Home उत्तराखंड देहरादून देवभूमि में घुल रहा है नशे का जहर

देवभूमि में घुल रहा है नशे का जहर

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उत्तराखण्ड राज्य में इन दिनोंं नशे का कारोबार पूरी तरह फैल चुका है। राज्य को कोई जिला अब ऐसा नहीं बचा है जहंा इस कारोेबार ने अपने पैर न फैलायें हो। ड्रग्स माफियाओं द्वारा इस कारोबार को चलाने के लिए अब अपना सिंडीकेट भी बना लिया गया है। जिसमें युवक—युवतियंो सहित बच्चे बूढ़े भी शामिल हो चुके है। बीते तीन दिन पूर्व राज्य की एसटीएफ द्वारा कुमांऊ मंडल में तीन करोड़ से अधिक की ड्रग्स पकड़ी गयी थी। जिसे बरेली का एक नशा तस्कर उत्तराखण्ड लेकर आया था। जिसने पूछताछ में बताया था कि राज्य में बड़ी मात्रा में ड्रग्स उत्तर प्रदेश के बरेेली जिले से सप्लाई की जाती है। ऐसा नहीं है कि शासन—प्रशासन को इस सब की जानकारी नहीं है लेकिन ड्रग्स माफिया का यह सिंडीकेट इतना मजबूत है कि उसे तोड़ने में शासन प्रशासन भी नाकाम साबित हो रहा है। बात अगर राज्य की राजधानी देहरादून की करे तो यहंा पछुवा दून से लेकर परवा दून तक कई क्षेत्रों में नशे का यह काला कारोबार किया जा रहा है। जिस कारण दून मं अपराधों का ग्राफ बढ़ चुका है। बीते कुछ दिनों पूर्व रायपुर क्षेत्र के स्थानीय लोगों द्वारा इस कारोबार के खिलाफ आवाज उठाते हुए शान्ति विहार क्षेत्र के एक स्थान पर भारी हंगामा खड़ा कर दिया गया था। जिसके बाद पुलिस प्रशासन की निगरानी में नशा कारोबारियों को यह कारोबार न करने की सलाह दी गयी थी। राजधानी में बढ़ने वाले अपराधों का जब पुलिस खुलासा करती है तो स्वंय पुलिस द्वारा यह कबूल किया जाता है कि आरोपी ने नशे की लत के चलते इस अपराध को अंजाम दिया था। यूं तो शासन—प्रशासन द्वारा कई बार राज्य को नशा मुक्त बनाने के दावे किये जाते है। लेकिन यह दावे धरातल पर कितने उतर चुके है यह सबके सामने है। पुलिस प्रशासन को अगर नशामुक्त राज्य बनाने के लिए सही दिशा में कार्य करना है तो उसे इस सिंडीकेट को जड़ से खत्म करना होगा नहीं तो यह दावे सिफ कागजो तक ही सीमित रहेगें?

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