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गणतंत्र को बनायें मजबूत

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अपने गणतंत्र के आठ दशक में देश ने सभी क्षेत्रों में अतुलनीय उपलब्धियंा हासिल की है। लेकिन ऐसा नहीं है कि हमने अब तक जो कुछ कर लिया वह बहुत पर्याप्त है। अभी बहुत कुछ किया जाना शेष है। अभी बहुत सारी चुनौतियंा देश के सामने है। आज सम्पूर्ण विश्व कई तरह की परेशानियों से जूझ रहा है। यह अलग बात है कि भारत अपनी सभी समस्याओं का खुद समाधान करने में जुटा हुआ है। लेकिन आज देश में बढ़ती महंगाई एक बड़ी चुनौती है। लगातार बढ़ रही जनसंख्या के लिए खाघान की उपलब्धता कोई कम बड़ी चुनौती नहीं है। अगर हम देश में बढ़ती महंगाई को नियंत्रण में रखना चाहते है तथा आने वाले दशकों में देश को खाघान सम्पन्न बनाना चाहते है तो देश के किसानों को इसके लिए प्रेरित किये जाने की सबसे अहम जरूरत है। पिछले दशकों से देश के किसानों की जो दुर्दशा हुई है। उससे हम सभी भलीं भांति वाकिफ है। देश में किसानों ने अपने संकट के कारण आत्महत्याओ तक की है। उन्हे अपनी मांगों के लिए कई कई माह सड़कों पर प्रदर्शन करने पड़े। अब यह सब रूकना ही चाहिए। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि इस देश की तरक्की का रास्ता गांव व किसानों के खेतों से ही होकर जाता है। किस तरह से किसान को समृद्ध बनाया जा सकता है यह आज देश की सबसे बड़ी जरूरत है। यह अलग बात है कि हम इसके लिए क्या कार्ययोजना तैयार करते है। आज सम्पूर्ण विश्व में आंतकवाद एक गम्भीर चुनौती के रूप में उभर कर सामने आया है। भारत ने आंतकवाद का जो दंश विगत कुछ दशकों में झेला है। भारत हमेशा विश्व राष्ट्रो को इस समस्या से सर्तक करता रहा है। यह अलग बात है कि विकसित देशों ने कभी इसे गम्भीरता से नहीं लिया। आज जब इसकी लपटों से पूरा विश्व घिर चुका है। तब जाकर इस समस्या पर विश्व देशों ने एकजुट होना शुरू किया है। देश के समग्र विकास के लिए एक नई रणनीति नई कार्ययोजनाए और नये जोश की जरूरत है। स्वरोजगार और रोजगार के नये अवसर सृजन करके ही देश के हर युवा हाथों को काम दिलवाया जा सकता है। एक सुनियोजित विकास आज 77 सालों बाद भी अपेक्षित है। आज पूरा विश्व भारत पर नजरें गढ़ाये बैठा है क्योंकि भारत आज बड़ी तेजी से एक बड़ी आर्थिक शक्ति बनकर उभर रहा है। अब गणतंत्र व स्वतंत्रता दिवस की वर्षगांठ महज एक अदायगी नहीं रह गयी है। हर बार एक नयी सोच के साथ देश को आगे ले जाने की बात आम हो चुकी है। इस कार्य में आम युवाओं को अपनी सहभागिता तय करनी होगी तभी विकास की नई राह खुलेगी। यह 77 साल का गणतंत्र अपने भविष्य की किन योजनाओं के साथ आगे बढ़ता है यह सब आप और हम पर ही निर्भर करता है।

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