होता। सड़कों के गढ्ढे भरने से लेकर साफ सफाई और रंगाई पुताई करने में किसी तरह की कोई कोर कसर उठाकर नहीं रखी गई है। यह अलग बात है कि देश के स्मार्ट शहरों की सूची में शामिल इस शहर को लाखों करोड़ खर्च करने के बाद भी सरकार स्मार्ट सिटी नहीं बना सकी खैर अब उस स्मार्ट सिटी योजना की बात ही क्या करना जो बंद की जा चुकी है। एक दिन के लिए ही सही और थोड़े हिस्से को ही सही स्मार्ट दिखाने में शासन प्रशासन ने जो मेहनत की है वह इस बात का सबूत जरूर है कि शासन प्रशासन की क्षमता में कोई कमी नहीं है वह कम से कम समय में वह सब कुछ कर सकती है जो वह करना चाहती हो। इसका उदाहरण वह बैनर पोस्टर और तमाम कट आउट भी है जो पूरे शहर के बिजली पोल से लेकर उन तमाम जगहों पर लगे हैं जहां भी संभव था। पीएम के इस दौरे के लिए क्या—क्या किया गया उसकी फेहरिस्त अत्यंत लंबी है। कई दिनों से सड़कों को बंद किए जाने से लेकर उनके रोड शो के मार्गाे पर सभी व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद किए जाने और डाट काली माता मंदिर को दो दिन के लिए आम आदमी के पूजा पाठ के लिए बंद किए जाने तक क्या—क्या नहीं किया गया है? सबका उल्लेख संभव नहीं है लेकिन दो दिनों के लिए लोग 100 किलोमीटर का चक्कर काट कर दून पहुंच रहे हैं यह अलग बात है। व्यापारिक प्रतिष्ठान तो बंद रहेंगे ही लेकिन इन प्रतिष्ठानों में काम करने वालों को प्रशासन ने सरकारी ड्यूटी पर लगा दिया गया है। रोड शो के दौरान यह कर्मचारी हाथ में भाजपा का झंडा लेकर पीएम को हाथ हिला कर स्वागत करेंगे दरअसल पीएम मोदी के इस दौरे को भव्य और दिव्य बनाने के कई अहम कारण है। सरकार के सामने 2027 की शुरुआत में होने वाले राज्य के विधानसभा चुनाव तो है ही इसके साथ ही पीएम मोदी की लार्जर इमेज को इस देहरादून एक्सप्रेसवे के लोकार्पण के जरिए उन राज्यों तक पहुंचाने की भी कोशिश है जहां अभी चुनाव हो रहे हैं। फेस वैल्यू की चमक दमक के लिए जनता की गाढ़ी कमाई का भले ही 50—60 करोड़ ठिकाने लग जाए इससे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता है। इस सब तैयारी या भव्यता और दिव्यता के दिखावे के पीछे और भी कई अहम कारण है। सूबे की सरकार पीएम मोदी को उसे सच को दिखाना ही नहीं चाहती है जो धाकड़ कहे जाने वाली इमेज को डैमेज करने वाले हो। इसलिए प्रधानमंत्री मोदी को सिर्फ हरा—हरा ही दिखाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के लिए भीड़ जुटाने की चुनौती से निपटने के लिए भी तमाम इंतजाम किए गए हैं टोल फ्री करना भी इसी क्रम में लिया गया निर्णय है। शासन—प्रशासन ने दिन—रात एक करके इस कुछ घंटे के कार्यक्रम को सफल बनाने की जो तैयारियंा की गई है उसके लिए वह बधाई के पात्र हैं। काश वह इतनी दृढ़ इच्छा शक्ति और ऊर्जा के साथ हमेशा काम कर पाते?




